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गाजीपुर बॉर्डर: किसानों ने कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर किया होलिका दहन
Sun, 28 Mar 2021 07:51 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 28 Mar 2021 07:51 PM IST
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किसान ने किया होलिका दहन
- फोटो : अमर उजाला
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन को 124 दिन पूरे हो गए है। अपनी मांग को लेकर किसान दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। रविवार को होलिका दहन के मौके पर किसानों से तीनों कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर होली मनाई। इस मौके पर बॉर्डर पर भारी संख्या में किसान मौजूद रहे।
गाजीपुर बॉर्डर पर सुबह से ही किसान होलिका दहन की तैयारियों में लगे हुए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से किसानों का यहां पहुंचने का सिलसिला जारी था। बॉर्डर के प्रमुख चौराहे पर होली रखी गई थी। पूर्व निर्धारित समय के अनुसार भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शाम 7 बजे होलिका दहन किया। इस दौरान काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
बुलंदशहर के भटोना गांव के सदस्यों की टोली द्वारा पारम्परिक होली के गीत, ढ़ोल और नगाड़ों बजाए जा रहे थे, जिनपर किसान ठिरक रहे थे। होलिका दहन के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि देशभर में किसानों की पंचायत चल रही है, लेकिन सरकार किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है।
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कानूनों की प्रतियों को जलाकर सरकार को यह संदेश दिया गया है कि अन्नदाता इन कानूनों को नहीं मानते हैं। जबतक सरकार इन्हें वापस नहीं लेगी। वह दिल्ली की सीमाओं पर हटे रहेंगे।उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा। जिस प्रकार किसान यहां सर्दियों में डटे रहे थे। उसी प्रकार गर्मियों में भी रहेंगे।
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गाजीपुर बॉर्डर पर सुबह से ही किसान होलिका दहन की तैयारियों में लगे हुए थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों से किसानों का यहां पहुंचने का सिलसिला जारी था। बॉर्डर के प्रमुख चौराहे पर होली रखी गई थी। पूर्व निर्धारित समय के अनुसार भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शाम 7 बजे होलिका दहन किया। इस दौरान काफी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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बुलंदशहर के भटोना गांव के सदस्यों की टोली द्वारा पारम्परिक होली के गीत, ढ़ोल और नगाड़ों बजाए जा रहे थे, जिनपर किसान ठिरक रहे थे। होलिका दहन के बाद राकेश टिकैत ने कहा कि देशभर में किसानों की पंचायत चल रही है, लेकिन सरकार किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रही है।
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कानूनों की प्रतियों को जलाकर सरकार को यह संदेश दिया गया है कि अन्नदाता इन कानूनों को नहीं मानते हैं। जबतक सरकार इन्हें वापस नहीं लेगी। वह दिल्ली की सीमाओं पर हटे रहेंगे।उन्होंने कहा कि यह आंदोलन अभी लंबा चलेगा। जिस प्रकार किसान यहां सर्दियों में डटे रहे थे। उसी प्रकार गर्मियों में भी रहेंगे।
चेतावनी के बाद चालू हुई बिजली आपूर्ति
किसान नेता शमशेर राणा ने बताया कि गाजीपुर बॉर्डर पर गाजियाबाद प्रशासन ने सुबह बिजली काट दी थी। इससे काफी परेशानी हो रही थी। इसको देखते हुए चौधरी राकेश टिकैत ने सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर शाम 6 बजे तक बिजली आपूर्ति नहीं की गई तो किसान उत्तर प्रदेश के सभी टोल फ्री कराएंगे। चेतावनी देने के बाद प्रशासन की ओर से बिजली चालू की गई।
सिंघु बॉर्डर पर जलाई गई कृषि कानूनों की कॉपियां
पिछले 124 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों और एमएसपी पर कानून की मांग पर डटे किसानों का विरोध रविवार को भी जारी रहा। होली की पूर्वसंख्या पर सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारियों ने तीनों कृषि कानूनों की प्रति जलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया।
प्रदर्शन स्थल पर इसकी तैयारियां पूरी होने के बाद शाम के वक्त आंदोलनकारियों ने कृषि कानूनों की प्रतियों को होलिका के तौर जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत को जीवंत रूप में पेश किया। किसानों ने होलिका जलाने से विधिवत तरीके से पूजा अर्चना की।
कानूनों की कॉपियां को जलाकर किसानों ने तीनों कृषि कानूनों के निरस्त होने तक विरोध जारी रखने का दावा किया। किसान नेताओं ने एक बार फिर दोपराते हुए कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है, प्रदर्शन नहीं खत्म होगा।
सिंघु बॉर्डर पर जलाई गई कृषि कानूनों की कॉपियां
पिछले 124 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों और एमएसपी पर कानून की मांग पर डटे किसानों का विरोध रविवार को भी जारी रहा। होली की पूर्वसंख्या पर सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारियों ने तीनों कृषि कानूनों की प्रति जलाकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया।
प्रदर्शन स्थल पर इसकी तैयारियां पूरी होने के बाद शाम के वक्त आंदोलनकारियों ने कृषि कानूनों की प्रतियों को होलिका के तौर जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत को जीवंत रूप में पेश किया। किसानों ने होलिका जलाने से विधिवत तरीके से पूजा अर्चना की।
कानूनों की कॉपियां को जलाकर किसानों ने तीनों कृषि कानूनों के निरस्त होने तक विरोध जारी रखने का दावा किया। किसान नेताओं ने एक बार फिर दोपराते हुए कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है, प्रदर्शन नहीं खत्म होगा।