{"_id":"6104461a8ebc3e557478263f","slug":"high-court-set-aside-order-of-12-lack-fine-for-running-illegal-parking-ashram-news-noi596663229","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध पार्किंग चलाने पर 12 लाख रुपये जुर्माना संबंधी फैसला रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध पार्किंग चलाने पर 12 लाख रुपये जुर्माना संबंधी फैसला रद्द
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने अवैध पार्किंग और सार्वजनिक भूमि में व्यवसायिक गतिविधि चलाने वाले व्यक्ति पर लगाए गए 12 लाख रुपये जुर्माना मामले में राहत प्रदान कर दी। अदालत ने कहा कि स्थानीय निकाय यानि पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) उन तथ्यों को न्यायोचित नहीं ठहरा सका है जिसके आधार पर याची का वाहन जब्त किया गया था, ऐसे में वह जुर्माना नहीं मांग सकता। निगम ने दावा किया कि याची से नियमों के उल्लंघन के मामले में 11,99,830 रुपये वसूली की जानी चाहिए।
इस मामले में पीड़ित व्यक्ति राहुल कुमार ने इस वर्ष फरवरी में ईडीएमसी द्वारा गीता कॉलोनी में श्मशान घाट के सामने सार्वजनिक भूमि में की जा रही अवैध पार्किंग और व्यवसायिक गतिविधि के संबंध में विभिन्न एजेंसियों से शिकायत मिलने के बाद अपने जब्त वाहन को छोड़ने व जुर्माना रद्द करने की मांग की थी।
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने 26 जुलाई को दिए अपने फैसले में ईडीएमसी को याची का वाहन छोड़ने का निर्देश देते हुए कहा याचिकाकर्ता के वाहन को जब्त करने में एमसीडी का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में वह वाहन के हटाने, भंडारण शुल्क की दिशा में किसी भी राशि की मांग नहीं कर सकता। उन्होंने निगम की याचिकाकर्ता के वाहन को जब्त करने और लगभग 12 लाख रुपये की मांग उचित नहीं है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा एमसीडी ने याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया। जिसमें उसे सार्वजनिक भूमि से अपना वाहन हटाने या उक्त स्थान पर अपना वाहन पार्क न करने का निर्देश दिया गया हो। याची को सार्वजनिक भूमि पर अपने वाहन की पार्किंग के परिणामों की जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा एमसीडी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि याची सार्वजनिक भूमि पर क्या व्यवसायिक गतिविधियां कर रहा था।
विज्ञापन
इस मामले में पीड़ित व्यक्ति राहुल कुमार ने इस वर्ष फरवरी में ईडीएमसी द्वारा गीता कॉलोनी में श्मशान घाट के सामने सार्वजनिक भूमि में की जा रही अवैध पार्किंग और व्यवसायिक गतिविधि के संबंध में विभिन्न एजेंसियों से शिकायत मिलने के बाद अपने जब्त वाहन को छोड़ने व जुर्माना रद्द करने की मांग की थी।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने 26 जुलाई को दिए अपने फैसले में ईडीएमसी को याची का वाहन छोड़ने का निर्देश देते हुए कहा याचिकाकर्ता के वाहन को जब्त करने में एमसीडी का कोई औचित्य नहीं है। ऐसे में वह वाहन के हटाने, भंडारण शुल्क की दिशा में किसी भी राशि की मांग नहीं कर सकता। उन्होंने निगम की याचिकाकर्ता के वाहन को जब्त करने और लगभग 12 लाख रुपये की मांग उचित नहीं है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा एमसीडी ने याचिकाकर्ता को कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया। जिसमें उसे सार्वजनिक भूमि से अपना वाहन हटाने या उक्त स्थान पर अपना वाहन पार्क न करने का निर्देश दिया गया हो। याची को सार्वजनिक भूमि पर अपने वाहन की पार्किंग के परिणामों की जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा एमसीडी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि याची सार्वजनिक भूमि पर क्या व्यवसायिक गतिविधियां कर रहा था।