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जेल में कैदी की पिटाई मामले में जेल प्रशासन रिपोर्ट तलब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने जेल महानिदेशक को पिछले साल कैदियों की पिटाई के आरोपी तिहाड़ जेल के अधिकारियों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। एक कैदी ने तिहाड़ के अंदर अधिकारियों पर मारपीट और प्रताड़ित करने का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की थी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने जेल प्रशासन के रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगने पर नाराजगी जताई। खंडपीठ ने कहा कि जांच किस स्तर पर है आपको बताना ही पड़ेगा। आप समय की मांग नहीं कर सकते। आपको हमें बताना होगा कि क्या चल रहा है।
जेल महानिरीक्षक संदीप गोयल ने 15 मार्च को कोर्ट से 28 अक्तूबर 2020 को तिहाड़ जेल में हुई घटना के संबंध में की गई कार्रवाई के संबंध में शपथपत्र दायर करने के लिए समय मांगा था। पीठ ने कहा जांच कब से चल रही है आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं।
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अदालत ने 8 मार्च को वीडियो फुटेज देखने के बाद घटना पर हैरानी जताई थी और डीजी जेल को सुनवाई में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। याची कैदी समीर ने कोर्ट के समक्ष आरोप लगाया था कि जून में जेल अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की। उसने दूसरी जेल में स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। याचिका दायर होने के बाद उसे दूसरी जेल भेज दिया गया था।
अवकाशकालीन पीठ ने 25 जून को मामले को गंभीर से लेते हुए जेल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि जेल में कैदी उनकी हिरासत में माने जाते हैं और जेल अधिकारी प्रतिनिधि। यदि जेल में उनसे मारपीट होती है तो ऐसा लगता है हम उन्हें पिटवा रहे हैं।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की खंडपीठ ने जेल प्रशासन के रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगने पर नाराजगी जताई। खंडपीठ ने कहा कि जांच किस स्तर पर है आपको बताना ही पड़ेगा। आप समय की मांग नहीं कर सकते। आपको हमें बताना होगा कि क्या चल रहा है।
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जेल महानिरीक्षक संदीप गोयल ने 15 मार्च को कोर्ट से 28 अक्तूबर 2020 को तिहाड़ जेल में हुई घटना के संबंध में की गई कार्रवाई के संबंध में शपथपत्र दायर करने के लिए समय मांगा था। पीठ ने कहा जांच कब से चल रही है आप किस बात का इंतजार कर रहे हैं।
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अदालत ने 8 मार्च को वीडियो फुटेज देखने के बाद घटना पर हैरानी जताई थी और डीजी जेल को सुनवाई में मौजूद रहने का निर्देश दिया था। याची कैदी समीर ने कोर्ट के समक्ष आरोप लगाया था कि जून में जेल अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की। उसने दूसरी जेल में स्थानांतरित करने का आग्रह किया था। याचिका दायर होने के बाद उसे दूसरी जेल भेज दिया गया था।
अवकाशकालीन पीठ ने 25 जून को मामले को गंभीर से लेते हुए जेल प्रशासन को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा था कि जेल में कैदी उनकी हिरासत में माने जाते हैं और जेल अधिकारी प्रतिनिधि। यदि जेल में उनसे मारपीट होती है तो ऐसा लगता है हम उन्हें पिटवा रहे हैं।