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दिल्ली: हाईकोर्ट का आईएमए चीफ को राहत देने से इनकार, संगठन के मंच का प्रयोग धार्मिक प्रचार के लिए नहीं करने का दिया था निर्देश

Tue, 15 Jun 2021 12:09 AM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Tue, 15 Jun 2021 12:09 AM IST
सार

न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि कोर्ट कोई एकतरफा आदेश नहीं देगी, क्योंकि शिकायतकर्ता की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है। उसकी शिकायत पर निचली अदालत ने चार जून का आदेश जारी किया था।

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High Court refuses to give relief to IMA Chief directed not to use the organization platform for religious propaganda
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें आईएमए चीफ जेए जयालाल को संगठन के मंच का प्रयोग धार्मिक प्रचार के लिए नहीं करने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने जयालाल को सावधान करते हुए कहा था कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से सतही टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। इस आदेश को चुनौती दी गई है।

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न्यायमूर्ति आशा मेनन ने कहा कि कोर्ट कोई एकतरफा आदेश नहीं देगी, क्योंकि शिकायतकर्ता की ओर से कोई पेश नहीं हुआ है। उसकी शिकायत पर निचली अदालत ने चार जून का आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने आईएमए चीफ की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सुनवाई 16 जून तय की है। उन्होंने कहा कोई भी आदेश जारी करने से पहले निचली अदालत की पड़ताल जरूरी है।
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निचली अदालत ने उस शिकायत पर आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि जयालाल ने कोरोना मरीजों के इलाज के आयुर्वेद के मुकाबले एलोपैथी को उत्तम साबित करने की आड़ में ईसाई धर्म को बढ़ावा देने के लिए हिंदू धर्म के खिलाफ मानहानिकारक अभियान शुरू किया है।
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शिकायतकर्ता रोहित झा ने आरोप लगाया था कि जयालाल अपने पद का दुरुपयोग कर हिंदुओं को ईसाई बनने के लिए देश के लोगों को गुमराह कर रहे हैं। निचली अदालत ने जयालाल के ऐसी किसी गतिविधि में शामिल न होने के आश्वासन पर कहा था कि इस संबंध में कोई स्थायी आदेश जारी करने की जरूरत नहीं है। अदालत ने ये माना था कि ये शिकायत एलोपैथी और आयुर्वेद को लेकर जुबानी विवाद का नतीजा है।

निचली अदालत के आदेश को जयालाल की ओर से चुनौती देते हुए अधिवक्ता तन्मय मेहता ने कहा कि उनके मुवक्किल की ओर से ऐसा कोई आश्वासन निचली अदालत को नहीं दिया गया था, क्योंकि उन्होंने ऐसा कोई गलत कृत्य किया ही नहीं था। आईएएम में साढ़े तीन डॉक्टर सदस्य हैं और ये आदेश उनके मुवक्किल की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचा रहा है।


याची के वकील ने ये भी कहा कि जयालाल और योग गुरु रामदेव के बीच टीवी पर कोई डिबेट नहीं हुआ था और वे किसी धर्म का प्रचार नहीं कर रहे थे। इसके अलावा ये शिकायत पूरी तरह फर्जी खबर पर आधारित थी। अगर कोई शख्स एलोपैथी को बढ़ावा देता है तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रहा है। जयालाल आयुर्वेद नहीं बल्कि मिक्सोपैथी के खिलाफ हैं। उन्होंने हिंदू धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और न किसी भारतीय पर ईसाई बनने के लिए दबाव डाला है। 

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