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आरोग्य सेतु एप की जानकारी मांगने संबंधी याचिका पर जवाब तलब
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नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने आरोग्य सेतु मोबाइल एप्लीकेशन का ब्योरा मांगने वाली याचिका पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और उसके विभिन्न विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मंत्रालय के इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईटी) और मंत्रालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (सीपीआईओ), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी), इलेक्ट्रानिक्स और ईओवीओ विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से भी जवाब मांगा है। अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि आरोग्य सेतु आवेदन का मुद्दा ‘सार्वजनिक’ महत्व का है।
याची ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को भी चुनौती दी है जिसमें आरोप लगाया कि बिना उनका उचित पक्ष सुने याचिका का निपटारा कर दिया था। याची का तर्क था कि सरकार द्वारा 2 अप्रैल, 2020 को शुरू किए गए आरोग्य सेतु का विवरण उसने आरटीआई के जरिये विभिन्न एजेंसियों से जवाब मांगा लेकिन उसे जानकारी नहीं दी गई।
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अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि सीआईसी ने 24 नवंबर 2020 को आरटीआई कार्यकर्ता को सुने बिना आदेश पारित कर दिया। अदालत ने सुनवाई 24 फरवरी तय करते हुए याचिकाकर्ता सौरव दास के अधिवक्ता एवं सरकार के विभागों को निर्देश दिया कि वह सूची बनाकर बताएं कि याचिकाकर्ता ने क्या-क्या जानकारी मांगी थी और उसे कौन सी जानकारी दी गई और कौन सी नहीं।
वहीं मंत्रालय के अधिवक्ता ने कहा कि आरोग्य सेतु से संबंधित सारी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। वहां से याचिकाकर्ता जानकारी ले सकता है। कोर्ट ने इसके बाद कहा कि आरोग्य सेतु जनहित से जुड़ा है और उसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। उसने सीआईसी के द्वारा याचिकाकर्ता के आवेदन को भी निपटाए जाने पर भी आपत्ति की और कहा कि इस तरह से शिकायत नहीं निपटायी जानी चाहिए।
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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने मंत्रालय के इलेक्ट्रानिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईटी) और मंत्रालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारियों (सीपीआईओ), राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस डिवीजन (एनईजीडी), इलेक्ट्रानिक्स और ईओवीओ विभाग और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र से भी जवाब मांगा है। अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा कि आरोग्य सेतु आवेदन का मुद्दा ‘सार्वजनिक’ महत्व का है।
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याची ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को भी चुनौती दी है जिसमें आरोप लगाया कि बिना उनका उचित पक्ष सुने याचिका का निपटारा कर दिया था। याची का तर्क था कि सरकार द्वारा 2 अप्रैल, 2020 को शुरू किए गए आरोग्य सेतु का विवरण उसने आरटीआई के जरिये विभिन्न एजेंसियों से जवाब मांगा लेकिन उसे जानकारी नहीं दी गई।
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अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि सीआईसी ने 24 नवंबर 2020 को आरटीआई कार्यकर्ता को सुने बिना आदेश पारित कर दिया। अदालत ने सुनवाई 24 फरवरी तय करते हुए याचिकाकर्ता सौरव दास के अधिवक्ता एवं सरकार के विभागों को निर्देश दिया कि वह सूची बनाकर बताएं कि याचिकाकर्ता ने क्या-क्या जानकारी मांगी थी और उसे कौन सी जानकारी दी गई और कौन सी नहीं।
वहीं मंत्रालय के अधिवक्ता ने कहा कि आरोग्य सेतु से संबंधित सारी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है। वहां से याचिकाकर्ता जानकारी ले सकता है। कोर्ट ने इसके बाद कहा कि आरोग्य सेतु जनहित से जुड़ा है और उसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। उसने सीआईसी के द्वारा याचिकाकर्ता के आवेदन को भी निपटाए जाने पर भी आपत्ति की और कहा कि इस तरह से शिकायत नहीं निपटायी जानी चाहिए।