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Delhi News: जामा मस्जिद को 'संरक्षित' घोषित न करने संबंधी फाइल पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

Fri, 27 Sep 2024 11:02 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 27 Sep 2024 11:02 PM IST
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High Court expressed displeasure over not presenting the file regarding not declaring Jama Masjid as 'protected'
एएसआई को मूल फाइल पेश करने के लिए अंतिम अवसर दिया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अधिकारियों द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस फैसले वाली फाइल पेश न किए जाने पर नाराजगी जताई, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में ऐतिहासिक मुगलकालीन जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित न किए जाने का निर्णय था।न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह व न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि पहले के आदेश के बावजूद, मस्जिद के स्मारक के रूप में दर्जे, इसके वर्तमान निवासियों आदि से संबंधित रिकॉर्ड के बजाय ढीले पन्ने और अन्य दस्तावेज पेश किए गए।
अदालत ने मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को अंतिम अवसर प्रदान करते हुए हलफनामा मांगा है और साथ ही अक्टूबर में अगली सुनवाई की तारीख पर मूल फाइल भी मांगी। अदालत ने एएसआई महानिदेशक से मामले की सीधे निगरानी करने और केंद्र सरकार के वकील अनिल सोनी और मनीष मोहन के साथ बैठक करने को कहा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एक व्यापक हलफनामा दायर किया जाए। उच्च न्यायालय जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें अधिकारियों को जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित करने तथा इसके आसपास से अतिक्रमण हटाने के निर्देश देने की मांग की गई थी। 28 अगस्त को न्यायालय ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय तथा एएसआई को निर्देश दिया था कि वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के उस निर्णय वाली फाइल को उसके समक्ष प्रस्तुत करें, जिसमें कहा गया था कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
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शुक्रवार की सुनवाई के दौरान पीठ ने न्यायालय में उपस्थित एएसआई अधिकारी से आदेश का पालन न करने के बारे में पूछा तथा कहा फाइल कौन नहीं दे रहा है ? हम सचिव को बुलाएंगे।
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अगस्त 2015 में एएसआई ने अदालत को बताया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शाही इमाम को आश्वासन दिया था कि जामा मस्जिद को संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा। अदालत को यह भी बताया गया कि चूंकि जामा मस्जिद केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक नहीं है, इसलिए यह एएसआई के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

मनमोहन सिंह ने 20 अक्टूबर, 2004 को लिखे अपने पत्र में शाही इमाम को आश्वासन दिया था कि जामा मस्जिद को केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित नहीं किया जाएगा।
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