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दिल्ली: हाईकोर्ट ने फ्यूचर ग्रुप की अमेजन विवाद को लेकर दायर याचिका खारिज की, मामले को समाप्त करने की थी मांग 

Tue, 04 Jan 2022 06:35 PM IST
सुशील कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Tue, 04 Jan 2022 06:35 PM IST
सार

सीसीआई ने सौदे के लिए मंजूरी को निलंबित कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि अमेजन भविष्य में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के कुछ महत्वपूर्ण विवरणों के बारे में सूचित करने में विफल रहा है।

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High Court dismisses Future Group petition regarding Amazon dispute seeking termination of the case
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

उच्च न्यायालय ने मंगलवार को फ्यूचर ग्रुप की कंपनियों द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अमेजन के साथ 2019 के सौदे के संबंध में अपने मामले को समाप्त करने के लिए आवेदनों से निपटने के लिए सिंगापुर ट्रिब्यूनल को निर्देश देने की मांग की गई थी।

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न्यायमूर्ति अमित बंसल ने अपने फैसले में कहा कि फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) और फ्यूचर कूपन लिमिटेड (एफसीआरएल) द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को ही आदेश सुरक्षित रख लिया था। सिंगापुर में एक मध्यस्थता न्यायाधिकरण दोनों कंपनियों के बीच 2019 के सौदे से संबंधित फ्यूचर ग्रुप के खिलाफ अमेजन के मामले की सुनवाई कर रहा है। इस मामले की सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने एक अंतरिम आदेश पारित कर फ्यूचर रिटेल की संपत्तियों को रिलायंस इंडस्ट्रीज को बेचने पर रोक लगा दी थी।
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फ्यूचर रिटेल ने ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर तर्क दिया था कि अमेजन के खिलाफ भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के फैसले के मद्देनजर कार्यवाही जारी रखना अवैध होगा। सीसीआई ने सौदे के लिए मंजूरी को निलंबित कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि अमेजन भविष्य में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी के अधिग्रहण के कुछ महत्वपूर्ण विवरणों के बारे में सूचित करने में विफल रहा है। इसके अलावा उन्होंने अमेजन पर 202 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था।
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हालांकि, ट्रिब्यूनल ने अंतिम सुनवाई शुरू करने से पहले अनुरोध पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद फ्यूचर ग्रुप ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय के समक्ष फ्यूचर ग्रुप की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे ने तर्क दिया कि वे मध्यस्थता की कार्यवाही को समाप्त करने के लिए नहीं कह रहे, बल्कि ट्रिब्यूनल को हर्जाना संबंधी निर्णय लेने से पहले उनके आवेदन पर सुनवाई करने का निर्देश देने का आग्रह है।

उन्होंने अदालत को बताया कि ट्रिब्यूनल ने हर्जाने के निर्धारण के लिए 6 और 7 जनवरी की तारीख तय की हैं और इसलिए टर्मिनेशन अर्जी पर 5 जनवरी को सुनवाई होनी चाहिए। रोहतगी ने तर्क दिया था कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) द्वारा हाल ही में अमेजन और फयूचर के 2019 सौदे को दी गई अपनी मंजूरी को निलंबित करने के बाद मध्यस्थता की कार्यवाही एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गई है।

उन्होंने कहा सीसीआई का आदेश दोनों कंपनियों के बीच समझौते को नष्ट कर देता है और इसलिए उस समझौते के तहत मध्यस्थता की कार्यवाही सहित कुछ भी नहीं चल सकता है। अगर सीसीआई की मंजूरी मिल जाती है तो समझौता हो जाता है और इसलिए समझौते के तहत कुछ भी जारी नहीं रह सकता। सुनवाई के दौरान साल्वे ने इस मामले में ट्रिब्यूनल के आगे बढ़ने के तरीके पर सवाल उठाया, जिसमें कहा गया कि उनके मुवक्किलों ने जो कुछ भी मांगा है, वह सब खारिज कर दिया गया है। मेरा मुवक्किल दिवालिया होने के कगार पर है। कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए अमेजन के पास 8,500 करोड़ का बजट है। हमारे पास उस तरह का बजट नहीं है।


उन्होंने कहा इस मामले में अमेजन की दिलचस्पी का एकमात्र कारण फ्यूचर रिटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बीच सौदे को रोकना था। वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम और अमित सिब्बल ने तर्क दिया कि अमेजन द्वारा सीसीआई के आदेश को चुनौती देने के लिए एक अपील दायर की जाएगी और मध्यस्थता खंड समझौते के साथ समाप्त नहीं होता है, क्योंकि समझौते की तारीख पर सौदे के लिए अनुमति मौजूद थी।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल 8 जनवरी को फ्यूचर ग्रुप की समाप्ति के आवेदन पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया था।

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