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कोविड़ संक्रमण: भ्रष्टाचार के आरोपी विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत क्यों नहीं

Thu, 20 May 2021 12:22 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 20 May 2021 12:22 AM IST
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high court directs center to file response on plea seeking inclusion of corruption accused in bail list
नई दिल्ली। महामारी में विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत प्रदान करने के निर्णय में भ्रष्टाचार के आरोपियों को पात्र लोगों की श्रेणी से अलग रखने के मुद्दे पर याचिका दायर की गई है। याचिका में उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) द्वारा तय मानदंडों पर सवाल उठाया गया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा है। हालांकि यह मुद्दा संबंधित अन्य अदालत के समक्ष भी उठा लेकिन उक्त अदालत ने याची को सर्वोच्च न्यायालय जाने का सुझाव दिया है।
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मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने दिल्ली सरकार और एचपीसी को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अन्नाद्रमुक नेता टीटीवी दिनाकरन और अन्य से जुड़े कथित चुनाव आयोग रिश्वतखोरी मामले में 2017 में गिरफ्तार सुकेश चंद्रशेखर ने यह याचिका दाखिल की है।
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चंद्रशेखर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत मुकदमे का सामना कर रहे विचाराधीन कैदियों को अंतरिम जमानत के पात्र लोगों की श्रेणियों से अलग करना एकपक्षीय और अतर्कसंगत है। इन अन्य श्रेणियों में मादक पदार्थों के मामले, दुष्कर्म व पॉक्सो कानून के तहत बंद विचाराधीन कैदी, तेजाब हमलों और धन शोधन के मामलों के आरोपी शामिल हैं।
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न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन उच्चतम न्यायालय ने जेलों में कोविड-19 फैलने से रोकने के लिए कैदियों की संख्या कम करने के लिहाज से किया था।

अधिवक्ता मयंक त्रिपाठी के माध्यम से दाखिल याचिका में कहा गया है कि समिति के मानदंडों के अनुसार हत्या और हत्या के प्रयास के मामलों में बंद विचाराधीन कैदी अंतरिम जमानत के लिए पात्र हैं, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपी कैदी इसके पात्र नहीं हैं। अत: समिति का फैसला कोई समानता या तर्कसंगत वर्गीकरण नहीं दर्शाता। पुलिस ने 2017 में चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया था।
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