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लुटियंस की बाउंड्री और डेवलपमेंट दिशानिर्देशों की सिफारिशों पर विचार का निर्देश
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को लुटियंस बंगला जोन (एलबीजेड) की बाउंड्री और डेवलपमेंट दिशानिर्देशों के बारे में दिल्ली शहरी कला आयोग (डीयूएसी) की सिफारिशों पर विचार करने को कहा है। यह सिफारिशें 2019 में की गई थीं। इनमें कुछ इलाकों को एलजेडबी से बाहर करने को कहा गया था।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह एलबीजेड से कुछ क्षेत्रों जैसे जोर बाग, गोल्फ लिंक, सुंदर नगर, बंगाली मार्केट, अशोक रोड, मंदिर मार्ग, पंचशील मार्ग, सरदार पटेल मार्ग और चाणक्यपुरी को बाहर करने के लिए आयोग की सिफारिश पर विशेष रूप से निर्णय ले। अदालत ने मामले की सुनवाई एक सितंबर तय करते हुए केंद्रीय मंत्रालय से अपने फैसले की जानकारी शपथपत्र सहित देने को कहा है।
अदालत ने यह निर्देश भूखंड मालिकों और उन क्षेत्रों के निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे मौजूदा इमारतों का पुनर्निर्माण या उनमें परिवर्तन करना चाहते हैं।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आयोग ने 2016 में सिफारिशें की थीं लेकिन मंत्रालय ने कुछ सुधार करने के निर्देश के साथ इसे वापस कर दिया। आयोग ने अगस्त 2019 में अपनी नई सिफारिशें तैयार कीं लेकिन कभी मंत्रालय को नहीं भेजी गईं।
अदालत के समक्ष आयोग ने दलील दी कि नई सिफारिशें मंत्रालय को नहीं भेजी गईं क्योंकि मंत्रालय ने अदालत के समक्ष अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह एलबीजेड के दिशा-निर्देशों में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं।
अदालत ने आयोग के तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि एक वैधानिक निकाय द्वारा तैयार की गई इन सिफारिशों को आखिर मंत्रालय के समक्ष क्यों नहीं रखा गया? अदालत ने आयोग को तैयार की गई सिफारिशों को तत्काल मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह एलबीजेड से कुछ क्षेत्रों जैसे जोर बाग, गोल्फ लिंक, सुंदर नगर, बंगाली मार्केट, अशोक रोड, मंदिर मार्ग, पंचशील मार्ग, सरदार पटेल मार्ग और चाणक्यपुरी को बाहर करने के लिए आयोग की सिफारिश पर विशेष रूप से निर्णय ले। अदालत ने मामले की सुनवाई एक सितंबर तय करते हुए केंद्रीय मंत्रालय से अपने फैसले की जानकारी शपथपत्र सहित देने को कहा है।
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अदालत ने यह निर्देश भूखंड मालिकों और उन क्षेत्रों के निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे मौजूदा इमारतों का पुनर्निर्माण या उनमें परिवर्तन करना चाहते हैं।
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याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि आयोग ने 2016 में सिफारिशें की थीं लेकिन मंत्रालय ने कुछ सुधार करने के निर्देश के साथ इसे वापस कर दिया। आयोग ने अगस्त 2019 में अपनी नई सिफारिशें तैयार कीं लेकिन कभी मंत्रालय को नहीं भेजी गईं।
अदालत के समक्ष आयोग ने दलील दी कि नई सिफारिशें मंत्रालय को नहीं भेजी गईं क्योंकि मंत्रालय ने अदालत के समक्ष अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह एलबीजेड के दिशा-निर्देशों में कोई बदलाव करने के इच्छुक नहीं हैं।
अदालत ने आयोग के तर्क पर असहमति जताते हुए कहा कि एक वैधानिक निकाय द्वारा तैयार की गई इन सिफारिशों को आखिर मंत्रालय के समक्ष क्यों नहीं रखा गया? अदालत ने आयोग को तैयार की गई सिफारिशों को तत्काल मंत्रालय को भेजने का निर्देश दिया है।