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दुष्कर्म का मामला : प्राथमिकी दर्ज न करके समझौता करने की अनुमति देने पर हाईकोर्ट नाराज

Thu, 03 Feb 2022 06:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 03 Feb 2022 06:19 AM IST
सार

अदालत ने सतर्कता विभाग, पुलिस उपायुक्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। 

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High court angry over allowing compromise between both the parties in a misconduct case 
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : amar ujala

विस्तार

हाईकोर्ट ने दुष्कर्म एवं यौन शोषण के एक मामले में शिकायत के बावजूद तुरंत प्राथमिकी दर्ज न करने के बजाय दोनों पक्षों में समझोता करने की अनुमति देने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने सतर्कता विभाग, पुलिस उपायुक्त को मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। 

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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि एक संज्ञेय अपराध का खुलासा होने की स्थिति में एफआईआर दर्ज न करना सुप्रीम कोर्ट द्वारा ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य में निर्धारित कानून के खिलाफ है। अदालत ने यह निर्देश दुष्कर्म के एक अन्य मामले में इस तथ्य का खुलासा होने पर दिया है। इतना ही नहीं अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी की गिरफतारी पर रोक लगा दी है। अदालत ने कहा सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार कहा कि दुष्कर्म के अपराध से जुड़े मामलों को समझौते के आधार पर नहीं सुलझाया जा सकता।  
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दरअसल याची ने अदालत को बताया कि जिस महिला ने उस पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है उसी ने एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी इसी तरह का आरोप लगाया है और यह एक हनी ट्रैप का मामला है। इस मामले में महिला ने आरोप लगाया कि आरोपी से उसकी सोशल मीडिया के माध्यम से दोस्ती हुई थी। वह उसके घर शराब लेकर आया और उसे शराब पीने के लिए मजबूर किया गया। इसके चलते उसे चक्कर आने लगा। कहा गया कि याचिकाकर्ता ने हालात का फायदा उठाते हुए जबरन यौन संबंध बनाए। पुलिस ने बिना गिरफ्तारी के आरोपपत्र दायर कर दिया। आरोपी के पेश न होन पर अदालत ने उसके खिलाफ गिरफतारी वारंट जारी कर दिए।
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याची ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया। याची के वकील ने तर्क दिया कि तात्कालिक मामला हनीट्रैप का एक उत्कृष्ट मामला है और यह कि महिला और उसका पति पहले भी इसी तरह के मामले में शामिल रहे हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि महिला व उसके पति ने मनीष तंवर नाम के एक व्यक्ति को भी इसी तरह फंसाया था। उस मामले में उन्होंने केवल यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत दर्ज करके पीड़ितों से पैसे वसूलने की मांग की थी।

उन्होंने तर्क दिया कि उस मामले में 10 जुलाई 20 को कापसहेड़ा थाने में मनीष तंवर के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत की गई थी, लेकिन कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके अलावा, उन्होंने तर्क दिया कि समझौता होने पर अभियोक्ता ने मेडिकल टेस्ट नहीं करवाया और यहां तक कि एसएचओ कापसहेड़ा ने कहा कि वह दुष्कर्म के आरोपों के संबंध में अपनी शिकायत इस आधार पर वापस ले रही है कि उसने गुस्से में आकर इसे दायर किया था।


अदालत ने मामले को संदिग्ध बताते हुए जिस समय कथित रूप से दर्ज किया गया था उस समय वर्मतान एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी। इससे याचिकाकर्ता के वकील के इस तर्क को बल मिलता है कि वर्तमान में संभावित हेराफेरी की गई और पुलिस मामले को सुलझाने का प्रयास कर रही है। अदालत ने संबंधित डीसीपी को मामले की जांच कर स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि थाने में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई। समझौते के आधार पर मामले को खत्म करने की अनुमति क्यों दी गई?

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