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हिंसा वाली जगहों से लगातार हो रही थी गाजीपुर बात
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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा की जांच कर रही क्राइम ब्रांच की टीम ने ऐसे एक दर्जन से अधिक मोबाइल नंबर चिह्नित किए हैं, जो गाजीपुर से लेकर लाल किले तक सक्रिय थे। हिंसा वाले स्थानों से इन फोन नंबरों से गाजीपुर में लगातार बात हो रही थी। पुलिस को आशंका है कि इन फोन को चलाने वाले गाजीपुर से दिशा-निर्देश ले रहे थे।
पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन नंबरों की जांच की जा रही है। मोबाइल नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से इन फोन नंबर की सीडीआर के साथ इनके मालिक ग्राहकों के फोटो और पहचान पत्र की सूचना मुहैया कराने को कहा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन नंबरों को चलाने वालों के फोटो और पहचान पत्र का लाल किले और हिंसा वाली अन्य जगहों से मिले वीडियो फुटेज से मिलान किया जाएगा।
26 जनवरी को हिंसा वाले स्थलों से मोबाइल टावरों का डंप डाटा उठाया गया था। जांच में पता चला है कि ऐसे कई नंबर हैं, जो हिंसा से पहले गाजीपुर बॉर्डर पर सक्रिय थे। बाद में इनकी लोकेशन हिंसा वाली जगहों अक्षरधाम, आईटीओ और फिर लाल किले पर मिली। कुछ ऐसे भी फोन नंबर मिले हैं, जिन्हें बीच-बीच में बंद किया और फिर वे हिंसा वाली जगह पर सक्रिय हो गए।
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आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कई किसान नेता पुलिस के रडार पर हैं, लेकिन उसे साफ निर्देश हैं कि किसान आंदोलन से शांतिपूर्ण तरीके से निपटे। पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है। यही वजह है कि फिलहाल पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है।
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पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन नंबरों की जांच की जा रही है। मोबाइल नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों से इन फोन नंबर की सीडीआर के साथ इनके मालिक ग्राहकों के फोटो और पहचान पत्र की सूचना मुहैया कराने को कहा गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन नंबरों को चलाने वालों के फोटो और पहचान पत्र का लाल किले और हिंसा वाली अन्य जगहों से मिले वीडियो फुटेज से मिलान किया जाएगा।
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26 जनवरी को हिंसा वाले स्थलों से मोबाइल टावरों का डंप डाटा उठाया गया था। जांच में पता चला है कि ऐसे कई नंबर हैं, जो हिंसा से पहले गाजीपुर बॉर्डर पर सक्रिय थे। बाद में इनकी लोकेशन हिंसा वाली जगहों अक्षरधाम, आईटीओ और फिर लाल किले पर मिली। कुछ ऐसे भी फोन नंबर मिले हैं, जिन्हें बीच-बीच में बंद किया और फिर वे हिंसा वाली जगह पर सक्रिय हो गए।
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आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि कई किसान नेता पुलिस के रडार पर हैं, लेकिन उसे साफ निर्देश हैं कि किसान आंदोलन से शांतिपूर्ण तरीके से निपटे। पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखने की है। यही वजह है कि फिलहाल पुलिस साक्ष्य जुटाने में लगी है।