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गणेश उत्सव : आस्था के साथ राष्ट्रीय एकता का बना प्रतीक
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-सार्वजनिक आयोजनों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और डिजिटल सहभागिता तक पहुंचा उत्सव
संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली।
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना का पर्व गणेश उत्सव समय के साथ केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले इस दस दिवसीय उत्सव का स्वरूप सालों में काफी बदल गया है। जहां पहले यह मुख्य रूप से घरों और मंदिरों तक सीमित था, वहीं अब यह सार्वजनिक भागीदारी, सामाजिक संदेशों और सांस्कृतिक आयोजनों का बड़ा मंच बन चुका है।
अब पंडालों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भजन संध्या, सामाजिक जागरूकता अभियान, पर्यावरण संरक्षण के संदेश और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी जाती है। कई स्थानों पर विकसित भारत, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, जल संरक्षण और शिक्षा जैसे विषयों पर आधारित आकर्षक झांकियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। तकनीक ने भी गणेश उत्सव के स्वरूप को बदल दिया है। डिजिटल निमंत्रण, ऑनलाइन दर्शन, सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं और लाइव प्रसारण अब उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं। युवा वर्ग की भागीदारी बढ़ने से आयोजन अधिक आधुनिक और व्यापक हुए हैं, जबकि पारंपरिक धार्मिक आस्था भी पहले की तरह कायम है। दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व में समाज का लगभग हर वर्ग किसी न किसी रूप में जुड़ता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्वी दिल्ली।
विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना का पर्व गणेश उत्सव समय के साथ केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा। यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाले इस दस दिवसीय उत्सव का स्वरूप सालों में काफी बदल गया है। जहां पहले यह मुख्य रूप से घरों और मंदिरों तक सीमित था, वहीं अब यह सार्वजनिक भागीदारी, सामाजिक संदेशों और सांस्कृतिक आयोजनों का बड़ा मंच बन चुका है।
अब पंडालों में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भजन संध्या, सामाजिक जागरूकता अभियान, पर्यावरण संरक्षण के संदेश और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों को भी प्रमुखता दी जाती है। कई स्थानों पर विकसित भारत, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, जल संरक्षण और शिक्षा जैसे विषयों पर आधारित आकर्षक झांकियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। तकनीक ने भी गणेश उत्सव के स्वरूप को बदल दिया है। डिजिटल निमंत्रण, ऑनलाइन दर्शन, सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं और लाइव प्रसारण अब उत्सव का हिस्सा बन चुके हैं। युवा वर्ग की भागीदारी बढ़ने से आयोजन अधिक आधुनिक और व्यापक हुए हैं, जबकि पारंपरिक धार्मिक आस्था भी पहले की तरह कायम है। दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व में समाज का लगभग हर वर्ग किसी न किसी रूप में जुड़ता है।
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