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दिल्ली: रिटायर संयुक्त निदेशक से 1.40 करोड़ की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार जालसाजों को किया गिरफ्तार
Mon, 18 Jan 2021 09:25 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Mon, 18 Jan 2021 09:25 PM IST
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- फोटो : सोशल मीडिया
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दक्षिण-पश्चिमी जिले की साइबर सेल ने शिक्षा विभाग से रिटायर संयुक्त निदेशक मातादीन गोरा से 1.40 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश कर चार जालसाजों को गिरफ्तार किया है। जालसाजों के तीन अलग-अलग ग्रुप ने रिटायर निदेशक से ठगी की है। गिरफ्तार चारों आरोपी आखिरी ग्रुप के सदस्य हैं। ये डिफाल्ट हो चुकी पॉलिसी की रकम दिलाने के नाम पर ठगी करते थे। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 1.44 लाख रुपये, 73 क्रेडिट कार्ड, 23 चैक बुक, चार लैपटॉप, आठ सीपीयू, एक वाईफाई रूटर और 11 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इनकी आयकर विभाग व एमसीए के नाम से बनी दो फर्जी ई-मेल को भी ब्लाक किया गया है।
दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी इंगित प्रताप सिंह ने बताया कि वसंतकुंज एंक्लेव निवासी मातादीन गोरा ने शिकायत दी थी कि उसने वर्ष 2013 में बिड़ला सनलाइफ इंश्योरेंस से कम समय में अधिक लाख देने वाले आरडी/एफडी ली थी। पीड़ित जब एक साल बाद कंपनी के कार्यालय में गया तो उसे पता लगा कि उसे आरडी/एफडी देने की बजाय इंश्योरेंस पॉलिसी दे दी गई। वर्ष 2014 में आईजीएमएस की तरफ से उनको 2087000 की पॉलिसी दे दी गई। इसके बाद उनके पास वर्ष 2015 में रोहित कुलकर्णी नाम शख्स का फोन आया और कहा कि वह इंश्योरेंस रेगुलेटरी बॉडी से बोल रहा है और उनकी जो पॉलिसी है उनको एवज में वह 80 लाख रुपये दिलवा देगा। यहां से उनको जालसाजों के पहले ग्रुप ने ठगना शुरू कर दिया। इस रकम को देने के बदले उसने एडवांस में इनकम टैक्स मांगा। आरोपी उनको इनकम टैक्स विभाग के नाम पर मेल भेजते रहे। इस तरह आरोपियों ने पीड़ित से 80 लाख रुपये ठग लिए। ये रकम कई बैंक खातों में जमा करवाई गई थी।
बहाने बनाकर शुरू किया ठगना
इसके बाद दूसरे व तीसरे ग्रुप ने अलग बहाने बनाकर उनको ठगना शुरू किया। तीनों ग्रुप ने उनसे कुल 1.40 करोड़ रुपये ठग लिए। मामला दर्जकर एसीपी ऑपरेशन अभिनेन्द्र जैन की देखरेख में इंस्पेक्टर राकेश शर्मा व एसआई मुकेश की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता लगा कि ठगी रकम विभिन्न बैंक खातों से सचिन मिश्रा, तरूण, अरविंद, पिंकी सक्सेना और विनोद चंद्रा के खातों में गए हैं। जांच में ये पता लगा कि लक्ष्मी नगर से चल रहे हैं। पुलिस टीम ने यहां दबिश देकर काजी टोला, बेवर जिला मैनपुरी, यूपी निवासी सचिन मिश्रा, मोहल्ला महाजरंज बेवर मैनपुर, यूपी निवासी सुनील कुमार उर्फ अरूण, नागिना, जिला बिजनौर यूपी निवासी अरविंद कुमार को और तरूण को रामनगर, जिला अलमोडा उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपी कॉल सेंटरों में काम कर चुके हैं।
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आरोपी सैकड़ों लोगों से कर चुके हैं ठगी
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिछले कई सालों में सैकड़ों लोगों कई करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। ठगी करने वाला पहला ग्रुप नोएडा में ऑनलाइन ठगी शॉपिंग कराने वाले कंपनी सेड शॉपिंग का है। शुरू में ये लॉटरी व अन्य लुभावने ऑफर देकर लोगों को ठगते थे। ये गुजरात के अनिल शाह से 11 लाख, नरेश राजपूत से ड़ेढ लाख, हैदराबाद के सीके पाटिल से पांच लाख, दशारी जयरामिया से 6.5 लाख, हरियाणा के हकीकत राय गोलिया से नौ लाख, बैंगलुरू की अनुराधा से 50 हजार, उमेश माधव से चार लाख, गुजरात के मुकेश शाह से सात लाख, राजस्थान के संदीप से चार लाख, यूपी के डीसी मिश्रा से 15 हजार, महाराष्ट्र के विनोद से सात लाख और केरल के डा. लकशीनाथ मोहन से आठ लाख रुपये ठग चुके हैं।
ऐसे करते थे ठगी
आरोपी ऐसे लोगों को शिकार बनाते थे जिनकी इंश्योरेंस पॉलिस डिफाल्ट हो जाती थी। ये उस पॉलिसी के एवज में मोटी रकम देने का लालच देते थे। ये इंश्योरेंस कंपनियों के एजेंट से पॉलिसी धारक का पूरा डाटा ले लेते थे। इसके बाद ये पीड़ित को पॉलिसी के एवज में मोटी रकम का लालच देकर इंश्योंरेस पॉलिसी के अधिकारी बनकर, आईआरडीए, बैंक अफसर, इनकम टैक्स अधिकारी व वित्त मंत्रालय के अधिकारी बनाकर कई तरह के टैक्स लगने के नाम पर मोटी रकम ठग लेते थे। ये रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा करवा लेते थे।
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दक्षिण-पश्चिमी जिला डीसीपी इंगित प्रताप सिंह ने बताया कि वसंतकुंज एंक्लेव निवासी मातादीन गोरा ने शिकायत दी थी कि उसने वर्ष 2013 में बिड़ला सनलाइफ इंश्योरेंस से कम समय में अधिक लाख देने वाले आरडी/एफडी ली थी। पीड़ित जब एक साल बाद कंपनी के कार्यालय में गया तो उसे पता लगा कि उसे आरडी/एफडी देने की बजाय इंश्योरेंस पॉलिसी दे दी गई। वर्ष 2014 में आईजीएमएस की तरफ से उनको 2087000 की पॉलिसी दे दी गई। इसके बाद उनके पास वर्ष 2015 में रोहित कुलकर्णी नाम शख्स का फोन आया और कहा कि वह इंश्योरेंस रेगुलेटरी बॉडी से बोल रहा है और उनकी जो पॉलिसी है उनको एवज में वह 80 लाख रुपये दिलवा देगा। यहां से उनको जालसाजों के पहले ग्रुप ने ठगना शुरू कर दिया। इस रकम को देने के बदले उसने एडवांस में इनकम टैक्स मांगा। आरोपी उनको इनकम टैक्स विभाग के नाम पर मेल भेजते रहे। इस तरह आरोपियों ने पीड़ित से 80 लाख रुपये ठग लिए। ये रकम कई बैंक खातों में जमा करवाई गई थी।
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बहाने बनाकर शुरू किया ठगना
इसके बाद दूसरे व तीसरे ग्रुप ने अलग बहाने बनाकर उनको ठगना शुरू किया। तीनों ग्रुप ने उनसे कुल 1.40 करोड़ रुपये ठग लिए। मामला दर्जकर एसीपी ऑपरेशन अभिनेन्द्र जैन की देखरेख में इंस्पेक्टर राकेश शर्मा व एसआई मुकेश की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता लगा कि ठगी रकम विभिन्न बैंक खातों से सचिन मिश्रा, तरूण, अरविंद, पिंकी सक्सेना और विनोद चंद्रा के खातों में गए हैं। जांच में ये पता लगा कि लक्ष्मी नगर से चल रहे हैं। पुलिस टीम ने यहां दबिश देकर काजी टोला, बेवर जिला मैनपुरी, यूपी निवासी सचिन मिश्रा, मोहल्ला महाजरंज बेवर मैनपुर, यूपी निवासी सुनील कुमार उर्फ अरूण, नागिना, जिला बिजनौर यूपी निवासी अरविंद कुमार को और तरूण को रामनगर, जिला अलमोडा उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपी कॉल सेंटरों में काम कर चुके हैं।
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आरोपी सैकड़ों लोगों से कर चुके हैं ठगी
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिछले कई सालों में सैकड़ों लोगों कई करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। ठगी करने वाला पहला ग्रुप नोएडा में ऑनलाइन ठगी शॉपिंग कराने वाले कंपनी सेड शॉपिंग का है। शुरू में ये लॉटरी व अन्य लुभावने ऑफर देकर लोगों को ठगते थे। ये गुजरात के अनिल शाह से 11 लाख, नरेश राजपूत से ड़ेढ लाख, हैदराबाद के सीके पाटिल से पांच लाख, दशारी जयरामिया से 6.5 लाख, हरियाणा के हकीकत राय गोलिया से नौ लाख, बैंगलुरू की अनुराधा से 50 हजार, उमेश माधव से चार लाख, गुजरात के मुकेश शाह से सात लाख, राजस्थान के संदीप से चार लाख, यूपी के डीसी मिश्रा से 15 हजार, महाराष्ट्र के विनोद से सात लाख और केरल के डा. लकशीनाथ मोहन से आठ लाख रुपये ठग चुके हैं।
ऐसे करते थे ठगी
आरोपी ऐसे लोगों को शिकार बनाते थे जिनकी इंश्योरेंस पॉलिस डिफाल्ट हो जाती थी। ये उस पॉलिसी के एवज में मोटी रकम देने का लालच देते थे। ये इंश्योरेंस कंपनियों के एजेंट से पॉलिसी धारक का पूरा डाटा ले लेते थे। इसके बाद ये पीड़ित को पॉलिसी के एवज में मोटी रकम का लालच देकर इंश्योंरेस पॉलिसी के अधिकारी बनकर, आईआरडीए, बैंक अफसर, इनकम टैक्स अधिकारी व वित्त मंत्रालय के अधिकारी बनाकर कई तरह के टैक्स लगने के नाम पर मोटी रकम ठग लेते थे। ये रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा करवा लेते थे।