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तेजाब फेंकने की धमकी देने के आरोपी पर दर्ज प्राथमिकी रद्द
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक युवती का पीछा करने, हमला करने और शादी करने से इनकार करने पर तेजाब फेंकने की धमकी देने के आरोपी युवक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया। दरअसल आरोपी ने माफी मांगते हुए भविष्य में इस प्रकार का व्यवहार न करने का आश्वासन दिया जिसके आधार पर दोनों ने समझौता कर लिया।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने हाल ही में दिए अपने फैसले में कहा कि आरोपी यशराज चौहान ने शिकायतकर्ता से माफी मांगी है और विवाद को शिकायतकर्ता की अपनी स्वतंत्र इच्छा से सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटा दिया गया है। याचिकाकर्ता की आयु व इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता का पूरा जीवन उसके आगे है। इसके अलावा आरोपी ने माफी मांगने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को न दोहराने के आश्वासन को देेखते हुए वर्तमान कार्यवाही को जारी रखने में कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
अदालत ने कहा आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी तो रद्द की जाती है लेकिन उसे अपने पापों के प्रायश्चित के लिए समाजसेवा करनी चाहिए। अदालत ने उसे एक माह तक लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह एक माह बाद रिपोर्ट दाखिल करें।
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इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे राशि आर्मी वेलफेयर फंड में जमा करवाने का निर्देश दिया है। आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, पीछा करने व धमकियां देने का मामला प्रीत विहार थाने में दर्ज किया गया था। युवती ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसका हमेशा पीछा करता था। घटना वाले दिन विवाह न करने पर उस पर तेजाब फेंकने की धमकी दी थी।
आरोपी ने अदालत को बताया कि नौ जून को उनका आपस में समझौता हो गया है। आरोपी ने कहा उसने युवती से माफी मांग ली है जिसे उसने स्वीकार कर लिया है। उसके भविष्य को देखते हुए प्राथमिकी रद्द की जाए।
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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने हाल ही में दिए अपने फैसले में कहा कि आरोपी यशराज चौहान ने शिकायतकर्ता से माफी मांगी है और विवाद को शिकायतकर्ता की अपनी स्वतंत्र इच्छा से सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटा दिया गया है। याचिकाकर्ता की आयु व इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता का पूरा जीवन उसके आगे है। इसके अलावा आरोपी ने माफी मांगने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को न दोहराने के आश्वासन को देेखते हुए वर्तमान कार्यवाही को जारी रखने में कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
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अदालत ने कहा आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी तो रद्द की जाती है लेकिन उसे अपने पापों के प्रायश्चित के लिए समाजसेवा करनी चाहिए। अदालत ने उसे एक माह तक लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल में सामुदायिक सेवा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह एक माह बाद रिपोर्ट दाखिल करें।
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इतना ही नहीं अदालत ने आरोपी पर 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए उसे राशि आर्मी वेलफेयर फंड में जमा करवाने का निर्देश दिया है। आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, पीछा करने व धमकियां देने का मामला प्रीत विहार थाने में दर्ज किया गया था। युवती ने आरोप लगाया था कि आरोपी उसका हमेशा पीछा करता था। घटना वाले दिन विवाह न करने पर उस पर तेजाब फेंकने की धमकी दी थी।
आरोपी ने अदालत को बताया कि नौ जून को उनका आपस में समझौता हो गया है। आरोपी ने कहा उसने युवती से माफी मांग ली है जिसे उसने स्वीकार कर लिया है। उसके भविष्य को देखते हुए प्राथमिकी रद्द की जाए।