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World Kidney Day : इक दूसरे से, करते हैं प्यार हम...पूरा परिवार एक-एक किडनी पर

Thu, 10 Mar 2022 04:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 10 Mar 2022 04:38 AM IST
सार

परिवार के सभी सदस्यों की एक-एक किडनी है जो एक दूसरे से लेकर प्रत्यारोपित की गई है। परिवार में पिता ने पुत्र को और पत्नी ने पति को किडनी दी।
 

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Father gave kidney to son and wife to husband
kidney day

विस्तार

‘इक दूसरे से, करते हैं प्यार हम...’। इस मशहूर गाने के बोल दिल्ली के उस परिवार पर एकदम सटीक बैठते हैं, जो एक दूसरे के सबसे बड़े रक्षक बने हुए हैं। परिवार के सभी सदस्यों की एक-एक किडनी है जो एक दूसरे से लेकर प्रत्यारोपित की गई है। परिवार में पिता ने पुत्र को और पत्नी ने पति को किडनी दी।

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मूल रूप से राजस्थान निवासी इस परिवार में एक महिला सहित चार सदस्य हैं। हर साल मार्च के दूसरे बृहस्पतिवार को दुनिया भर में किडनी की बीमारियों को लेकर जागरूकता लाने के लिए किडनी दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष ‘किडनी हेल्थ फॉर ऑल’ शीर्षक के साथ यह दिवस मनाया जाएगा।
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पूरे परिवार का प्रत्यारोपण दिल्ली के ही बालाजी एक्शन अस्पताल में हुआ। यहां के वरिष्ठ डॉ. राजेश अग्रवाल ने बताया कि तीन साल पहले मनोज (48) अपने छोटे भाई महेश (45) का इलाज कराने आए थे। जांच में किडनी खराब मिली। तब पिता विनोद ने छोटे बेटे महेश के लिए किडनी दान की। कुछ समय बाद पता चला कि मनोज की भी किडनी खराब मिली। चूंकि छोटे बेटे महेश को पिता विनोद ने किडनी दे चुके थे और मनोज की मां का निधन पहले ही हो चुका है।      
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लिहाजा रक्त संबंधियों में ऐसा कोई नहीं था जो मदद को आगे आए। ऐसे में मनोज की पत्नी जयश्री ने किडनी दान की। डॉक्टरों के अनुसार परिवार के सभी सदस्य महज एक किडनी पर बिल्कुल स्वस्थ हैं। डाक्टर ने बताया कि एक ही परिवार में दो लोगों की किडनी आनुवंशिक कारणों से भी खराब हो सकती हैं।

मां ने बेटी को किडनी दान कर बचाई जान
दिल्ली के आकाश अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद किडनी फेल होने का दुर्लभ केस भी सामने आया। यहां  इलाज के लिए उज्बेकिस्तान से भारत आई 23 वर्षीय महिला मोखिचेखरखोन सुलतोनोवा ने कुछ ही समय पहले एक शिशु को जन्म दिया था, लेकिन कुछ समय बाद पता चला कि उसकी किडनी खराब हो रही हैं।

इससे आंत को भी नुकसान हुआ। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिये बाकी परेशानी को ठीक किया, लेकिन किडनी प्रत्यारोपण के लिए जब एक दाता की जरूरत पड़ी तो मरीज की मां ने किडनी दान करने का फैसला लिया। 46 वर्षीय मावजुदा खलीलोवा ने किडनी दान की। डॉ. विकास अग्रवाल के अनुसार प्रसूति के बाद किडनी फेल होना बहुत कम होता है। विश्व स्तर पर ऐसे मामले  एक फीसदी से भी काफी कम हैं।

24 साल में 31 गुना बढ़ा प्रत्यारोपण

दिल्ली के अस्पतालों में बीते 24 साल के दौरान किडनी प्रत्यारोपण के मामलों में 31 गुना की बढ़ोतरी आई है। इनमें 80 फीसदी से भी अधिक रोगी आसपास के राज्यों से हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) से ग्रस्त रोगियों में प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है। हालांकि, प्रत्यारोपण के बाद रोगी का जीवन काफी चुनौतीपूर्ण रहता है।

बुधवार को विश्व किडनी दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्यारोपण की तुलना में किडनी रोगियों की संख्या बहुत अधिक है क्योंकि हर रोगी का प्रत्यारोपण नहीं हो पाता है।

एक अनुमान के अनुसार, दिल्ली के अस्पतालों में हर माह 50 हजार से भी ज्यादा किडनी रोगियों का डायलिसिस किया जाता है। एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि किडनी को नुकसान पहुंचने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन समय पर इलाज न मिले तो यह परेशानी बढ़ने लगती है।

सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु वर्मा ने बताया कि क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) के सालाना मामले बढ़ रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि वर्ष 1995 की तुलना में अब समय काफी बदला है। लोग पहले की तुलना में अधिक जागरूक हुए हैं। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से मरीजों की जांच या पहचान भी आसान हुई है। हालांकि, इनके साथ बीमारी का दायरा भी बढ़ा है।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के मुताबिक साल 1995 से 2019 के बीच दिल्ली के अस्पतालों में 16728 किडनी प्रत्यारोपण हुए हैं। इस दौरान 4642 लिवर और 68 हार्ट प्रत्यारोपण हुए। साल 1995 में 56 मरीजों का किडनी प्रत्यारोपण हुआ था जो सालाना बढ़ते-बढ़ते 2015 में 1725 तक पहुंचा। वहीं साल 2019 में 1416 प्रत्यारोपण दर्ज हुए।

सरकारी अस्पतालों में आसान नहीं इलाज
दिल्ली में मौजूद सभी सरकारी अस्पतालों में किडनी रोगियों को उपचार नहीं मिलता है। एम्स, सफदरजंग, आरएमएल, लोकनायक, डीडीयू, रोहिणी और जीटीबी अस्पताल में इसका उपचार मिलता है लेकिन इन सभी जगह प्रत्यारोपण के लिए जहां एक मरीज को छह से 12 माह तक का इंतजार करना पड़ता है। वहीं डायलिसिस के लिए भी लंबी वेटिंग रहती है। स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि दिल्ली में हर साल सबसे अधिक प्रत्यारोपण प्राइवेट अस्पतालों में होते हैं। मैक्स, बीएलके, अपोलो, आकाश, बालाजी, धर्मशिला जैसे अस्पतालों में किडनी प्रत्यारोपण का खर्चा करीब पांच से 10 लाख रुपये तक आता है।

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