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किसान आज बैठक में तय करेंगे आंदोलन का रुख
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के साथ किसानों की वार्ता के बाद नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है। सरकार की ओर से कृषि कानूनों के स्थगन संबंधी प्रस्ताव मिलने के बाद बृहस्पतिवार को एक बार फिर सभी किसान संगठनों की बैठक होगी। इसमें कृषि कानूनों को निश्चित मियाद के लिए स्थगित करने और एमएसपी की गारंटी के लिए कानून सहित अन्य पहलुओं पर मंथन किया जाएगा। सभी पहलुओं पर मंथन के दौरान अगर किसानों का रुख लचीला रहा, तो इससे ही आंदोलन की दिशा और रफ्तार तय होगी।
बुधवार को सरकार से हुई वार्ता को किसान भी सकारात्मक मानते हुए अगली बैठक में सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही निर्णय लेंगे। किसान संगठन अभी भी कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, लेकिन बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक में सभी संगठनों की राय के बाद इस दिशा में आगे पहल किए जाने की उम्मीद है।
सभी बिंदुओं पर करेंगे विचार-विमर्श
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शनपाल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बुधवार की बैठक सकारात्मक रही। इस दौरान कृषि कानूनों, एमएसपी सहित अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। बृहस्पतिवार की बैठक में सभी बिंदुओं पर किसान संगठन विचार विमर्श करने के बाद ही अगला निर्णय लेंगे। 22 जनवरी को किसानों की बैठक के बाद आंदोलन का रुख तय होगा।
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कमेटी के पक्ष में नहीं हैं किसान
मोर्चा के शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने कहा कि सरकार की ओर से एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांग पर कमेटी बनाने की पेशकश की गई, लेकिन इससे पहले छह कृषि आयोग का किसानों को कुछ फायदा नहीं मिल सका। छठे आयोग के तहत एमएस स्वामीनाथन की सिफारिशें अब तक लागू नहीं की जा सकी हैं, इसलिए किसान एमएसपी के लिए किसी भी कमेटी के गठन के हक में नहीं हैं।
परेड का वार्ता से कोई ताल्लुक नहीं
26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के बारे में डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसमें न केवल पूर्व सैनिक बल्कि खिलाड़ी सहित समाज के अन्य वर्गों के प्रबुद्ध लोग भी शामिल होंगे। सभी सीमाओं पर किसान आंदोलन के लिए की जा रही तैयारियों को भी झांकी के तौर पर शामिल किया जा सकता है। शिवकुमार कक्काजी ने कहा कि परेड का वार्ता से कोई ताल्लुक नहीं है। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसान आउटर रिंग रोड पर ही परेड की तैयारी में हैं।
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बुधवार को सरकार से हुई वार्ता को किसान भी सकारात्मक मानते हुए अगली बैठक में सभी पहलुओं पर मंथन के बाद ही निर्णय लेंगे। किसान संगठन अभी भी कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, लेकिन बृहस्पतिवार को होने वाली बैठक में सभी संगठनों की राय के बाद इस दिशा में आगे पहल किए जाने की उम्मीद है।
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सभी बिंदुओं पर करेंगे विचार-विमर्श
संयुक्त किसान मोर्चा के डॉ. दर्शनपाल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बुधवार की बैठक सकारात्मक रही। इस दौरान कृषि कानूनों, एमएसपी सहित अन्य पहलुओं पर भी चर्चा हुई। बृहस्पतिवार की बैठक में सभी बिंदुओं पर किसान संगठन विचार विमर्श करने के बाद ही अगला निर्णय लेंगे। 22 जनवरी को किसानों की बैठक के बाद आंदोलन का रुख तय होगा।
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कमेटी के पक्ष में नहीं हैं किसान
मोर्चा के शिवकुमार शर्मा (कक्काजी) ने कहा कि सरकार की ओर से एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांग पर कमेटी बनाने की पेशकश की गई, लेकिन इससे पहले छह कृषि आयोग का किसानों को कुछ फायदा नहीं मिल सका। छठे आयोग के तहत एमएस स्वामीनाथन की सिफारिशें अब तक लागू नहीं की जा सकी हैं, इसलिए किसान एमएसपी के लिए किसी भी कमेटी के गठन के हक में नहीं हैं।
परेड का वार्ता से कोई ताल्लुक नहीं
26 जनवरी को ट्रैक्टर मार्च के बारे में डॉ. दर्शनपाल ने कहा कि मार्च पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत किया जाएगा। इसमें न केवल पूर्व सैनिक बल्कि खिलाड़ी सहित समाज के अन्य वर्गों के प्रबुद्ध लोग भी शामिल होंगे। सभी सीमाओं पर किसान आंदोलन के लिए की जा रही तैयारियों को भी झांकी के तौर पर शामिल किया जा सकता है। शिवकुमार कक्काजी ने कहा कि परेड का वार्ता से कोई ताल्लुक नहीं है। इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसान आउटर रिंग रोड पर ही परेड की तैयारी में हैं।