जंतर मंतर पर किसान संसद: महिलाओं ने संभाला मोर्चा, कृषि कानून के विरोध में रख रहीं बातें

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 26 Jul 2021 02:48 PM IST

सार

किसान संसद में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से महिलाएं मोर्चे पर पहुंची हैं। किसान संसद के तीन सत्र के दौरान महिलाएं कृषि कानून, खासकर मंडी एक्ट पर अपने विचार रखेंगी। पढ़ें दिनभर के अपडेट्स... 
महिलाओं ने संभाला जंतर मंतर पर मोर्चा
महिलाओं ने संभाला जंतर मंतर पर मोर्चा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

महिला किसानों ने संभाला मोर्चा
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आज महिला किसान जंतर-मंतर पर मोर्चा संभाले हुए हैं और कृषि कानून के विरोध में तमाम मुद्दों पर बहस का दौर जारी है।

महिला सांसद जंतर-मंतर के लिए हुईं रवाना
दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों के आंदोलन को आठ महीने पूरे हो चुके हैं। इस दौरान बराबर की साझेदार रहीं महिलाएं जंतर मंतर पर आज किसान संसद का संचालन करेंगी। महिलाएं इस दौरान मौजूदा भारतीय कृषि व्यवस्था और आंदोलन में उनकी भूमिका के साथ कृषि कानूनों के तमाम पहलुओं पर अपनी राय रखेंगी। इसके तहत 200 महिला किसान सिंघु बॉर्डर से बसों में भरकर रवाना हो चुकी हैं।
 

अलग-अलग राज्यों से पहुंची हैं महिलाएं
किसान संसद में शामिल होने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों से महिला किसान मोर्चे पर पहुंची हैं। किसान संसद के तीन सत्र के दौरान महिलाएं कृषि कानून, खासकर मंडी एक्ट पर अपने विचार रखेंगी। इससे उन्हें सभी पहलुओं पर चर्चा होगी ताकि किसानों की आवाज सरकार तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभा सकें। 

तीन महिलाओं को सौंपी जाएगी संसद की जिम्मेदारी
किसान संसद के तीन सत्रों की अध्यक्षता की जिम्मेवारी तीन महिला प्रतिनिधियों को सौंपी जाएगी। इसी तर्ज पर तीन उपाध्यक्ष भी किसान संसद की कार्रवाई में सहभागी बनेंगी। 

महिला किसान संसद में 200 किसान प्रतिनिधि शामिल होंगी। इनमें पंजाब की 100 जबकि अन्य राज्यों की 100 महिला प्रतिनिधि शामिल होंगी। इस दौरान तीन सत्रों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी महिलाएं ही होंगी। इस दौरान किसान संसद आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 और किसानों और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की जाएगी।

महिलाएं घर से बाहर के सभी वर्गों पर इस कानून के प्रभाव पर विस्तृत चर्चा होगी। 27 जुलाई को इसी विषय पर किसान प्रतिनिधियों की तरफ से निर्णय/संकल्प पारित किया जाएगा। इसके बाद दो दिनों तक किसान संसद में केंद्र सरकार के कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट पर बहस होगी। 

किसानों की मौत का आंकड़ा न होने पर बयान की निंदा 
मोर्चा ने केंद्र सरकार की ओर से किसानों की मौत का आंकड़ा न होने के बयान की निंदा की है। पंजाब सरकार ने पंजाबी प्रदर्शनकारियों की मौत की आधिकारिक संख्या 220 रखी है, लेकिन मोर्चा ने इस संख्या की पुष्टि नहीं की है। मोर्चा का कहना है कि किसान आंदोलन के दौरान संघर्ष में 540 मौतें हो चुकी है।

सरकार इसे नहीं मानना चाहती है तो राज्य सरकारों के आधिकारिक आंकड़े को देखना चाहिए। ऐसा नहीं किए जाने से सरकार का किसान विरोधी रवैये स्पष्ट होता है। किसानों में एकता व सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए पलवल अनाज मंडी में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया।


पंजाब-हरियाणा में किसान कर रहे हैं नेताओं का विरोध 
पंजाब में भाजपा नेता बलभद्र सेन दुग्गल को फगवाड़ा में किसानों के काले झंडे दिखाए गए। हरियाणा के भाजपा राज्य इकाई के अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ को बादली में विरोध का सामना करना पड़ा। हरियाणा के हिसार गांव में भाजपा नेता सोनाली फोगट को किसानों ने काले झंडे दिखाए तो एक दिन पहले रुद्रपुर में भी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को किसानों के विरोध का सामना करना पड़ा। 

किसान हितों को किया गया दरकिनार 

संयुक्त किसान मोर्चा का आरोप है कि मुख्य रूप से किसानों के वोटों से सत्ता में आने के बाद सरकार ने उनके हितों को दरकिनार किया है। किसानों को अपनी आवाज और मांगों को सच्चे, धैर्यपूर्वक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए विवश होना पड़ा। विरोध प्रदर्शनों ने देश में किसानों की एकता और प्रतिष्ठा को नई पहचान दी है। 
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