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दिल्ली: परिजनों की पूरी हुई आस, यूक्रेन से महफूज लौटने पर छात्रों ने ली राहत की सांस 

Tue, 08 Mar 2022 05:26 AM IST
सुशील कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार Updated Tue, 08 Mar 2022 05:26 AM IST
सार

हंगरी बॉर्डर तक भी पहुंचने में ट्रेन में भारी भीड़ थी तो टैक्सी से तय की गई दूरी भी खतरों से खाली नहीं थी। एक और छात्र ने बताया कि यूक्रेन के खारकीव में हर घंटा ऐसा लगता था कि सुबह कहां होंगे, पता नहीं। परिजनों की चिंताएं लगातार बनी हुई थीं।de

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Family hopes fulfilled students breathe a sigh of relief after returning safely from Ukraine
यूक्रेन में मची तबाही का मंजर। - फोटो : PTI

विस्तार

बम धमाके के बीच 12 दिन बिताने के बाद यूक्रेन से पहुंचे छात्रों ने दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद राहत की सांस ली। इनमें खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधिकतर छात्र थे। छात्रों ने हंगरी पहुंचने के बाद सरकार और दूतावास की तरफ से मिलने वाली सहायता के लिए शुक्रिया अदा करते हुए सूमी में फंसे भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द निकालने की मांग की है।

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खारकीव से पहुंचे रमण ने बताया कि घर के अंदर भी लगातार बम धमाकों की आवाज सुनकर थक चुका हूं। यूक्रेन से बाहर निकलने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस दौरान ट्रेन, टैक्सी का सफर किया, लेकिन रास्ते में लविव तक पहुंचना भी खतरे से खाली नहीं लग रहा था। उन्होंने बताया कि वहां के हालात से घरवाले इतने परेशान थे कि छात्रों को भी घर पहुंचने की जल्दी थी। यूक्रेन के शहरों में हालात बेहद खराब हैं।
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इसी यूनिवर्सिटी की छात्र प्रिया ने बताया कि पिछले 10 दिन बंकर में बिताए। हर रात चिंता सताती थी कि सुबह क्या होगा। यहां पहुंचने के बाद जब परिजनों को देखने के बाद अहसास हुआ कि अब सुरक्षित हैं। हंगरी बॉर्डर तक भी पहुंचने में ट्रेन में भारी भीड़ थी तो टैक्सी से तय की गई दूरी भी खतरों से खाली नहीं थी। एक और छात्र ने बताया कि यूक्रेन के खारकीव में हर घंटा ऐसा लगता था कि सुबह कहां होंगे, पता नहीं। परिजनों की चिंताएं लगातार बनी हुई थीं। बगैर खाना और बॉर्डर तक पहुंचने में आई परेशानियों से ऐसा लगा कि कैसे यूक्रेन से बाहर निकले। ट्रेन में भी यूक्रेन वासियों और महिलाओं को प्राथमिकता दी जा रही थी। भारतीय छात्रों के साथ वहां भी अलग व्यवहार किया जा रहा था। बॉर्डर पार कर हंगरी पहुंचने पर ऐसा लगा कि अब हम सभी बच जाएंगे।
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गुरुद्वारा में की अरदास
कीव में गोलियों से घायल हुए छात्र हरजोत के पहुंचने से पहले उनके परिजनों ने छत्तरपुर के गुरुद्वारा में उनके लिए अरदास की। बेटे के जख्मी होने के बाद अस्प्ताल में इलाज के दौरान परिजनों के साथ एक-दो बार तो बातें हुई थीं। लेकिन हरजोत सिंह के भाई प्रभजोत ने बताया कि उन्हें सुबह से कोई बातचीत नहीं हुई थी। यह जानकारी मिली कि पोलैंड से भारत के लिए रवाना हो गए हैं। उनके परिजन पिछले एक हफ्ते से अधिक वक्त से हरजोत के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। कीव से बॉर्डर के लिए जाते हुए रास्ते में गोलीबारी में हरजोत जख्मी होने पर कीव के अस्पताल में भर्ती किया गया था।

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