Yamuna Flood : विशेषज्ञों की राय- यमुना के मैदान ने दिल्ली को बाढ़ की विभीषिका से बचाया
इसकी बड़ी वजह पल्ला से जैतपुर तक यमुना के करीब दस हजार हेक्टेयर में फैले बाढ़ के मैदान को माना जा रहा है। बाढ़ का पानी यमुना ने अपने मैदान में संभाल रखा है।
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यमुना का जलस्तर बुधवार बेशक ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया, लेकिन बाढ़ जनित तबाही से दिल्ली बची हुई है। इसकी बड़ी वजह पल्ला से जैतपुर तक यमुना के करीब दस हजार हेक्टेयर में फैले बाढ़ के मैदान को माना जा रहा है। बाढ़ का पानी यमुना ने अपने मैदान में संभाल रखा है। वहीं, दोनों तरफ बनाए गए बांध जलस्तर 208 के करीब होने के बाद भी पानी को अभी रिहायशी काॅलोनियों तक पहुंचने से रोके हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तुलनात्मक रूप से यमुना का फ्लड प्लेन दिल्ली में दूसरे शहरों से ज्यादा है। यह एक तरह से रक्षक का काम कर रहा है। दिल्ली तभी बाढ़ की विभीषिका से बची हुई है।
दरअसल, यमुना का जलस्तर सबसे ज्यादा 1978 में 207.49 मीटर तक गया था। यह दिल्ली में अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ थी। इसमें मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन समेत दिल्ली देहात डूबा हुआ था। जल बोर्ड के सेवानिवृत्त अधिकारी व बाढ़ के साक्षी रहे एसए नकवी बताते हैं कि बहुत भयानक बाढ़ थी। सबसे ज्यादा पानी ककरौला की तरफ से आया था। उस वक्त बारिश भी हो रही थी। गांवों के साथ आवासीय कालोनियों में भी पानी भर गया था। नई दिल्ली इलाके को छोड़कर कोई एक भी ऐसा इलाका नहीं था जो बाढ़ की चपेट में नहीं आया था। इसी के बाद यमुना के दोनों किनारों पर बांध बनाया गया और यमुना को बांध दिया गया। इसके बाद से इस साल पहली बार यमुना नदी उफान पर है।
उधर, बुधवार देर शाम 8 बजे यमुना नदी का जल स्तर 207.89 पर पहुंच गया है। फिर भी 1978 की तरफ अफरातफरी नहीं है। इसकी बड़ी वजह यमुना का फ्लड प्लेन और फ्लड प्लेन के दोनों तरफ से बनाए गए बांध है। दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. शशांक शेखर के मुताबिक, इस वक्त दिल्ली के सभी बांध पूरी तरह खोल दिए गए हैं। पूरे फ्लड प्लेन में पानी फैला हुआ है। धारा प्रवाह भी तेज है। लाेग अभी बाहर निकाले गए हैं, जो फ्लड प्लेन में रहते हैं। वह फ्लेड प्लेन ही है, जो बाकी दिल्ली को बाढ़ से बचाए हुए है।
तब बाढ़ में डूब गए थे गांव
1978 की बाढ़ का सामना करने वाले मुबारकपुर निवासी विजेंद्र ने बताया कि उस दौरान देहात का एक भी ऐसा गांव नहीं था जो बाढ़ से अछूता था। सभी गांवों के चारों पानी ही पानी दिक्कत थी। इसके अलावा ग्रामीणों के घरों में भी पानी घूस गया था। इसी तरह शहरी इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे। वहीं, ढांसा गांव के निवासी नारायण सिंह डागर के अनुसार वर्ष 1978 में ग्रामीण इलाके में सरकार ने लोगों को गांव से गंतव्य व गंतव्य से गांव तक पहुंचाने के लिए नाव चलाई थी।
1963-2023 तक की बाढ़
- 1963: 205.40
- 1978: 207.49
- 2010: 207.11
- 2013: 207.32
- 2023: 208.05 मीटर (बुधवार रात 10 बजे तक)