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पूर्व पार्षद इशरत ने कहा उसे फर्जी तरीके से फंसाया गया, मांगी जमानत
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नई दिल्ली। दिल्ली दंगा मामलों में आरोपी कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां ने उसे साजिशन फंसाने का तर्क देते हुए जमानत मांगी है। दिल्ली पुलिस ने इशरत को गैर कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। इशरत ने कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से मामला दर्ज किया गया है और उसके खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं है।
कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष इशरत जहां की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप तेवतिया ने कहा कि पूरा मामला राजनीतिक है, क्या राजनीतिक जुड़ाव होना गलत है? उनकी मुवक्किला के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। उसने क्या गलत किया? यूएपीए लगाने का मकसद आवाजों को दबाना है। यूएपीए की समीक्षा होनी चाहिए।
वर्ष 2012 से 2017 के बीच कांग्रेस की निगम पार्षद रहीं इशरत जहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सदस्य रही हैं। इशरत ने इस आधार पर जमानत याचिका दायर की कि सह-आरोपी के साथ जहां का संबंध दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है और गवाह फर्जी तरीके से बनाए गए हैं।
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सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष के आरोपों पर आपत्ति जताई कि इशरत जहां ने विरोध और हिंसा के वित्त पोषण में मदद की। तेवतिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अभी यह कहानी बुनी है और हिंसा से पहले व उसके दौरान उनके खर्च के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इस बीच, विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने वे वीडियो पेश करने की अपील की, जिनपर आरोपी के वकीलों ने भरोसा जताया है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 23 जुलाई तय की है।
इशरत जहां समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर फरवरी 2020 की हिंसा का मास्टरमाइंड होने का आरोप है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और काफी घायल हो गए थे।
यह पहला मौका है जब आरोपी ने मामले में नियमित जमानत मांगी है। पिछले साल नवंबर में, अदालत ने यूएपीए के तहत दर्ज किए गए अपराधों सहित विभिन्न अपराधों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इससे पहले, इशरत जहां को शादी करने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने या गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया गया था। जहां की शादी 12 जून 2020 को तय हुई थी।
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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष इशरत जहां की ओर से पेश अधिवक्ता प्रदीप तेवतिया ने कहा कि पूरा मामला राजनीतिक है, क्या राजनीतिक जुड़ाव होना गलत है? उनकी मुवक्किला के खिलाफ कोई सबूत नहीं हैं। उसने क्या गलत किया? यूएपीए लगाने का मकसद आवाजों को दबाना है। यूएपीए की समीक्षा होनी चाहिए।
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वर्ष 2012 से 2017 के बीच कांग्रेस की निगम पार्षद रहीं इशरत जहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सदस्य रही हैं। इशरत ने इस आधार पर जमानत याचिका दायर की कि सह-आरोपी के साथ जहां का संबंध दिखाने के लिए कोई सबूत नहीं है और गवाह फर्जी तरीके से बनाए गए हैं।
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सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष के आरोपों पर आपत्ति जताई कि इशरत जहां ने विरोध और हिंसा के वित्त पोषण में मदद की। तेवतिया ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अभी यह कहानी बुनी है और हिंसा से पहले व उसके दौरान उनके खर्च के पैटर्न में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इस बीच, विशेष लोक अभियोजक अमित प्रसाद ने वे वीडियो पेश करने की अपील की, जिनपर आरोपी के वकीलों ने भरोसा जताया है। अदालत ने मामले की सुनवाई अब 23 जुलाई तय की है।
इशरत जहां समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन पर फरवरी 2020 की हिंसा का मास्टरमाइंड होने का आरोप है, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और काफी घायल हो गए थे।
यह पहला मौका है जब आरोपी ने मामले में नियमित जमानत मांगी है। पिछले साल नवंबर में, अदालत ने यूएपीए के तहत दर्ज किए गए अपराधों सहित विभिन्न अपराधों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। इससे पहले, इशरत जहां को शादी करने के लिए 10 दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी और सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने या गवाहों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया गया था। जहां की शादी 12 जून 2020 को तय हुई थी।