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दिल्ली : ताजमहल का टिकट बुक कराने के नाम पर ठगी कर रहा था इंजीनियर, पकड़ा गया
Sat, 22 Jan 2022 05:37 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 22 Jan 2022 05:37 AM IST
सार
एएसआई की फर्जी वेबसाइट बनाकर करता था वारदात, अब तक 50 से ज्यादा को चपत लगा चुका है।
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गिरफ्त में आरोपी...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ताजमहल समेत ऐतिहासिक स्मारकों के टिकट बुक कराने के नाम पर ठगी कर रहा था। वह फर्जी वेबसाइट बनाकर फर्जीवाड़ा कर रहा था। शुरुआती जांच में ये बात सामने आई है कि आरोपी 50 से ज्यादा लोगों से ठगी कर चुका है। अपराध शाखा ने इंजीनियर संदीप चांद को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किया गया लैपटॉप व मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है।
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अपराध शाखा डीसीपी मनोज सी के अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के महानिदेशक ने अपराध शाखा को शिकायत दी थी कि ऐतिहासिक स्मारकों के टिकट बुक करने के नाम पर आम लोगों के साथ ठगी की जा रही है। आरोपी ने आगरामोमेंट्सडॉटइन के नाम पर से साइट बना रखी थी। ऐसे ही एक घटना में एक पीड़ित ने ताजमहल के टिकट बुक कराया।
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पीड़ित के खाते से पैसे कट गए, मगर उसे टिकट नहीं मिला। मामला दर्जकर इंस्पेक्टर मनोज कुमार मिश्रा की देखरेख में एसआई राकेश व हवलदार मोहित की टीम ने जांच शुरू की। जांच में पता लगा कि फर्जी वेबसाइट चलाने वाला आरोपी अपनी लोकेशन बदल रहा है। इसके बाद मनोज कुमार मिश्रा की टीम ने आरोपी सॉफ्टवेयर इंजीनियर संदीप चांद को चंपावत, उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया।
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आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि वह पेशे से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और नोएडा, यूपी में स्थित एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता है। लॉकडाउन के कारण उनका काम ठीक नहीं चल रहा है। इसलिए, उसने इंटरनेट पर खोज करते समय एक नकली वेबसाइट बनाकर आसान तरीके से पैसे कमाने का आइडिया आया। इंजीनियर होने के कारण उसे इंटरनेट की पूरी जानकारी थी। ठगी की रकम कम होने के कारण ज्यादातर लोग शिकायत दर्ज नहीं कराते थे।
इस तरह करता था फर्जीवाड़ा
आरोपी ने आगरामोमेंट्सडॉटइन नाम से फर्जी साइट बनाई। उसने इंटरनेट सर्फिंग के दौरान देखा है कि ज्यादातर लोग ऐतिहासिक स्मारकों और अन्य स्थानों पर जाने के लिए ऑनलाइन टिकट बुक कराते हैं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वेबसाइट की मूल बातें देखीं और उससे मिलती-जुलती एक नकली वेबसाइट बनाई।
वह शनिवार व रविवार को भारी होने के कारण जब लोगों को ताजमहल की टिकट नहीं मिलता थी तो आरोपी ऑनलाइन टिकट बेचने की बात कहता था। लोग उसकी साइट पर विजिट कर टिकट बुक कराते थे। लोगों के पैस बैंक खाते से कट जाते थे, मगर उन्हें टिकट नहीं मिलते थे। आरोपी ने देहरादून, उत्तराखंड से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन किया हुआ है।