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झुग्गी-झोपड़ी व मजदूरों के वोट काटने की साजिश कर रहा चुनाव आयोग: देवेन्द्र यादव
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भाजपा के इशारे पर दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी, रेहड़ी-पटरी, मजदूर और वंचित तबके के लोगों के वोट काटने की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस इस साजिश को सफल नहीं होने देगी। यादव ने कहा, स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन के नाम पर दिल्ली की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी की जा रही है, जिसका उद्देश्य गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची की कट-ऑफ तिथि मार्च 2008 किस आधार पर तय की गई है और क्या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसके लिए जवाबदेह हैं?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, अभी तक वोट बनाने के लिए किसी भी व्यक्ति के कम से कम छह महीने से उसी पते पर रहने का नियम है, लेकिन अब रेन बसेरों या खुले में रहने वाले गरीबों को इस प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब आधार को वोटर कार्ड से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है, तो फिर उसे पहचान प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा?
देवेन्द्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की नई प्रणाली से न तो नागरिकता स्पष्ट हो रही है और न ही मतदाता पहचान की प्रक्रिया पारदर्शी रह गई है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि क्या भाजपा दिल्ली से 2008 के बाद आए लोगों को खदेड़ने की तैयारी कर रही है? उन्होंने कहा कि तब दिल्ली की आबादी 1.64 करोड़ थी, जबकि आज यह 3.59 करोड़ हो चुकी है।
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नई दिल्ली। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर भाजपा के इशारे पर दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी, रेहड़ी-पटरी, मजदूर और वंचित तबके के लोगों के वोट काटने की साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, कांग्रेस इस साजिश को सफल नहीं होने देगी। यादव ने कहा, स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन के नाम पर दिल्ली की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी की जा रही है, जिसका उद्देश्य गरीबों और प्रवासी मजदूरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची की कट-ऑफ तिथि मार्च 2008 किस आधार पर तय की गई है और क्या मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता इसके लिए जवाबदेह हैं?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, अभी तक वोट बनाने के लिए किसी भी व्यक्ति के कम से कम छह महीने से उसी पते पर रहने का नियम है, लेकिन अब रेन बसेरों या खुले में रहने वाले गरीबों को इस प्रक्रिया से बाहर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा कि जब आधार को वोटर कार्ड से लिंक करना अनिवार्य कर दिया गया है, तो फिर उसे पहचान प्रमाण क्यों नहीं माना जा रहा?
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देवेन्द्र यादव ने कहा कि केंद्र सरकार की नई प्रणाली से न तो नागरिकता स्पष्ट हो रही है और न ही मतदाता पहचान की प्रक्रिया पारदर्शी रह गई है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि क्या भाजपा दिल्ली से 2008 के बाद आए लोगों को खदेड़ने की तैयारी कर रही है? उन्होंने कहा कि तब दिल्ली की आबादी 1.64 करोड़ थी, जबकि आज यह 3.59 करोड़ हो चुकी है।
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