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Doorstep Ration Delivery: घर-घर राशन योजना पर रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- केजरीवाल सरकार नहीं कर सकती केंद्र के राशन का इस्तेमाल

Fri, 20 May 2022 04:16 AM IST
अनुराग सक्सेना पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Fri, 20 May 2022 04:16 AM IST
सार

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ और दिल्ली राशन डीलर्स यूनियन द्वारा दायर याचिकाओं पर व्यापक सुनवाई करने के बाद 10 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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Doorstep Ration Delivery Scheme HighCourt says Delhi government cannot use center ration ban on the scheme
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली सरकार की बहुर्चित मौजूदा ‘घर-घर राशन वितरण योजना’ (मुख्यमंत्री घर घर राशन योजना) को रद्द कर दिया है। हालांकि न्यायालय ने कहा दिल्ली सरकार ‘नये सिरे से राशन की होम डिलीवरी की योजना शुरू करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इसके लिए वह केंद्र सरकार द्वारा मुहैया कराए गए आनाज का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने राजधानी के राशन डीलरों की ओर से सरकार की घर-घर राशन वितरण योजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया है। पीठ ने सरकार राशन डीलर्स संघ और दिल्ली राशन डीलर्स यूनियन की याचिकाओं पर सभी पक्षों को सुनने के बाद 10 जनवरी, 2022 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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पीठ ने दिल्ली सरकार की मौजूदा घर-घर राशन वितरण योजना को रद्द करते हुए कहा कि ‘वह इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत मुहैया कराए गए आनाज का इस्तेमाल नहीं कर सकती। अदालत ने कहा योजना के लिए केंद्र के अनाज का उपयोग नहीं किया जा सकता है। पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने ‘राशन की होम डिलीवरी की योजना के लिए उपराज्यपाल की सहमति नहीं ली थी। केंद्र व दिल्ली सरकार के आपसी विवादों के चलते घर-घर राशन वितरण योजना पर रोक लगी हुई थी।

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दिल्ली सरकार की यह योजना 25 मार्च, 2021 से ही शुरू होने वाली थी लेकिन केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 19 मार्च को इस पर आपत्ति जताई थी। मंत्रालय ने कहा कि इसमें ‘मुख्यमंत्री’ शब्द का इस्तेमाल शामिल नहीं किया जा सकता। मंत्रालय ने इसके अलावा कहा था कि दिल्ली सरकार की यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत आवंटित खाद्यान्न का वितरण प्रणाली में किसी भी बदलाव के लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी जो सिर्फ संसद द्वारा ही किया जा सकता है।

उच्च न्यायालय में दिल्ली सरकार ने अपने इस योजना का बचाव करते हुए कहा कि यह गरीबों के लिए है जिन्हें उचित मूल्य की दुकान (एफपीएस) मालिकों आनाज देने में परेशान करते हैं। दिल्ली सरकार ने यह भी कहा था कि ‘यह धारणा पूरी तरह से गलत’ है कि घर-घर राशन वितरण योजना लागू होने के बाद उचित मूल्य की दुकानों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। दिल्ली सरकार ने पीठ को बताया था कि आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बेंगलुरु जैसे राज्यों में राशन की डोरस्टेप डिलीवरी योजनाएं हैं।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता ने दिल्ली सरकार की घर-घर राशन वितरण योजना का विरोध किया था। केंद्र ने पीठ को बताया कि इस योजना के लागू किए जाने से राज्य, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) की मूल संरचना के प्रभाव को कम कर सकता है।

केंद्र ने कहा था कि किसी भी राज्य सरकार को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून की मूल संरचना में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं देना चाहिए। केंद्र ने राशन की उचित मूल्य के दुकान को इस कानून का एक अविभाज्य अंग बताया था। केंद्र ने पीठ को बताया था कि एनएफएसए के अनुसार, राज्यों को अनाज दिया जाता है जो उन्हें भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से लेना होता है और उचित मूल्य की दुकानों को देना होता है ताकि वे लाभार्थियों को उसका वितरण कर सकें।

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 नवंबर, 2021 को उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ केंद्र व अन्य की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था जिसमें दिल्ली सरकार को उचित मूल्य की दुकानों को खाद्यान्न या आटे की आपूर्ति को रोकने या कम नहीं करने का निर्देश दिया गया था।

उच्च न्यायालय ने पिछले साल 27 सितंबर को दिल्ली सरकार को सभी उचित मूल्य की दुकान के डीलरों को पत्र जारी करके उन राशन कार्ड धारकों की जानकारी देने को कहा था, जिन्होंने राशन की होम डिलीवरी का विकल्प चुना था। साथ ही कहा था कि उचित मूल्य की दुकानों के डीलरों को पीडीएस लाभार्थियों के राशन की आपूर्ति करने की आवश्यकता नहीं है, जिन्होंने अन्य योजनाओं का विकल्प चुना है।

राशन के लिए लाइन में खड़ा होना किसी व्यक्ति की गरिमा और निजता के अधिकार को ठेस नहीं पहुंचाता

उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति की गरिमा और निजता का अधिकार केवल इसलिए ठेस नहीं पहुंचाता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति को उचित मूल्य की दुकान के आउटलेट पर कतार में लगना पड़ सकता है। अदालत ने दिल्ली सरकार की राशन वितरण की योजना को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने उक्त योजना के संबंध में राज्य सरकार द्वारा जारी तीन निविदाओं को निरस्त कर दिया।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने मामले में हस्तक्षेपकर्ता बंधुआ मुक्ति मोर्चा के उस तर्क को खारिज कर दिया कि यह लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के तहत लाभार्थियों को अपना आवंटित संग्रह लेने के लिए मजबूर करने के लिए गरिमा और गोपनीयता के अधिकार के खिलाफ है। 

अदालत ने कहा उचित मूल्य की दुकानों से राशन हमारे विचार में यह केवल नागरिक आउटलेट से कुछ भी प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, यदि ऐसी कतार आवश्यक है, तो उन व्यक्तियों की संख्या को देखते हुए कतार में लगना चाहिए। यह किसी व्यक्ति की गरिमा और निजता के अधिकार को ठेस नहीं पहुंचाता। केवल इसलिए कि व्यक्ति को आउटलेट पर कतार में लगना पड़ सकता है आउटलेट किसी भी चीज के लिए या किसी भी सेवा के लिए हो सकता है।

अदालत ने कहा मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए, मिल्क बूथ पर दूध खरीदने के लिए, बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर बस, ट्रेन और एयरलाइन टिकट खरीदने के लिए, सिनेमा घरों में सिनेमा टिकट खरीदने के लिए, खेल के लिए टिकट खरीदने के लिए लोग कतार में लगते हैं। अदालत ने कहा कि अगर इस तरह की दलीलें स्वीकार कर ली जाती हैं तो इसका मतलब यह होगा कि कतार में खड़े ऐसे लोगों के सम्मान के अधिकार का हनन होता है। याची के तर्क की स्वीकृति का अर्थ यह भी होगा कि ऐसे व्यक्तियों को कतार में न खड़े होने या कतार तोड़ने का अधिकार नहीं है। ऐसा विचार समाज में सभ्यता और व्यवस्थित आचरण और दूसरों के अधिकारों के सम्मान को नष्ट कर देगा, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। 

अदालत ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि उचित मूल्य की दुकानों के दरवाजे पर टीपीडीएस के तहत लाभार्थियों को भोजन की डिलीवरी भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 के तहत लाभार्थियों को पर्याप्त भोजन और पोषण की गारंटी 

अदालत ने  यह भी  कह कि दिल्ली सरकार में टीपीडीएस के तहत लाभार्थियों को उनके दरवाजे पर पैकेज्ड आटा और चावल पहुंचाने की इच्छा और इरादे का करने में कुछ भी गलत नहीं है, हालांकि ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम की योजना और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत वैधानिक आदेशों के अनुसार हो अन्यथा नहीं।

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