{"_id":"63547ece2f79a8643c06835b","slug":"diyas-and-candles-made-by-the-deaf-and-visually-impaired-on-lal-bahadur-shastri-marg","type":"story","status":"publish","title_hn":"Diwali 2022: मूक बधिर और दृष्टिबाधितों ने तैयार किए दीये और मोमबत्तियां, हजारों घरों में फैलेगा उजियारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Diwali 2022: मूक बधिर और दृष्टिबाधितों ने तैयार किए दीये और मोमबत्तियां, हजारों घरों में फैलेगा उजियारा
Sun, 23 Oct 2022 05:07 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 23 Oct 2022 05:07 AM IST
सार
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन की ओर से स्वपना ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पूरा साल प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के तहत मोमबत्ती और दीये बनाना, पेपर क्राफ्टिंग, बेकरी, अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मेरे खुद के जीवन में वर्षों से अंधेरा छाया हुआ है, लेकिन जब हर दिवाली दूसरों के घरों में मेरे बनाए दीये उजियारा फैलाते हैं तो मेरा अपना अंधियारा ओझल हो जाता है। यह कहते ही लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन में प्रशिक्षण ले रहे राजेश के चेहरे पर मुस्कान की लकीर खिंच जाती है। यह काम सिर्फ राजेश ही नहीं, बल्कि यहां प्रशिक्षण ले रहे करीब 35 मूक-बधीर और दृष्टिबाधित भी कर रहे हैं, जिनके बनाई मोमबत्तियां और दीयों से इस दिवाली हजारों घर में उजियारा फैलेगा।
विज्ञापन
नई दिल्ली इलाके में ओबरॉय होटल के नजदीक हर साल दिवाली पर मेले का आयोजन किया जाता है। यहां मूक-बधीर और दृष्टिबाधितों द्वारा बनाए गए उत्पादों की बिक्री की जाती है। ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन की ओर से स्वपना ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पूरा साल प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के तहत मोमबत्ती और दीये बनाना, पेपर क्राफ्टिंग, बेकरी, अंग्रेजी बोलना सिखाया जाता है। बिक्री से जो पैसा प्राप्त होता है, उसे दृष्टिबाधितों और मूक-बधीर के प्रशिक्षण में इस्तेमाल किया जाता है।
विज्ञापन
80 तरह के दीये और मोमबत्तियां
प्रशिक्षुओं ने रात-दिन मेहनत कर इस बार 80 तरह के दीये और मोमबत्तियां बनाईं हैं। इनमें पानी में तैरने वाली मोमबत्ती, डीप मोमबत्ती, गियर मोमबत्ती, डमरू गणेश, चौखरी, घुंघरू मंदिर, हाथी दीया, मोर दिया, हरियाली दीया, कलश दीया, दिवाली मोर दीया, लालटेन, स्वास्तिक दीया, रथ दीया, फूल मोमबत्ती, कमल मोमबत्ती, बांबशेल मोमबत्ती और मशाल आदि प्रमुख हैं।
विज्ञापन