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Hindi News ›   Delhi ›   Disputes between the Lieutenant Governor and the Government of Delhi can begin after the enactment of the National Capital Territory Governance Bill

केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच सियासी जंग की नई जमीन तैयार, पहले भी हुए हैं इस तरह के मामले 

Tue, 23 Mar 2021 06:04 AM IST
योगेश जोशी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: योगेश जोशी Updated Tue, 23 Mar 2021 06:04 AM IST
सार

राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन विधेयक के कानून बनने के बाद शुरू हो सकता है उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार के बीच विवाद, पहले भी हुए हैं इस तरह के मामले।
 

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Disputes between the Lieutenant Governor and the Government of Delhi can begin after the enactment of the National Capital Territory Governance Bill
पीएम मोदी सीएम केजरीवाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक 2021 को लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद अब निगाहें राज्य सभा पर है। अगर राज्य सभा से बिल पास होने के बाद कानून में तब्दील होता है तो दिल्ली सरकार व केंद्र की बीच नए सिरे से सियासी जंग की जमीन तैयार हो जाएगी। पहले के अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि दिल्ली जुड़े मसलों पर दिल्ली की चुनी हुई सरकार और उपराज्यपाल में विवाद आम होगा। संभव है कि आम आदमी पार्टी व उसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को एक बार फिर सड़क से मोर्चा संभालना पड़े।

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लोकसभा से बिल पास होने के बाद मुख्यमंत्री ने इस तरफ इशारा भी किया। इस पर प्रतिक्रया जाहिर करते हुए अरविंद केजरीवाल ने ट्विट किया कि भाजपा ने दिल्ली की जनता को घोखा दिया है। जीतने वालों से शक्तियां छीनकर हारने वालों को दे दिया है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने विधेयक को लोकतंत्र की हत्या सरीखा बताया है।
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दरअसल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के बीच टकराव आम था। यहां तक कि मुख्यमंत्री को अपने कैबिनेट सहयोगियों के साथ राजनिवास में धरना देना पड़ा था। वहीं, आए दिन अलग-अलग मसलों पर उपराज्यपाल पर काम रोकने का आरोप लगाते हुए आप विधायक राजनिवास पर प्रदर्शन करते थे। अदालत का फैसला आने के बाद इस तरह का गतिरोध दूर हो गया था।
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जुलाई 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के काम में बाधा न बनें। सुप्रीम अदालत के मुताबिक, भूमि, कानून-व्यवस्था, पुलिस को छोड़कर दिल्ली सरकार के पास अन्य सभी विषयों पर क़ानून बनाने और उसे लागू करने का अधिकार है।


अब लोक सभा से पास विधेयक के कानून बनने से एक बार फिर दिल्ली सरकार को कोई भी नियम कानून या योजना लाने से पहले उपराज्यपाल की सहमति लेनी होगी। ऐसे में अगर कोई योजना लटकती है तो दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल आमने-सामने होंगे। आशंका जाहिर की जा रही है कि दिल्ली में 2018 से पहले की कहानी दुबारा दुहराई जाने वाली है। अगर सरकार और उपराज्याल के बीच मतभेद होगा तो योजनाएं लागू करना आसान नहीं होगा।

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