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सकारात्मक समाचार : मरीजों की सेवा के जज्बे में आड़े नहीं आई दिव्यांगता
Mon, 19 Jul 2021 06:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 19 Jul 2021 06:33 AM IST
सार
- एम्स के कोविड वार्ड में तैनात हैं नर्सिंग अधिकारी सुरेंद्र कुमार
- विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर खुद लगवाई थी ड्यूटी
- दिव्यांग कर्मचारियों को कोरोना में काम न करने की मिली हुई है छूट
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सुरेंद्र कुमार
- फोटो : amar ujala
विस्तार
एम्स के कोविड वार्ड में तैनात नर्सिंग अधिकारी सुरेंद्र कुमार कोरोना काल में दूसरों के लिए मिसाल हैं। 45 फीसदी दिव्यांग होने के बावजूद भी वह पिछले एक साल से कोरोना वार्ड में तैनात हैं। महामारी की दोनों लहरों में उन्होंने रोगियों की सेवा की है। सबसे खास बात यह है कि अपने विभागाध्यक्ष को पत्र लिखकर उन्होंने खुद की कोविड वार्ड में अपनी ड्यूटी लगवाई थी, जबकि अस्पताल के नियमों के अनुसार दिव्यांग कर्मचारियों को इस मामले में छूट मिली हुई है। उनकी इस पहल को देखकर कई अन्य कर्मचारियों ने भी उस दौकान कोरोना वार्ड में ड्यूटी लगवाई थी।
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राजस्थान के सीकर जिले के रहने वाले सुरेंद्र कुमार( 35) दिल्ली के पालम इलाके में रहते हैं। वह नौ साल से एम्स में नर्सिंग अधिकारी के पद पर तैनात हैं। वह कहते हैं कि जब पहली बार कोरोना मरीजों का इलाज किया तो थोड़ी घबराहट हुई, लेकिन धीरे-धीरे आदत हो गई। पैर मे खराबी के कारण कई बार पीपीई किट पहनने में परेशानी भी होती थी, घंटों वार्ड में खड़े भी रहना पड़ता था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपने काम में लगे रहे। वह पिछले एक साल में अब अपने घर गए हैं। तब से परिवार से दूर सिर्फ मरीजों की सेवा में लगे हुए थे। अब दिल्ली में कोरोना काबू में है और अस्पताल में कुछ ही मरीज भर्ती हैं तो वह एक साल बाद अब घर गए हैं।
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दूसरी लहर को कभी नहीं भूल सकता
सुरेंद्र ने कहा, दूसरी लहर में अप्रैल के उस माह में उनके कई नर्सिंग साथी भी लगातार संक्रमित हो रहे थे। ऐसे में दोहरी चुनौती थी। मरीजों की जान भी बचानी थी और खुद का भी बचाव करना था, ताकि लगातार रोगियों कि सेवा कर सकें। इस चुनौती के बीच उन्होंने खुद को संक्रमण से बचाए रखा। वह कहते हैं कि दूसरी लहर के समय को वह कभी नहीं भूल सकता। उस दौरान पांच मिनट के लिए भी बेड खाली नहीं थे। उनकी आंखों के सामने ही कई मरीजों ने दम तोड़ा। तब उन्होंने मरीजों और पीड़ितों के रिश्तेदारों के चेहरों पर मायूसी देखी, उनकी बेबसी को महसूस किया। उस मुश्किल घड़ी में लोगों के बीच भाईचारा भी देखा। उस सबके बीच अपने कर्तव्य पथ पर टीके रहे।
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पोलियों के कारण एक पैर हो गया था खराब
सुरेंद्र ने बताया कि बचपन में पोलियों के कारण उनका एक पैर पूरी तरह खराब हो गया था, लेकिन उनकी दिव्यांगता कमी भी उनके आड़े नहीं आई। देश के सबसे प्रतिठित अस्पताल में नौकरी मिली और जब महामारी के दौरान देश को उनकी जरूरत थी तो वह पीछे नहीं हटे और कोविड आईसीयू में तैनात हुए।
लोग न भूलें पहले वाले हालात
वह कहते हैं कि कोरोना बहुत ही खतरनाक बीमारी है। वह पिछले एक साल से इसकी भयावता को देख रहे हैं, अब संक्रमण कुछ घटा है तो लोग लापरवाही बरत रहे हैं, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।