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Delhi Riots: 'ये पुलिसवाला है, उसे पकड़ो... अंकित को देखती ही टूट पड़ी थी भीड़', आईबी अफसर के भाई का छलका दर्द

Wed, 15 Jul 2026 03:00 PM IST
Sharukh Khan ज्योति सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
ज्योति सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 15 Jul 2026 03:00 PM IST
सार

दिल्ली दंगों में जान गंवाने वाले आईबी अफसर अंकित शर्मा के भाई अंकुर ने कहा कि अंकित का सपना देश की सेवा था। उनके कातिलों को फांसी की सजा मिले। अंकुर ने कहा कि परिवार की लड़ाई सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना के लिए है। 

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Delhi Riots brother Ankur says Ankit sharma dream was to serve the country; now, the guilty must be hanged
Delhi Riots - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा हत्याकांड में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को दोषी करार दिया है। दोषियों की सजा पर अदालत 23 जुलाई को सुनवाई करेगा। अदालत ने 320 पन्नों के फैसले में साफ किया कि दोषसिद्धि अभियोजन की ओर से पेश किए गए 91 गवाहों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, वैज्ञानिक एवं इलेक्ट्रानिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट, वीडियो फुटेज, कॉल डिटेल रिकार्ड तथा परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला के आधार पर की गई।
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कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने विभिन्न प्रकार के साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए घटनाक्रम की ऐसी श्रृंखला प्रस्तुत की, जिससे अंकित शर्मा की हत्या की पूरी कड़ी स्थापित हो गई। इसी आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। अदालत ने ताहिर हुसैन के साथ नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या, अपहरण और अन्य मामलों में दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी हसीन उर्फ सलमान, फिरोज, गुलफाम, शोएब आलम उर्फ बॉबी, समीर खान और मुंतजीम को इस मामले में बरी कर दिया है। 
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अंकित का सपना देश की सेवा था अब दोषियों को फांसी मिले : अंकुर
मेरा भाई शारीरिक रूप से काफी मजबूत था। उसे पांच लोग मिलकर नहीं मार सकते थे। घटना में 15 से अधिक लोग शामिल होंगे, लेकिन अदालत ने पांच लोगों को दोषी ठहराया है। फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन मानते हैं कि सभी दोषियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, सजा भी मिलनी चाहिए।

 

ये बातें अंकित शर्मा हत्याकांड में कोर्ट का फैसला आने के बाद उनके छोटे भाई अंकुर शर्मा ने संवाद न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान कहीं। अंकुर ने कहा कि परिवार की लड़ाई सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं, बल्कि न्याय की स्थापना के लिए है। परिवार उनकी शादी की तैयारी भी कर रहा था। उस साल उनके लिए कई रिश्ते भी आए थे।
 
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ये पुलिसवाला है, उसे पकड़ो... 
अंकुर शर्मा ने बताया कि 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगों के दौरान अंकित ड्यूटी से लौट रहे थे। उस वक्त गली में दंगे का माहौल था। उससे हमारा परिवार वाकिफ था। हम खौफ में थे। वह जब ड्यूटी से आया और गली के बाहर गया तभी उसे भीड़ ने खींच लिया। 

 

एक चश्मदीद ने बताया, कि भीड़ भाई को देखकर बोल रही थी, कि ये पुलिसवाला है, उसे पकड़ो। वो हिन्दू है मारो उसे। वो शाम तक घर नहीं लौटे तो हम सब परेशान हो गए। पूरी रात उन्हें तलाशते रहे। अगले दिन उनका शव चांदबाग के नाले से मिला। उन्होंने कहा कि परिवार आज भी उस दिन को भूल नहीं पाया है।
 

बचपन से ही फौज में जाना चाहते थे अंकित
अंकित का जन्म 2 फरवरी 1994 को यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के इटावा गांव में हुआ था। बचपन से उन्हें क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो और कुश्ती जैसे खेलों का शौक था। लेकिन उनका सबसे बड़ा सपना देश की सेवा करना था। अंकित भी फौज में जाना चाहते थे। 

 

हमने घर बेच दिया...अंकुर ने कहा, अंकित के जाने के बाद घर काटने को दौड़ता था। गली से बाहर निकलते तो लगता भाई को मारा जा रहा है। वो गलियां कातिलों की तरह खौफनाक पल की याद दिलाती थी। इसलिए हमने भाई की हत्या के तीन महीने बाद ही घर बेच दिया था, और गाजियाबाद में किराए के मकान में रह रहे हैं।
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