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Delhi : रैपिड रेल को उपराज्यपाल की अनुमति से मिली जमीन, जंगपुरा यार्ड के लिए बनेगा एलिवेटेड रोड
Sun, 02 Jul 2023 05:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 02 Jul 2023 05:49 AM IST
सार
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसके लिए जमीन देने के प्रस्ताव को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए मंजूर कर लिया है। अब रिंग रोड से जंगपुरा के बीच एलिवेटेड रोड बनेगा। इससे मुसाफिर आसानी से रैपिड रेल के इस आखिरी स्टेशन तक पहुंच सकेंगे।
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रैपिड रेल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के जंगपुरा यार्ड तक पहुंचने की बड़ी अड़चन दूर हो गई है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसके लिए जमीन देने के प्रस्ताव को राष्ट्रीय महत्व का बताते हुए मंजूर कर लिया है। अब रिंग रोड से जंगपुरा के बीच एलिवेटेड रोड बनेगा। इससे मुसाफिर आसानी से रैपिड रेल के इस आखिरी स्टेशन तक पहुंच सकेंगे।
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राजनिवास कार्यालय का कहना है कि करीब 300 वर्गमीटर की यह जमीन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) के अधीन थी। इसे प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने का प्रस्ताव करीब दो साल से लंबित पड़ा था। जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर अब इसे मंजूर कर लिया गया है।
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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) जंगपुरा यार्ड को ट्रांजिट हब में विकसित कर रहा है। शुरुआती योजना में इस जगह को रैपिड रेल के यार्ड के तौर पर विकसित करना था। वहीं, आवासीय कालोनी के साथ कारपोरेट ऑफिस भी यहीं बनना था। बाद में तय किया गया कि यहां पर स्टेशन भी बनाया जाए। इससे सराय काले खां स्टेशन का ट्रैफिक लोड कम किया जा सकता है। यह ट्रांजिट हब तीन तरफ से रेल लाइन से घिरा है।
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ऐसे में ट्रांजिट हब का प्रवेश व निकासी मार्ग रिंग रोड पर होगा। एनसीआटीसी की योजना एक एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की है। इस प्रोजेक्ट के तहत डीएनडी के रिंग रोड से मिलान वाले प्वाइंट से एक एलिवेटेड रोड बनना है। इसी बीच में डीयूएसआईबी की 297 वर्ग मीटर की जमीन पड़ रही थी। जून 2021 में ‘जहां है, जैसा है’ आधार पर काम करने की अनुमति दी थी, लेकिन स्थायी रूप से जमीन का हस्तांतरण न होने से इसका काम शुरू नहीं हो सका, जबकि एनसीआरटीसी ने इसका टेंडर आबंटित कर दिया था। और प्रोजेक्ट शुरू होने के 19 महीने के भीतर पूरा भी करना है।
मुख्य सचिव ने मंजूरी को जरूरी बताया था
मार्च 2022 में दिल्ली सरकार ने कहा कि समस्त विचाराधीन भूमि डीयूएसआईबी की थी। लिहाजा, इसके लिए उपराज्यपाल की मंजूरी की जरूरत नहीं है। तत्पश्चात मंत्री (यूडी) और मुख्यमंत्री ने भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दे दी, लेकिन मुख्य सचिव ने भूमि को आरक्षित विषय मानते हुए उपराज्यपाल की मंजूरी को जरूरी बताया और इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेज दिया। अब उपराज्यपाल ने इसे राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट बताते हुए प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है।