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टूलकिट मामला: दिल्ली पुलिस का ट्विटर पर निशाना, खुद ही जांच कर सुना दिया फैसला, हमें बदनाम करने को फैला रहे झूठ

Thu, 27 May 2021 07:04 PM IST
सुशील कुमार कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: सुशील कुमार कुमार Updated Thu, 27 May 2021 07:04 PM IST
सार

दिल्ली पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक मंच होने के नाते ट्विटर को अपने कामकाज में पारदर्शिता करना चाहिए और पब्लिक डोमेन में स्पष्टता लानी चाहिए। चूंकि मामला सार्वजनिक किया गया है, इसलिए सीधे तौर पर दिए गए भड़काऊ बयानों पर रिकॉर्ड बनाना महत्वपूर्ण है।
 

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Delhi police registered preliminary inquiry complaint filed by Congress leader FIR filed behest of Government of India is wholly and completely incorrect
Twitter - फोटो : amarujala

विस्तार

कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे टूलकिट विवाद को लेकर दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को आड़े हाथों लेकर उस पर निशाना साधा है। दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि ट्वीटर ने टूलकिट मामले में खुद ही जांच कर खुद ही फैसला सुना दिया। 

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किसी भी मामले की जांच का अधिकार पुलिस के पास है और उसमें फैसला सुनाने का हक अदालत को है। पुलिस ने ट्विटर पर जांच में सहयोग न करने के आरोप लगाए हैं। ट्विटर की ओर से जारी किए बयानों को भी पुलिस ने झूठे और जांच को प्रभावित करने वाला बताया है। ट्विटर के मैनेजिंग डायरेक्टर को दिए नोटिस के बारे में पुलिस की ओर से कहा गया है कि उनको जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया था। पुलिस की ओर से उनको आरोपी नहीं बनाया गया था। लेकिन पुलिस को बदनाम करने के लिए झूठ को फैलाया जा रहा है।
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दिल्ली पुलिस प्रवक्ता चिन्मय बिश्वाल ने बताया कि टूलकिट मामले में कांग्रेस की ओर से मिली शिकायतों के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल जांच कर रही है। भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि उसने टूलकटि तैयार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा के कई नेताओं और पार्टी को बदनाम करने की साजिश रची थी। इसको लेकर भाजपा के कई नेताओं ने ट्वीट किए थे। इनमें भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा के ट्वीट को ट्विटर ने मैनिपुलेटेड मीडिया टैग बताकर हटाया था। तभी से मामले ने तूल पकड़ा। 
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मामले की टूलकिट मामले की जांच कर रही पुलिस का कहना था कि किस आधार पर ट्विटर ने ट्वीट को मैनिपुलेटेड मीडिया टैग बताया था। इसको लेकर दिल्ली पुलिस ने ट्वीटर से जांच में सहयोग के लिए कहा था। लेकिन इसके बाद ट्वीटर की ओर से झूठा प्रचार किया जाने लगा। ट्विटर ने दावा किया था कि जो टूलकिट डॉक्यूमेंट शेयर किया गया था, उसमें छेड़छाड़ की गई थी। ट्विटर को छेड़छाड़ की बात का कैसे पता चला, ट्वीटर इसकी जानकारी पुलिस से शेयर नहीं कर रहा है।

पुलिस ने अपने बयान में कहा कि ट्विटर न सिर्फ अपनी जांच कर रही है, बल्कि खुद ही फैसला भी सुना रही है। ट्विटर लगातार जांच करने के बाद ट्वीट को मैनिपुलेटेड बताने की बात करता रहा है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चूंकि ट्विटर एक पब्लिक प्लेटफॉर्म है, इसलिए उसे अपने व्यवहार में पारदर्शिता रखना चाहिए। पुलिस कांग्रेस की शिकायत पर मामले की जांच कर रही है। 

पुलिस ने ट्विटर के उन आरोपों को गलत बताया जिसमें, आरोप लगाया गया था कि वह सरकार के इशारे पर काम कर रही है। यदि ट्विटर के पास टूलकिट के मैनिपुलेटेड होने की कोई जानकारी है तो उसे पुलिस से सांझा करें, लेकिन ट्विटर के अधिकारी जांच से भाग रहे हैं। ट्विटर के अधिकारियों को आरोप बनाने के आरोपों को भी पुलिस से सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि ट्विटर को जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है।

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