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दिल्ली दंगा: गुलफिशा फातिमा की हिरासत को पुलिस ने वैध ठहराया
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने पिछले साल उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित एक मामले में आरोपी छात्रा कार्यकर्ता गुलफिशा फातिमा की याचिका का विरोध किया है। उच्च न्यायालय में पेश जवाब में पुलिस ने कहा कि फातिमा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका विचारणीय नहीं है। यह याचिका कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग के अलावा कुछ नहीं है।
अदालत फातिमा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें कथित बड़ी साजिश से संबंधित गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामले में उसे रिहा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। फातिमा ने याचिका में दावा किया है कि न्यायिक हिरासत में उसकी हिरासत अवैध है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति अमित बंसल की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुलिस ने तर्क रखा कि यह याचिका खारिज करने योग्य है। अदालत ने अब फातिमा के वकील को पुलिस के जवाब पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जून तय की है।
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दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ताओं अमित महाजन और रजत नायर द्वारा दाखिल जवाब में दावा किया गया है कि आरोपी फातिमा की याचिका झूठी, आधारहीन और निरर्थक है। यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग भी है। उन्होंने कहा 16 सितंबर, 2020 को फातिमा और अन्य आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की गई और अगले दिन संज्ञान लिया गया।
उन्होंने कहा कि आरोपी निचली अदालत के आदेश के अनुसार न्यायिक हिरासत में है। इसलिए न्यायिक हिरासत में उसकी नजरबंदी कानूनी और वैध है। उन्होंने कहा एक तरफ फातिमा का तर्क है कि नजरबंदी गैरकानूनी है और दूसरी ओर उसने निजी मुचलके और शर्तों पर अपनी रिहाई के लिए प्रार्थना की है।
संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इनमें 53 लोगों की मौत हो गई और लगभग 200 घायल हुए थे।
फातिमा को मामले में 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और वह इस समय न्यायिक हिरासत में है। उसके अलावा, मामले के अन्य आरोपी खालिद, इशरत जहां, ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और शिफा उर रहमान हैं और वे भी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।
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अदालत फातिमा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें कथित बड़ी साजिश से संबंधित गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) मामले में उसे रिहा करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। फातिमा ने याचिका में दावा किया है कि न्यायिक हिरासत में उसकी हिरासत अवैध है।
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न्यायमूर्ति रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति अमित बंसल की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष पुलिस ने तर्क रखा कि यह याचिका खारिज करने योग्य है। अदालत ने अब फातिमा के वकील को पुलिस के जवाब पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जून तय की है।
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दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ताओं अमित महाजन और रजत नायर द्वारा दाखिल जवाब में दावा किया गया है कि आरोपी फातिमा की याचिका झूठी, आधारहीन और निरर्थक है। यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग भी है। उन्होंने कहा 16 सितंबर, 2020 को फातिमा और अन्य आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत के समक्ष चार्जशीट दाखिल की गई और अगले दिन संज्ञान लिया गया।
उन्होंने कहा कि आरोपी निचली अदालत के आदेश के अनुसार न्यायिक हिरासत में है। इसलिए न्यायिक हिरासत में उसकी नजरबंदी कानूनी और वैध है। उन्होंने कहा एक तरफ फातिमा का तर्क है कि नजरबंदी गैरकानूनी है और दूसरी ओर उसने निजी मुचलके और शर्तों पर अपनी रिहाई के लिए प्रार्थना की है।
संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा के बाद 24 फरवरी, 2020 को सांप्रदायिक दंगे हुए थे। इनमें 53 लोगों की मौत हो गई और लगभग 200 घायल हुए थे।
फातिमा को मामले में 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था और वह इस समय न्यायिक हिरासत में है। उसके अलावा, मामले के अन्य आरोपी खालिद, इशरत जहां, ताहिर हुसैन, मीरान हैदर, नताशा नरवाल, देवांगना कलिता, आसिफ इकबाल तन्हा और शिफा उर रहमान हैं और वे भी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।