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झारखंड के जामतारा से ट्रेनिंग लेकर ऑनलाइन ठगी करने वाले समेत चार गिरफ्तार

Thu, 13 May 2021 12:49 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 13 May 2021 12:49 AM IST
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delhi police arrests jamtara trained cheat
नई दिल्ली। मध्य जिला की करोलबाग थाना पुलिस ने ऑनलाइन ठगी करने वाले एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसका मुखिया झारखंड के जामतारा में साइबर ठगी की ट्रेनिंग लेकर वारदात को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने इस संबंध में गैंग सरगना सेक्टर-21, गुरुग्राम, हरियाणा निवासी रवीश उर्फ अबीराम (24), मोहम्मद आरजू उर्फ साहिल (23), सेक्टर-22, गुरुग्राम निवासी योगेश सिंह (27) और गांव धरनपुर, फरुर्खाबाद, यूपी निवासी रितिक सिंह (19) को पकड़ा है।
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आरोपी कोविड महामारी के दौरान ऑक्सीजन सिलिंडर व दूसरे उपकरणों के नाम पर ऑनलाइन कोविड ठगी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी से दिल्ली में हुई ठगी की छह वारदातें सुलझाने का दावा किया है। पुलिस ने इनके 16 बैंक खाते फ्रीज किए हैं जिसमें 2.46 लाख रुपये मिले हैं। आरोपी एक सप्ताह में दिल्ली, यूपी, हरियाणा समेत अन्य जगहों से बीस से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुके हैं।
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पुलिस उपायुक्त जसमीत सिंह ने बताया कि आरोपियों के पास से पुलिस ने चार मोबाइल, 16 सिमकार्ड, एक लैपटॉप, दो बाइक, एक स्कूटी व काफी संख्या में दस्तावेज बरामद किए हैं। संत नगर, करोलबाग निवासी क्षतिज मेहरा ने अपने एक दोस्त के लिए ऑनलाइन सिलिंडर मंगाने के लिए आरोपियों से संपर्क किया था। आरोपी ने सोशल मीडिया से मिले नंबर पर खुद की पहचान रितिक सिंह बताई।
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आरोपी ने सिलिंडर के बदले 47500 रुपये की मांग की। बताए गए खाते में पीड़ित ने रुपये ट्रांसफर कर दिए। लेकिन उसे सिलिंडर नहीं मिला। इसके बाद उसने मामले की शिकायत पुलिस से की। छानबीन के बाद पुलिस ने तीन मई को मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। मोबाइल नंबर और बैंक खाते के आधार पर पुलिस ने फरुर्खाबाद, यूपी से एक आरोपी रितिक को सात मई को गिरफ्तार कर लिया।
इसके बाद इससे पूछताछ हुई। आरोपी ने गैंग के बाकी बदमाशों योगेश सिंह, मो. आरजू और रवीश के बारे में जानकारी दी। पुलिस ने गुरुग्राम में छापेमारी कर बाकी तीनों को 10 मई को गिरफ्तार कर लिया। गैंग के सरगना रवीश ने बताया कि वह जामतारा से ठगी की ट्रेनिंग लेकर आया था। इसके बाद उसने कई बैंकों में अकाउंट खुलवाकर उसमें ठगी की रकम को ट्रांसफर करवाना शुरू कर दिया।

गैंग में उसने बाकी तीनों को शामिल किया। कोविड के समय ऑक्सीजन सिलिंडर व बाकी दूसरे उपकरणों के नाम पर आसानी से ठगी जाने लगी। अपने गैंग के बाकी सदस्यों को रवीश हर महीने सैलरी देता था।
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