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दिल्ली: शराब के उत्पादन, वितरण और खपत पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग, भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की याचिका

Sun, 27 Feb 2022 11:32 AM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 27 Feb 2022 11:32 AM IST
सार

याचिकाकर्ता ने कहा कि नई शराब नीति के तहत प्रत्येक नगर पालिका वार्ड में लगभग तीन शराब की दुकानें होंगी, जो न केवल मनमाना और तर्कहीन है बल्कि खुले तौर पर कानून के शासन का भी उल्लंघन करती है।

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Delhi: Petition filed by BJP leader Ashwini Upadhyay seeking directions to ban the production, distribution and consumption of liquor
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई-फाइल फोटो

विस्तार

राजधानी को शराब की राजधानी बनाने से रोकने के लिए दिल्ली हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में अदालत से दिल्ली सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में मादक पेय और शराब के उत्पादन, वितरण और खपत पर रोक लगाने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह याचिका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है।

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याचिका में तर्क दिया गया है कि राज्य सरकार ने पिछले सात वर्षों में शराब और नशीले पदार्थों की खपत और उत्पादन को प्रतिबंधित, नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने के बजाय दिल्ली को भारत की शराब राजधानी बना दिया है। उनका कहना है कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत यह लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।

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याचिकाकर्ता का कहना है कि दिल्ली में कुल 280 नगरपालिका वार्ड हैं और 2015 तक केवल 250 शराब की दुकानें थीं। औसतन प्रत्येक नगर पालिका वार्ड में एक शराब की दुकान और 30 वार्डो में एक भी शराब की दुकान नहीं थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि नई शराब नीति के तहत राज्य सरकार शराब की दुकानों की संख्या में भारी वृद्धि करने की योजना बना रही है और इससे प्रत्येक नगर पालिका वार्ड में लगभग तीन शराब की दुकानें होंगी, जो न केवल मनमाना और तर्कहीन है बल्कि खुले तौर पर कानून के शासन का भी उल्लंघन करती है।

'शराब की खपत को बढ़ावा दे रही दिल्ली सरकार'

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य के अधिकार की गारंटी संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत दी गई है। याचिका में दिल्ली सरकार को अनुच्छेद 21 और 47 की भावना में मादक पेय और शराब के उत्पादन, वितरण और खपत का स्वास्थ्य प्रभाव आकलन और पर्यावरण प्रभाव आकलन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। अनुच्छेद 47 हालांकि मौलिक है और राज्य शराब-नशीले पदार्थों के सेवन पर प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य है लेकिन नशीले पेय और दवाओं के स्वास्थ्य खतरों के बारे में विज्ञापन देने के बजाय राज्य शराब की खपत को बढ़ावा दे रही है।

बोतलों पर भी नुकसान बताने वाली तस्वीरें लगाने का निर्देश देने की मांग

याचिका में कहा गया है कि सरकार को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वह शराब की बोतलों और पैकेजों पर स्वास्थ्य चेतावनी जैसे सिगरेट के पैकेट पर इस्तेमाल होने वाले चेतावनी संकेत प्रकाशित करे और लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और सोशल मीडिया के माध्यम से इसका विज्ञापन किया जाए।

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