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Delhi : अब मरीजों के दर्द पर मरहम लगा रहा है रोबोट, तकनीकी दौर में बढ़ रहा है दायरा
Fri, 05 May 2023 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 05 May 2023 05:35 AM IST
सार
रोबोटिक सर्जरी की मदद से शरीर के उस अंग तक भी आसानी से पहुंच हो रही है, जहां अब तक ओपन सर्जरी या लेप्रोस्कोपिक करने में समस्या आती है। साथ ही मरीज को बड़ा चीरा लगाने की जरूरत भी नहीं होती।
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रोबोटिक सर्जरी
विस्तार
दुर्लभ सर्जरी में रोबोट अहम भूमिका निभा रहा है। रोबोटिक सर्जरी की मदद से शरीर के उस अंग तक भी आसानी से पहुंच हो रही है, जहां अब तक ओपन सर्जरी या लेप्रोस्कोपिक करने में समस्या आती है। साथ ही मरीज को बड़ा चीरा लगाने की जरूरत भी नहीं होती।
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इस सर्जरी में मरीज के खून का नुकसान भी कम होता है। साथ ही घाव छोटा होने के कारण रिकवरी भी तेजी से होती है। लेप्रोस्कोपिक में अक्सर सर्जन के हाथों के कंपन से समस्या बढ़ जाती है जिसे रोबोटिक में दूर किया जा सका है। हालांकि, इसकी पहुंच अब भी सभी अस्पतालों में नहीं है, लेकिन तेजी से इसका विस्तार हो रहा है।
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डॉक्टरों का कहना है कि ओपन सर्जरी में बड़ा चीरा लगाने की जरूरत होती है। यह पुरानी विधि है और इसका इस्तेमाल सभी जगह हो रहा है। वहीं लेप्रोस्कोपिक में दो-तीन छेद बनाकर सर्जरी करने वाले यंत्रों को शरीर में डाला जाता है। सर्जन उन यंत्रों की मदद से सर्जरी करता है। इसमें कई बार सर्जन के हाथों के कंपन के कारण सर्जरी में कुछ नुकसान हो सकता है।
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रोबोटिक एडंवास विधि हैं। इसमें पूरा कंट्रोल एक कंप्यूटराइज्ड कंसोल पर बैठे सर्जन के हाथ में होता है। सर्जन कमांड देता है और रोबोट कमांड के आधार पर सर्जरी करता है, ऐसे में कंपन की समस्या भी खत्म हो जाती है। साथ ही इसमें लगे थ्री डी टेलीस्कोप से शरीर के आंतरिक भागों को जूम करके देखा जा सकता है जिससे सर्जरी करना और आसान हो जाता है। हालांकि इसमें एक कमी भी हैं, ओपन सर्जरी में जिस तरह से ऑपरेशन के बाद सटीक रूप से टांके लगाए जा सकते हैं, वहीं रोबोटिक के परिणाम उतने सटीक नहीं हैं। इस दिशा में सुधार के लिए काम किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह समस्या भी दूर हो जाएगी।
हो पाती है लक्षित सर्जरी
डॉक्टरों का कहना है कि रोबोटिक की मदद से लक्षित सर्जरी की जा सकती है। कार्डियोलॉजी विभाग में बाईपास सर्जरी के लिए छाती को खोलना पड़ता है, लेकिन रोबोटिक के माध्यम से सर्जरी करने पर बिना छाती को खोले ही आसानी से सर्जरी की जा सकती है जिससे मरीज को ठीक होने में काफी समय लगता है। इसके अलावा शरीर के अन्य अंगों में भी रोबोट की मदद से आसानी से सर्जरी हो पाती हैं।
तकनीक का है दौर
मरीजों के इलाज को लेकर आ रहे नए-नए तकनीक को लेकर करीब तीन हजार डॉक्टरों से चर्चा की गई। इस चर्चा में करीब 80 फीसदी डॉक्टरों की राय थी कि आने वाला समय तकनीक का है। तकनीक की मदद से न केवल उपचार आसान होगा, बल्कि मरीजों को होने वाला दर्द भी कम होगा। साथ ही वह जल्द ठीक हो सकेंगे।
-प्रो डॉ. मीनू बाजपेयी, अध्यक्ष, एम्स पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग
भविष्य है रोबोटिक सर्जरी का
समय के साथ साथ नए नए उपकरण आ रहे हैं। रोबोटिक इन्हीं उपकरणों का अपग्रेड वर्जन हैं। इसके आने के बाद से सर्जरी में होने वाले समस्याओं को कम किया जा सका है। मरीज भी जल्द ठीक हो रहे हैं। उन्हें लंबे समय तक घाव भरने का इंतजार नहीं करना पड़ता। वहीं, रोबोटिक में लगे थ्री डी विजन से शरीर के अंदर का हिस्सा देखना और आसान हो जाता है जो सर्जरी को बेहतर कर देता है।
- डॉ. फैजल मुमताज, जनरल व लेप्रोस्कोपिक सर्जन, अपोलो अस्पताल
बढ़ रहा है रोबोटिक सर्जरी का दायरा
तकनीक के साथ अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी का दायरा भी बढ़ रहा है। सफदरजंग अस्पताल देश के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में से एक हैं जहां कार्डियोलॉजी में रोबोटिक सर्जरी होती है। इसकी मदद से मरीज की रिकवरी काफी तेजी से होती है। यह भविष्य हो सकता है, इसमें लगातार सुधार व शोध हो रहा है। नई तकनीक सुविधाओं को सरल व सुलभ बना देती हैं।
-डॉ अनुभव गुप्ता, सीटीवीएस विभाग प्रमुख, सफदरजंग अस्पताल