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दिल्ली : अब बिल्कुल स्वस्थ घोड़ी पर ही सवार होगा दूल्हा, वर्ना कार्रवाई

Mon, 20 Sep 2021 04:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 20 Sep 2021 04:13 AM IST
सार

उत्तरी निगम ने बग्घी वाले घोड़ों का स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र बनवाना किया अनिवार्य

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Delhi: Now the groom will ride on a perfectly healthy mare, otherwise action
घोड़ी पर सवार दूल्हा - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

अब घोड़ी बिल्कुल स्वस्थ होगी, तभी दूल्हा उस पर सवार होकर शादी करने जा पाएगा। उत्तरी निगम ने घोड़ा-बग्गी के लिए वेटरनरी ट्रेड लाइसेंस की प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला लिया है। साथ ही, बग्घी में लगाए जाने वाले घोड़े-घोड़ी का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य कर दिया है। घोड़ी पूरी तरह स्वस्थ नहीं होगी और दूल्हा उस पर सवार होता है तो बग्घी के मालिक पर कार्रवाई होगी।

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उत्तरी निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष जोगीराम जैन नेे बताया कि घोड़ा-बग्घी के नए वेटरनरी लाइसेंस बनवाने या नवीनीकरण की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पुरानी ही रहेगी। पहले की तरह वेटरनरी अधिकारी और क्षेत्रीय उप निदेशक ही लाइसेंस बनाएंगे। अब ऑनलाइन आवेदन के समय पशुओं के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अपलोड करने में छूट देने का निर्णय लिया गया है। 
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साथ ही, सुनिश्चित किया गया है कि पशुओं की निरंतर स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य होगा। वेटरनरी विभाग की टीम ने निरीक्षण के समय पशुओं का स्वास्थ्य सही नहीं पाया या उनका स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र नहीं मिला तो लाइसेंसधारी बग्गी मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
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क्यों घोड़ी पर बैठता है दूल्हा
हिंदू रीति रिवाज के अनुसार विवाह के पूर्व दूल्हे को घोड़ी पर बैठाने की परंपरा है। इसे लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार घोड़ी बुद्धिमान, चतुर और दक्ष होती है। उसे सिर्फ स्वस्थ और योग्य व्यक्ति ही नियंत्रित कर सकता है। दूल्हे का घोड़ी पर चढ़कर आना इस बात का प्रतीक है कि घोड़ी की बागडोर संभालने वाला पुरुष अपने परिवार और पत्नी को भी अच्छे से संभाल सकता है।


हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान कृष्ण और रुक्मणी का विवाह हो या श्रीराम और माता सीता का, उस समय की परिस्थितियां युद्ध जैसी थी। यही वजह थी कि वह अपनी पत्नी को लाने घोड़ी पर जाया करते थे। यहीं से घोड़ी पर दुल्हन को लाने की परंपरा की शुरुआत हुई थी।

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