चलती दिल्लीः थोड़ा है मगर ज्यादा की जरूरत है, सुविधाएं बढ़ेंगी को घटेगा सड़कों का बोझ
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परिवहन व्यवस्था किसी शहर के विकसित होने का पहला मानक है। और विकसित शहर वह नहीं, जहां गरीबों के पास कार है। वह ऐसी जगह है, जहां अमीर भी सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन के सभी माध्यमों का सुलभ, आरामदेह, सुरक्षित और सबकी पहुंच में होना जरूरी है। तभी इनमें लोगों की यकीन बनेगा। दिल्ली इस लिहाज से बेहतर है कि यहां की सड़कों पर मेट्रो, बस से लेकर ऑटो व ई-रिक्शा तक सड़कों पर दौड़ते हैं। लेकिन इनके बीच बेहतर तालमेल नहीं है। पूरक बनने की जगह यह एक-दूसरे से टकराते हैं।
दिल्ली में बसों की न तो फ्रीक्वेंसी सही है और न ही इनका कोई समय प्रबंधन है। ऑटो, ई-रिक्शा समेत दूसरे सार्वजनिक वाहन भी मनमर्जी दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनसे बेहतर होने के बावजूद मेट्रो में यात्रियों की भीड़ आम है। इस सबका नतीजा निजी वाहनों की संख्या में तेज बढ़ोत्तरी के तौर पर सड़कों पर दिखता है। खासतौर से दोपहिया वाहन, जिनकी कुल वाहनों में हिस्सेदारी 66.33 फीसदी है। इसके बाद कार व जीप का हिस्सा 28.53 फीसदी है। इसके उलट बसों की संख्या सिर्फ 0.28 फीसदी है। वाहनों के दबाव से कराहती दिल्ली की तह में जाती टीम अमर उजाला की खास रिपोर्ट...
सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और दिल्ली:
- ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों में भी घर से मंजिल तक की अवाजाही का उचित इंतजाम नहीं है। लास्ट माइल कनेक्टिविटी बड़ी दिक्कत है।
- मेट्रो के अलावा परिवहन की सभी माध्यमों का समय प्रबंधन बेहद लचर है। वहीं, इनके आने-जाने का भी कोई तयशुदा समय नहीं है।
- दोनों के मिले-जुले असर से यात्रियों को कई बार बस स्टाप पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। या फिर मजबूरन महंगी कैब सहारा बनती है।
- इससे बचने के लिए निजी वाहन का इस्तेमाल बढ़ा है। इसका नतीजा सड़कों पर जाम के तौर पर दिखता है।
- पीक आवर्स में तो ज्यादातर सड़कें वाहनों के दबाव से कराहती हैं।
- फ्रीक्वेंसी अनियमित होने से कई रूट पर सार्वजनिक वाहन ओवरलोडेड होते हैं, जबकि कुछ रूट पर बसें खाली दिखती हैं।
- बसों का रूट एकीकृत न होने से अमूमन यात्रियों को अपनी मंजिल तक जाने के लिए कई बार बसें बदलनी पड़ती हैं। जिसकी सूचना देने का भी कोई उचित माध्यम नहीं है। फिर, हर बस में बार-बार टिकट खरीदना पड़ता है।
- ऑटो व ई-रिक्शा की मनमर्जी आम मुसाफिरों पर भारी पड़ती है।
- पीक आवर्स में मेट्रो सेवाएं भी भारी भीड़ रहती है। हालांकि, इसमें सहूलियत यह है कि तयशुदा समय पर मंजिल तक पहुंचा जा सकता है।
आगे का रास्ता:
- दिल्ली को परिवहन के हिसाब में जोन में बांटकर मांग और पूर्ति में तालमेल बिठाना जरूरी है। व्यस्त रूट पर बड़ी बसें नियमित अंतराल पर चलनी चाहिए। जबकि जहां यात्री कम हैं, वहां के लिए छोटी बसों को कम फ्रीक्वेंसी पर चलाना फायदेमंद है।
- लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए लिंक सेवाओं को मजबूती देनी होगी।
- हर रूट की स्टडी करवाकर बसों की आवाजाही बेहतर करना जरूरी है।
- मेट्रो की तरह रूट विशेष पर यात्रियों की संख्या ज्यादा होने पर बीच से अतिरिक्त बस चलाई जा सकती है।
- अलग-अलग माध्यमों से होने वाली यात्रा का अनुपात संतुलित किया जाना चाहिए। मसलन, यह नहीं हो सकता है कि मेट्रो में यात्री समय बचा ले और लास्ट माइल कनेक्टिविटी में उसका अतिरिक्त समय खर्च हो जाए।
- बसों समेत सड़कों पर चलने वाले वाहनों का कैब की तरह रीयल टाइम मॉनीटरिंग का इतंजाम करना होगा।
- रूट बदलने पर बार-बार टिकट लेने के झंझट से बचाने के लिए टिकट की ऑन लाइन बुकिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
- सार्वजनिक वाहनों की संख्या बढ़ाए जाने के साथ इस पर नियंत्रण भी जरूरी है। एक निर्धारित मानक के साथ ही अतिरिक्त वाहनों को मंजूरी मिलनी चाहिए जिससे सड़क पर भी वाहनों का अधिक दबाव न हो।
मेट्रो रोजाना लगती है 2700 फेरे
- दिल्ली मेट्रो के 389 किलोमीटर के नेटवर्क में 285 स्टेशन के बीच 2700 मेट्रो फेरे लगा रही है।
- 10 लाइनों पर यात्रियों को मेट्रो में सफर के साथ-साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी भी और बेहतर की जा रही है।
- औसतन दो से छह मिनट के अंतराल पर अलग-अलग लाइनों पर यात्रियों को मेट्रो की सुविधा मुहैया है।
- मेट्रो फेज-4 के तहत तीन कॉरिडोर निर्माणाधीन है।
- जनकपुरी पश्चिम-आरके आश्रम, तुगलकाबाद-एयरोसिटी और मौजपुर-मजलिस पार्क कॉरिडोर पर निर्माण कार्य चल रहा है। मेट्रो यात्रियों के लिए रिठाला-नरेला कॉरिडोर पर पहली मेट्रोलाइट का निर्माण होगा।
- एयरपोर्ट लाइन पर नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड शुरू हो गया है। अगले साल तक इसके दायरे में सभी लाइनें आ जाएंगी।
परिवहन मंत्री ने कहा...
दिल्ली की मौजूदा परिवहन प्रणाली को बेहतर करने की दिशा में सरकार की कोशिशें लगातार चल रही हैं। डीटीसी में 1000 लो फ्लोर एसी बसें, 300 इलेक्ट्रिक बसों के साथ साथ 2000 छोटी बसों को भी उतारने की तैयारी है। ईवी पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के सभी वाहनों को भी बदलने की तैयारी है। ई रिक्शा और टू व्हीलर के लिए भी स्विच दिल्ली अभियान चलाया जा रहा है।
सार्वजनिक परिवहन में भी ई बसें शामिल होने से बेहतर पर्यावरण के साथ साथ अधिक से अधिक लोगों को निजी वाहनों की बजाय एक सुलभ परिवहन विकल्प में सफर का मौका मिलेगा। दिल्ली सरकार की ओर से लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बेहतर करने के साथ साथ सभी परिवहन विकल्पों को एकीकृत करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
बेहतर परिवहन व्यवस्था के लिए दिल्ली सरकार के बढ़े कदम
- दिल्ली के सभी बस रूट्स को तर्कसंगत बनाया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद जरूरत के हिसाब से हर रूट पर बसें होंगी।
- कोरोना काल से पहले नजफगढ़ इलाके में इसका सफल ट्रायल हुआ था। अब एक बार फिर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें ध्यान उन रूट पर ज्यादा है, जहां बसें अभी नहीं हैं।
- बसों की टिकटिंग प्रणाली में भी बदलाव हो रहा है। इसके लागू होने से क्यूआर कोड को स्कैन कर यात्री टिकट या डेली पास ले सकेंगे। इसका ट्रायल चल रहा है। इससे यात्रियों का समय बचेगा।
- दिल्ली सरकार रीयल टाइम मॉनीटरिंग के लिए एप विकसित कर रही है। इससे यात्रियों की बसों की वास्तविक लोकेशन सही समय पर मिलेगी। इससे वह अपनी यात्रा समयबद्ध तरीके से तय कर सकेंगे।
- चार्टर व वन डेली एप से रूट विशेष पर जाम आदि से जुड़ी जानकारियां भी मिल सकेंगी। अगले एक महीने में इसे लांच करने की योजना है।
- बसों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी दिल्ली सरकार ने कदम बढ़ा दिया है।
- लास्ट माइल कनेक्टिविटी की सुविधा बढ़ाने के लिए ई-वाहन पॉलिसी लांच की गई है। इसके तहत कालोनियों के अंदर तक छोटे ई-वाहन पहुंच सकेंगे।
- इस दिशा में मेट्रो ने भी पहल की है। बृहस्पतिवार को जामिया नगर में मेट्रो प्रशासन में पहली ई-रिक्शा सेवा लांच की है।
ट्रैफिक पुलिस का जाम मुक्त दिल्ली अभियान
-सड़कों पर अवैध पार्किंग व अतिक्रमण के लिए विशेष अभियान चला रखा है। इससे आरडब्ल्यूए व एमडब्ल्यूए को भी जोड़ा गया है।
-कैमरा एप से अवैध रूप से पार्क वाहनों को चालान किया जा रहा है।
-ट्रैफिक पुलिस के टोडापुर स्थित हेडक्वार्टर से गूगल से जुड़ी हुई सात से आठ बड़ी स्क्रीन लग रही है। दिल्ली में जहां भी जाम लगता है इन स्क्रीन पर दिख जाता है। इसके बाद कंट्रोल रूम से संबंधित ट्रैफिक सर्किल इंस्पेक्टर को फोन कर जाम के बारे में सूचित किया जाता है और जल्द ही जाम को खुलवाने के आदेश दिए जाते हैं।
-दिल्ली ट्रैफिक पुलिस पीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर सड़कों की इंजीनियरिंग को देख रही है। जहां जरूरत पड़ी है वहां पर बैक टू बैक यू-टर्न बना दिया जाता है। पिछले सप्ताह लाइट सिग्नल को खत्म कर मजनू का टीला में इस तरह का यू-टर्न बनाया गया था।
-सोशल मीडिया के जरिए आम दिल्लीवालों को रीयल टाइम अपडेट भी दिया जाता है।
- दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अपनी ट्रैफिक इंटेलीजेंट मैनेजमेंट सिस्टम के तहत जगह-जगह स्क्रीन लगा रही है। आगे रोड पर जाम होता है तो पुलिस स्क्रीन पर जाम के बारे में बता देती है। स्क्रीन देखकर वाहन चालक अपने मार्ग पर बदल लेते हैं।
बढ़ रहा डीटीसी बसों का बेड़ा
. दिल्ली में बसों की संख्या 6,752 है। इसमें डीटीसी की 3,762 व क्लस्टर की 2,990 बसें हैं। जबकि दिल्ली में 11000 बसें चलाई जा सकती हैं।
. डीटीसी के बेड़े में 1000 बसें शामिल की जाएंगी। लो फ्लोर एसी बसों की पहली खेप जून में सड़कों पर उतार दी जाएंगी।
. दिसंबर, 2021 तक डीटीसी के बेड़े में 300 इलेक्ट्रिक शामिल होंगी।
. क्लस्टर की 1000 नई स्टैंडर्ड फ्लोर बसें खरीदी जाएंगी।
. 1000 लो फ्लोर एसी बसों की खरीद के तहत 311 बसें संचालित हो रही हैं। 89 मार्च तक 89 बसें पहुंचेंगी। सितंबर तक क्लस्टर के बेड़े में 1000 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल होंगी।