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सावधान : फेफड़ों के साथ हृदय पर भी हमला कर रहा है कोरोना, आ जाती है कमजोरी

अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 07 May 2021 03:53 AM IST

सार

  • राजधानी के कुछ अस्पतालों में संक्रमित मरीज की दिल की बीमारी से हुई मौत
  • डॉक्टरों ने कहा- मांसपेशियों में सूजन के बाद बढ़ जाता है हृदय का आकार
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demo pic... - फोटो : Social media
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विस्तार

राजधानी में कोरोना के कारण रोजाना 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। यह वायरस दो से तीन दिन में ही मरीजों के फेफड़ों को खराब कर रहा है और इसी वजह से वह दम तोड़ रहे हैं। अब ऐसे भी कुछ मामले सामने आए हैं, जहां वायरस फेफड़ों के साथ हृदय को भी नुकसान पहुंचा रहा है। डाक्टरों के मुताबिक, वायरस रक्त वाहिकाओं पर भी बुरा असर डाल रहा है, जो उनके अंदर सूजन पैदा करके रक्त के थक्के बना रहा है। इस कारण मरीजों को दिल का दौरा भी पड़ जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।
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राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में भर्ती होने वाले कुछ कोरोना मरीजों में हृदय संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं। युवा और 50 साल से अधिक उम्र के रोगी भी इससे ग्रस्त हैं। पिछले कुछ दिनों में ऐसे मरीज भर्ती हुए हैं, जिनके हृदय में खून के धक्के जमे मिले हैं। इसे मरीजों की तुरंत पहचान कर हृदय  रोग विशेषज्ञों की देखरेख में उनका इलाज किया जा रहा है। हालांकि, पिछले दिनों ऐसे ही एक मरीज की अस्पताल में मौत भी हुई है।


वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर प्रवीण कुमार बताते हैं कि कुछ कोरोना मरीजों में संक्रमण के कारण दिल की मांसपेशियों में सूजन की समस्या आ जाती है, जिससे हृदय का आकार बढ़ जाता है। रक्तचाप कम होने लगता है और मरीजों को दिल से संबंधित परेशानी होने लगती हैं। उन्होंने कहा कि कोविड संक्रमित मरीजों में खून के थक्के पाए गए हैं। कोरोना वायरस के कारण उनके फेफड़ों की कार्यक्षमता घट जाती है और इससे हृदय में पर्याप्त ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। जिन मरीजों को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी होती है तो उन्हें भी कोरोना से गंभीर खतरा होता है। 

केस 01 : राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती हुए रोहिणी निवासी प्रीत कुमार का एक मई को कोरोना से निधन हो गया था। अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि इस मरीज को फेफड़ों में ज्यादा परेशानी नहीं थी, लेकिन इलाज के दौरान आठवें दिन उसकी मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि मरीज की मौत हृदय गति रुकने से हुई थी।

केस 02 : पूर्वी दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में 28 अप्रैल को शाहदरा के रहने वाले सुमित की मौत हो गई थी। वह कोरोना संक्रमित था। उसके फेफडों को भी नुकसान हो गया था। आईसीयू में इलाज के दौरान ही मरीज को हार्ट अटैक आया और मौत हो गई।
 
इलाज के साथ दिल की जांच जरूरी
वरिष्ठ हार्ट सर्जन डॉक्टर अजीत कुमार बताते हैं कि ब्लड क्लॉट (खून का थक्का) कोरोना से सबसे मौतों की बड़ी वजह है। ऐसा भी दिख रहा है कि मरीज स्वस्थ होने के बाद जब अस्पताल से घर पहुंचता है तो उसे हार्ट अटैक आता है और उसकी मौत हो जाती है। इसको ध्यान में रखकर अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले मरीजों को खून पतला करने की दवा कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर देने पर विचार करना होगा। कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान हृदय संबंधी जांच को अनिवार्य करना होगा।

ऐसे कर रहा दिल को प्रभावित
डॉक्टरों के मुताबिक, वायरस शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित करता है। इसी प्रकार कोरोना से हृदय की मांसपेशियां भी कमजोर हो जाती हैं। यह दिल की धमनियों में खून के धक्के जमा देता है। इससे रक्तचाप में दिक्कत आने लगती हैं। कई मरीजों में  मरीजों की धड़कन कम या अधिक तेजी से चलने लगती हैं। इससे  हार्टअटैक आ जाता है। संक्रमित होने के पांचवें से छठे दिन के बाद मरीजों में यह समस्या देखी गई है।

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