फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi news:  Nirupama's sanskarshala is showing the way to society

समाज को राह दिखा रही है निरुपमा की संस्कारशाला, अतीत के पाठ से भविष्य को रोशन करने की चाहत

Fri, 15 Jan 2021 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली  
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली   Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 15 Jan 2021 06:07 AM IST
विज्ञापन
Delhi news:  Nirupama's sanskarshala is showing the way to society
निरुपमा गुप्ता - फोटो : amar ujala

वैज्ञानिक शोध संस्थानों में ज्ञान की रोशनी फैला चुकीं 73 वर्षीय आईआईटीयन निरुपमा गुप्ता अब मुखर्जी नगर की करीब एक हजार फ्लैट वाली सोसाइटी को अपने काम से रोशन कर रही हैं। मूलत : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की निरुपमा गुप्ता की लगन के आगे उम्र बाधा नहीं बनी। रुड़की से आईआईटी करने वाली निरुपमा ने सरकारी नौकरी की। वह पूसा पॉलीटेक्निक की हेड ऑफ डिपार्टमेंट (इलेक्ट्रॉनिक्स) व एक दशक तक कार्यवाहक प्रिंसिपल रहीं। 

विज्ञापन


सरकारी सेवा से मुक्त होने के बाद उन्होंने अपनी पहुंच में आने वाला हर वह काम किया, जिससे समाज बेहतर हो सकता है। अपनी कालोनी में गीले और सूखे कूड़े को अलग करने के लिए उन्होंने घर-घर जाकर लोगों का जानकारी दी। बुजुर्गों को अचानक होने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्या से बचाने की कोशिश की। सुबह-सुबह पार्क में योग की शिक्षा देना पसंदीदा काम है। संस्कारशाला चलाकर बच्चों को अपनी मिट्टी से भी जोड़ रही हैं। खास बात यह कि यह सब काम वह अपने खर्च पर करती हैं।
विज्ञापन


कचरा उठाने वालों से संवाद
पर्यावरण प्रदूषण से बचाने के लिए वे कचरा उठाने वालों से संवाद करती हैं। अनेक उपायों में एक महत्वपूर्ण प्रयत्न यह भी है कि घरों का गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग  रखा जाए। सूखा कूड़ा प्लास्टिक, पॉलीथिन, कागज जो रिसाइकिल हो सके तो गीला कूड़ा डिकम्पोज किया जा सके। निरुपमा अपनी सहयोगी मधुलिका गुप्ता के साथ घर-घर जाकर कूड़ेदान बांटती हैं तो कचरा उठाने वालों का सहयोग करने का नम्र निवेदन करती हैं। सफाई कर्मचारियों के साथ बैठक भी करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाल संस्कारशाला में अतीत का दर्शन
निरुपमा ने बताया कि कचरा प्रबंधन के साथ ही बाल संस्कारशाला के माध्यम से बच्चों में अतीत का दर्शन कराना उनकी दिनचर्या में शामिल है। अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में हिंदी के ज्ञान से दूर हो रहे बच्चों को हिंदी साहित्य, दर्शन, भारतीय संस्कृति से अवगत कराती हैं। सामाजिक डोर में बांधने के लिए बच्चों के बीच काम करना उन्हें पसंद है। लोगों से जुटाए गई हिंदी की पुस्तकें भी पढ़ने के लिए उपलब्ध कराती हैं।


बड़े-बूढ़ों की अटकती सांस को सहारा
सोसायटी के बुजुर्ग लोगों की अटकती सांस को सहारा देने में भी वे पीछे नहीं रहती हैं। घर में ही व्हील चेयर, स्टीक, ऑक्सीजन का इंतजाम रखती हैं। किसी भी बुजुर्ग को इसकी जरूरत होती है तो वे उपलब्ध कराती हैं। इस काम में सोसायटी के लोगों के साथ सीनियर सिटीजन क्लब के हरदीप सिंह कोहली समेत अन्य लोग मदद करते हैं।

परिचय

  • 1965 में रुड़की इंजीनियरिंग कॉलेज में शिक्षा।
  • उस वक्त 100 की बैच में महज 2 लड़कियां ही रुड़की में पढ़ती थी। 
  • वारंगल इंजीनियरिंग कॉलेज से एमटेक इन कंप्यूटर साइंस।
  • 11वीं क्लास में भारत सरकार की साइंस टैलेंट सर्च कंपीटशन में चयनित।
  • वर्ल्ड बैंक के साथ असिस्टेंट टेक्नीशियन एजुकेशन प्रोजेक्ट में कंसल्टेंट की जिम्मेदारी।
  • दिल्ली सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेनिंग एंड टेक्निकल इंस्टीट्यूशन से नौकरी की शुरुआत।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed