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फिर मुसीबत : कोरोना को मात दे चुके लोगों को मनोरोग ने घेरा, अस्पताल में भर्ती की नौबत

Sun, 13 Jun 2021 05:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 13 Jun 2021 05:39 AM IST
सार

  • पोस्ट कोविड मरीजों के मस्तिष्क को भी प्रभावित कर रहा है वायरस
  • कई रोगियों को करना पड़ रहा है अस्पताल में भर्ती, इहबास में रोज पहुंच रहे मरीज

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Delhi News : mental problems surround people who have defeated Corona
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विस्तार

कोरोना की चपेट में आने के बाद लोग शारीरिक के साथ-साथ अब मनोरोगी भी हो रहे हैं। इनमें कुछ की हालत इतनी गंभीर हो गई है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना लोगों के मस्तिष्क को भी प्रभावित कर रहा है। यही कारण है कि ठीक होने के बाद भी वे मनोरोग से ग्रसित हो रहे हैं।

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दिल्ली के मानव व्यवहार व संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के निदेशक डॉक्टर निमीष देसाई ने बताया कि पोस्ट कोविड परेशानियों में अब मनोरोग भी एक बड़ी समस्या बन गई है। उनके यहां रोजाना औसतन 600 से 700 मरीजों को ओपीडी में देखा जा रहा है। इनमें से करीब 50 रोगी ऐसे आ रहे हैं जो कोरोना से संक्रमित हुए थे और अब वह मानसिक समस्याओं से पीड़ित है। 
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मरीज को नींद न आना, घबराहट, चिंता, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (एक ही काम को बार-बार दोहराना) तनाव और घबराहट आदि लक्षण हो रहे हैं। इनमें से कई रोगियों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है। यह एक चिंता का विषय है।
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वरिष्ठ मनोरोग चिकित्सक डॉ. राजकुमार श्रीनिवास बताते हैं कि उनके पास करीब 50-60 प्रतिशत ऐसे मामले आ रहे हैं जहां लोग अकेलापन, घबराहट, नींद न आना और एकाग्रता की कमी महसूस कर रहे हैं। कई अध्ययन में पता चला है कि कुछ मामलों में कोरोना वायरस ने व्यक्ति के दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डाला है। यह वायरस मस्तिष्क को भी प्रभावित कर रहा है। इससे मनोरोग संबंधी बीमारियां हो रही हैं।

डॉ. राजकुमार ने बताया कि अधिकतर रोगियों में सबसे आम समस्या तनाव और घबराहट की देखी जा रही है। यह इसलिए भी हो रहा है कि कोरोना की वजह से अनिश्चितता का माहौल है। रोज नए आंकडे़ आते हैं, नए मामले सामने आ रहे हैं और अभी तक इसका कोई पुख्ता इलाज भी सामने नहीं आया है तो लोगों के मन में दहशत बैठ गई है।

ऐसे पाया जा सकता है काबू
सर गंगाराम अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव मेहता बताते हैं कि मनोरोग होने का सबसे बड़ा कारण मस्तिष्क में रसायनों की गड़बड़ी है। इससे बचने के दो तरीके हैं। पहला यह कि इन समस्याओं को शरीर में आने ही न दें। इसके लिए जरूरी है कि समय पर पूरी नींद लें। योग और प्राणायाम का भी सहारा लेना चाहिए। सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ना होगा। 


दूसरा तरीका यह है कि अगर संक्रमण से स्वस्थ होने के बाद मनोरोगों के लक्षण शरीर में आ गए हैं तो उसमें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। तुरंत डॉक्टरों की सलाह लेनी चाहिए। किसी भी बीमारी के लिए डाक्टरों पर ही भरोसा करना होगा। शंका की स्थिति में डाक्टरों और मनोरोग विशेषज्ञों की सलाह लेने से हिचकिचाना नहीं चाहिए।

मरीजों में ये हैं लक्षण

  • नींद न आना
  • घबराहट
  • भविष्य की चिंता
  • एक ही कार्य को बार-बार करना
  • पैनिक अटैक
  • तनाव
  • अवसाद
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