Delhi News : अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाकर सैकड़ों से ठगी, पांच गिरफ्तार
Delhi News: आरोपियों ने अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाई हुई थी और फर्जी कॉल सेंटर से पीड़ितों को कॉल की जाती थी। आरोपियों की पहचान मुख्य आरोपी हिसार, हरियाणा निवासी अतुल शर्मा, प्रदीप कुमार, कोमल, जैनब और चांदनी के रूप में हुई है।
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विदेशी बैंक का नया क्रेडिट कार्ड बनाने का झांसा देकर देशभर के सैकड़ों लोगों से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने तीन लड़कियों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाई हुई थी और फर्जी कॉल सेंटर से पीड़ितों को कॉल की जाती थी।
आरोपियों की पहचान मुख्य आरोपी हिसार, हरियाणा निवासी अतुल शर्मा, प्रदीप कुमार, कोमल, जैनब और चांदनी के रूप में हुई है। इनसे 21 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, दो सिम बॉक्स, 78 सिमकार्ड 7 फर्जी आधार और 4 डेबिट और क्रेडिट कार्ड बरामद हुए हैं। दूसरा मुख्य आरोपी शिवकुमार फिलहाल फरार है। शिव व अतुल ने मिलकर बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाई थी।
उत्तरी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल से पुलिस को ठगी की शिकायत मिली थी। बुराड़ी निवासी पीड़ित सुभाष चंद्र झा ने बताया कि उनसे नया क्रेडिट कार्ड बनवाने के नाम पर 1.94 लाख रुपये ठग लिए गए थे। जिला पुलिस उपायुक्त सागर सिंह कलसी ने बताया कि साइबर थाना पुलिस ने 21 जुलाई को एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू की। थाना प्रभारी पवन तोमर, एसआई रोहित व अन्य की टीम जांच शुरू की।
सुभाष के खाते से ट्रांसफर हुई रकम की जांच करने पर पता चला कि उससे नोब्रोकर और रिलाइंस डिजीटल से खरीदारी की थी। ठगी की रकम से खरीदे गए मोबाइलों की डिलीवरी के लिए आरोपी पोर्टर एप का इस्तेमाल कर रहे थे। आखिर 9 अगस्त को अतुल शर्मा को करोल बाग एरिया से गिरफ्तार कर लिया। इससे पूछताछ के बाद मोती नगर में फर्जी कॉल सेंटर पर छापा मारा गया।
मौके से कोमल, चांदनी और जैनब के अलावा प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया। अतुल ने बताया कि इन लोगों ने मोती नगर में फर्जी कॉल सेंटर बनाया हुआ था। तीनों लड़कियां कॉल कर लोगों को अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक का नया क्रेडिट कार्ड बनवाने का झांसा देती थीं।
ऐसे देते थे वारदात को अंजाम
अतुल शर्मा ने बताया कि उसने शिवकुमार के साथ मिलकर अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक की फर्जी वेबसाइट बनाई थी। जोइपर एप के जरिए बैंक के कस्टमर केयर नंबर से मिलता-जुलता टोल फ्री नंबर भी लिया हुआ था। कॉल सेंटर में मौजूद लड़कियां पीड़ितों को कॉल कर नया क्रेडिट कार्ड बनवाने की बात करती थी। इसके लिए पीड़ितों को फर्जी वेबसाइट का लिंक भेजा जाता था।
उस पर पुराने कार्ड की डिटेल भरवाई जाती थी, जैसे ही पीड़ित लिंक को क्लिक करता था, उसके साथ ही एपीके फाइल अपने आप डाउनलोड हो जाती थी। इसकी मदद से आरोपियों को पीड़ित के मोबाइल का एक्सस मिल जाता था। जैसे ही पीड़ित वेबसाइट पर अपनी डिटेल डालते थे। आरोपियों को वह दिख जाती थी और इसके बाद उनके खाते में सेंध लगाकर ठगी कर लेते थे।
ओटीपी न ही मैसेज, खाते से निकले 75 लाख
इनके छोटे भाई सुभाष कुमार भी कंपनी में पार्टनर हैं। कंपनी का बैंक ऑफ बड़ौदा में चालू खाता है। खाते में हुई हर लेनदेन का एसएमएस उनके पास आता है। ईमेल से भी जानकारी दी जाती है। सात अगस्त को उनको किसी पार्टी की रकम ट्रांसफर करना थी। इसके लिए शिव ने अपने खाते की नेट बैंकिंग ओपन की। खाता खुलते ही उनके होश उड़ गए। उनके खाते से 10 अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 65 लाख रुपये उड़ा लिए गए थे। शिव ने तुरंत बैंक को कॉल किया और खाते को बंद करने की रिक्वेस्ट की, लेकिन जब तक खाता फ्रीज होता तब तक 11वीं ट्रांजेक्शन कर 10 लाख रुपये और निकाल लिए गए। इसके बाद खाता बंद हो गया।
नौकरी दिलाने के नाम पर युवती से ठगी
उत्तर पश्चिम जिले में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का मामला सामने आया है। नौकरी के लिए युवती का ऑनलाइन साक्षात्कार भी लिया गया और उससे कई मद में हजारों रुपये खाते में जमा करा लिए गए। और पैसे की मांग करने पर युवती को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर सेल में इसकी शिकायत की। पुलिस छानबीन में जुट गई है।
अशोक विहार की रहने वाली दीपशिखा ने उत्तर पश्चिम जिला की साइबर सेल को दी शिकायत में बताया कि उसने अपनी छोटी बहन की ऑन लाइन जॉब के लिए क्विकर डॉट कॉम पर अपना अकाउंट रजिस्टर करवाया। उसके पास 18 जुलाई को एक युवती जाह्नवी का फोन आया। उसने खुद को क्विकर डॉट कॉम का प्रतिनिधि बताया। उसने कहा कि 1500 रुपये देकर उसे रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।
पीड़िता ने उसके बताए खाते में 1500 रुपये भेज दिए। उसके बाद व्हाट्सएप पर बॉयोडाटा मांगा। अगले दिन उसने बताया कि ऑनलाइन साक्षात्कार होगा। सोनिया नाम की युवती ने फोन कर बताया कि उसका एक निजी बैंक में सिलेक्शन हो गया है। उसे 21500 रुपये वेतन मिलेगा। घर पर दस्तावेज का सत्यापन करने के लिए उन्हें 5500 रुपये जमा करने होंगे। काफी आनाकानी और पैसे वापस करने की बात कहने पर पीड़िता ने पैसे जमा कर दिए।