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अध्ययन में खुलासाः कोरोना काल में बढ़ा अवसाद, योग ने किया बचाव

Fri, 19 Feb 2021 06:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली 
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 19 Feb 2021 06:21 AM IST
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Delhi News : depression increased in corona era says IIT study
सांकेतिक चित्र... - फोटो : पिक्साबे

वैश्विक महामारी कोविड-19 के लॉकडाउन के दौरान लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ा है। कोरोना महामारी के दौरान जिन लोगों ने योग को जीवनशैली में जारी रखा, उनमें ऐसी दिक्कतें बेहद कम  हैं। यह खुलासा आईआईटी दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा लॉकडाउन में योग पर की गई एक स्टडी में हु है। यह स्टडी प्लोस वन जर्नल में भी प्रकाशित हुई है। 

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आईआईटी दिल्ली के नेशनल रीसोर्स सेंटर फॉर वैल्यू एजुकेशन इन इंजीनियरिंग (एनआरसीवीईई)  के वैज्ञानिकों की टीम ने यह स्टडी की है।कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान -योगा एन इफेक्टिव स्ट्रेटजी फॉर सेल्फ मैनेजमेंट ऑफ स्ट्रेस रिलेटेड प्रॉब्लम्स एंड वेलबीइंग शीर्षक से यह अध्ययन किया गया था। 
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अध्ययन में सामने आया है कि कोरोना के दौरान लगे लॉकडाउन के 4 से 10 हफ्ते के बीच योगाभ्यास करने वालों में न करने वालों की अपेक्षा स्ट्रेस, एंजाइटी और डिप्रेशन का स्तर काफी कम था। यही नहीं उनमें मानसिक शांति का स्तर भी अधिक पाया गया। 
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इस शोध टीम में एनआरसीवीईई के प्रमुख प्रो. राहुल गर्ग, एनआरसीवीईई की डॉ पूजा साहनी, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के नितेश, आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर डॉ कमलेश सिंह शामिल थे। 
 
668 व्यस्क प्रतिभागियों पर अध्ययन:
प्रो. पूजा साहनी के नेतृत्व में आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने कुल 668 वयस्क प्रतिभागियों पर अध्ययन किया था।  यह स्टडी 26 अप्रैल से 8 जून, 2020  के बीच कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान की गई। इसमें अलग-अलग ग्रुप बनाए गए थे, जिनमें योग प्रेक्टिशनर, अदर स्प्रिचुअल प्रैक्टिशनर और नॉन  प्रैक्टिशनर को शामिल किया गया। उनसे डेली प्रैक्टिस को देखते हुए रिस्पांस लिये गए।  योगा प्रैक्टिशनर भी अभ्यास की अवधि के आधार पर  जैसे दीर्घकालिक, मध्य अवधि और शुरुआती के आधार पर परखे गए। 

लांग टर्म योग प्रैक्टिशनर ग्रुप में बीमार होने की चिंता कम
स्टडी में सामने आया कि मध्यावधि या शुरुआती समूह की तुलना में लांग टर्म योग प्रैक्टिशनर ग्रुप में कोरोना के चलते बीमार होने की चिंता कम थी। उनमें व्यक्तिगत नियंत्रण भी ज्यादा था. इनमें कोविड-19  के बुरे भावनात्मक प्रभाव और जोखिम के बारे में अन्य  ग्रुप की तुलना में कम  चिंता थी। 

प्रो. पूजा साहनी कहती हैं कि ‘‘जहां कोविड-19 के दौरान तनाव को मैनेज करने के तरीकों में से एक योग की सिफारिश की  गई। लेकिन इन दावों का समर्थन करने के लिए अनुभवजन्य साक्ष्य का अभाव था।  हमारे अध्ययन ने इसे मैप किया है जो कोविड-19  की संज्ञानात्मक और भावनात्मक समस्याओं पर योग का प्रभाव दिखा रहा है।
 

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