{"_id":"602f117fb26a461e3851703f","slug":"delhi-news-delhi-court-angry-over-not-filing-charge-sheet-even-after-permission","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंजूरी के बावजूद आरोप पत्र दायर न करने पर कोर्ट नाराज, रिकॉर्ड तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंजूरी के बावजूद आरोप पत्र दायर न करने पर कोर्ट नाराज, रिकॉर्ड तलब
Fri, 19 Feb 2021 06:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 19 Feb 2021 06:46 AM IST
विज्ञापन
saket court
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अदालत ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की मंजूरी मिलने के बावजूद आरोप पत्र दाखिल नहीं करने के जांच अधिकारी के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने एक मामले में संज्ञान लेते हुए पुलिस से पिछले तीन वर्ष के मामलों की जानकारी तलब कर ली।
विज्ञापन
साकेत कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अरविंद बंसल ने कहा पुलिस तीन वर्ष के उन मामलों की रिपोर्ट पेश करे जिनमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने आरोपपत्र दायर करने की मंजूरी दी है लेकिन आरोपपत्र दायर नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इससे निश्चित तौर पर दबा कर रखी गई फाइलें सामने आएंगी और जांच अधिकारी बेनकाब होंगे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी मिलने के बावजूद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं करना पदसोपान व्यवस्था और सेवा के अनुशासन की अनदेखी करने के समान है।
विज्ञापन
अदालत ने कहा कि जांच समय पर पूरी हो जाने के बावजूद भी आरोपपत्र दाखिल नहीं करना आम आदमी का न्याय व्यवस्था में विश्वास कम कर देता है। अदालत ने कहा जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति दें तो जांच अधिकारी को अदालत में तुरंत आरोपपत्र तुरंत दाखिल कर देना चाहिए। इसके लिए एक समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए और इसका अनुपालन सख्ती से किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा यह समय सीमा संबद्ध सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) द्वारा आरोपपत्र भेजे जाने की तारीख से 30 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। अदालत ने संबद्ध एसीपी को पिछले तीन साल (2018-20) में उनके द्वारा आईओ को भेजे गए आरोपपत्रों की सूची तैयार करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि यह भी पता लगाया जाए कि आखिर आरोपपत्र दायर क्यों नहीं किया गया। ऐसे में दोषी जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए।
अदालत ने साथ ही अधिकारी से अनुमति मिलने के बाद अभी तक दाखिल किए गए आरोप पत्र अदालत ने संबद्ध एसीपी को पुलिस उपायुक्त (दक्षिण-पूर्व) के मार्गदर्शन के तहत एक तंत्र भी बनाने का निर्देश दिया।