दिल्ली : कोरोना के कारण राजधानी में टूटी होटल कारोबारियों की कमर
- फाइव स्टार ही नहीं, बजट होटल और गेस्ट हाउस की स्थिति भी खराब
- कोरोना संक्रमण के कारण दोबारा पटरी पर नहीं लौटा है व्यापार
विस्तार
लॉकडाउन का लगभग एक साल पूरा हो गया है। कारोबारियों की आर्थिक रूप से टूटी कमर अभी ठीक भी नहीं हुई थी कि दोबारा कोरोना संक्रमण ने होटल, रेस्टोरेंट, बार, सिनेप्लेक्स को वापस वहीं पहुंचा दिया है। कारोबारियों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि उन्होंन बड़ी पूंजी इन व्यावसाय में लगा दी है तो वे इन्हें बदल भी नहीं सकते हैं।
लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी होटल कारोबार पटरी पर नहीं लौट पाया।
चाहे वह बजट होटल ही क्यों ना हो, लेकिन रेस्टोरेंट और बार में भीड़ बढ़ गई थी। मजे की बात तो यह भी है कि रेस्टोरेंट में जितनी बिक्री कोविड के पूर्व नहीं होती थी उससे भी अधिक होनी शुरू हो गई थी। डब्ल्यूएचओ ने जैसे ही कहा कि खाने-पीने की वस्तुओं से कोरोना नहीं फैलता तो होम डिलीवरी की मांग जबरदस्त रूप से बढ़ गई। होटल कारोबार की बात करें तो वह महज 5 से 10 फीसदी ही हो पाया।
स्थिति हो गई दयनीय
महंगे होटल में शुमार थ्री से फाइव स्टार का व्यावसाय पटरी पर नहीं लौटा, परंतु बजट होटल की स्थिति तो और दयनीय हो गई है। इसके पीछे वजह यह है कि फाइव स्टार होटल के कमरे तो 8-18 हजार रुपये थे, वह घटकर ढाई से चार हजार हो गए है। ऐसी स्थिति में बजट होटल की जगह लोग थ्री व फाइव स्टार में ही रहना पसंद करते हैं।
रेस्टोरेंट की बहार
रेस्टोरेंट में अचानक से लॉकडाउन के बाद भीड़ बढ़ गई। कारोबारियों का कहना है कि जितनी बिक्री लॉकडाउन के पहले नहीं होती थी उससे भी अधिक लॉकडाउन खुलने के बाद हुई। रेस्टोरेंट में बैठकर खाने वालों की संख्या में तो वृद्धि नहीं हुई, लेकिन घर पर मंगाकर खाना खाने वालों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ।
बार से बनी रही दूरी
कोरोना ने एक काम तो जरूर किया कि बार से लोगों की दूरी बढ़ा दी। बार एसोसिएशन से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि संक्रमण का दौर जब कम भी हुआ तो कारोबार में 30 प्रतिशत की कमी हुई। हालांकि, शराब की दुकानों पर बिक्री में कोई ज्यादा फर्क देखने को नहीं मिला।
अब क्या है रास्ता
- सभी को टीका लग जाए तो बात बनें
- कोरोना का डर जब तक नहीं निकलेगा होटल कारोबार राह पर नहीं लौटेगा
- जब तक विदेशियों के लिए वीजा भारत सरकार देना नहीं शुरू करती तब तक स्थिति ऐसी ही रहेगी
क्या कहते हैं कारोबारी
कोरोना की वजह से ठप पड़े कारोबार लॉस्रडाउन खत्म होने के बाद 70-100 प्रतिशत तक पटरी पर तो जरूर लौटे, लेकिन हॉस्पिटलिटी इंडस्ट्री 5-10 प्रतिशत ही पटरी पर लौट सकी। दोबारा कोरोना के संक्रमण ने तो आगे की उम्मीद पर भी पानी फेर दिया है। कभी दिल्ली में कोरोना का संक्रमण तेज हो जाता है तो कभी महाराष्ट्र, पंजाब व अन्य राज्यों में। ऐसे में पर्यटक आने से घबराते हैं। हालांकि, हील स्टेशन के रिजार्ट जरूर बेहतर स्थिति में है।
- मोहित शाह, महासचिव, दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर एसोसिएशन
बड़े होटल की तो बात ही छोड़ें तो गेस्ट हाऊस के कमरे भी खाली हैं। दिल्ली में करीब तीन हजार गेस्ट हाउस हैं, उनमें 20 प्रतिशत तक भी कमरे बुक नहीं हुए। फरवरी-मार्च का महीना एक तरह से सीजन होता है। इस दौरान कई आयोजन होते हैं, लेकिन इस साल भी कोरोना संक्रमण की वजह से परेशानी बनी हुई है। सरकार ना तो बिजली-पानी का बिल माफ करती है और ना ही बैंक लोन देती है। ऐसी स्थिति में इस व्यवसाय की कमर सीधी होती नहीं दिखती।
- संदीप खंडेलवाल, चेयरमैन, दिल्ली होटल एंड रेस्टोरेंट ऑनर एसोसिएशन