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शर्मनाक : अंतिम यात्रा के किराए में भी तोल-मोल, वसूले जा रहे हैं मनमाने दाम
Sat, 01 May 2021 04:55 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
सर्वेश कुमार, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 01 May 2021 04:55 AM IST
सार
- महामारी के इस दौर में इंसानियत की मिसाल पेश करने की बजाय श्मशान पर इंतजार की कीमत वसूली जा रही है
- परिजनों के साथ निजी एंबुलेंस चालकों की कहासुनी भी हो रही है
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- फोटो : amar ujala
विस्तार
जिंदगी के अंतिम स्थल (श्मशान) में शुक्रवार को सार्वजनिक स्थल से भी अधिक भीड़ दिखी। पहले सांसों की ऊंची कीमत, जब सांसों से नाता टूटा गया तो शवों को श्मशान तक पहुंचाने की (एंबुलेंस) कीमत में भी तोल मोल किया जा रहा है। महामारी के इस दौर में इंसानियत की मिसाल पेश करने की बजाय श्मशान पर इंतजार की कीमत वसूली जा रही है। कई बार तो परिजनों के साथ निजी एंबुलेंस चालकों की कहासुनी भी हो रही है।
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हालांकि नगर निगम और संस्था की टीम लगातार हालात पर नजर रख रही है ताकि गम में डूबे परिजनों को कम से कम परेशानी हो। द्वारका के सेक्टर-24 के श्मशान में सुबह से निजी एंबुलेंस में शवों को पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया। मृतकों में सभी उम्र और वर्ग के लोग थे। अलग अलग अस्पतालों से शवों को जैसे ही श्मशान में चिता पर डाला जा रहा था, वहीं एंबुलेंस चालक किराया वसूलने के लिए भी तोल मोल करते दिखे। एक चालक को मृतक के परिजनों ने तीन हजार की बजाय 4000 रुपये दिए, फिर भी इंतजार के नाम पर और चार्ज न मिलने पर कहासुनी होने लगी।
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अंतिम संस्कार के लिए तयशुदा कीमत
संस्था के प्रबंधक संदीप हुड्डा ने बताया कि अंतिम संस्कार पर करीब 3900 रुपये का खर्च आता है। पंडित और जरूरी सामग्री के लिए यह कीमत 2000 से 2500 रुपये है। उन्होंने बताया कि शवों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए सभी मदो में तय रेट पर ही लोगों को सुविधा दी जा रही है। भीड़ अधिक होने की वजह से लोगों की पर्चियां काटने के बाद उन्हें शवों के अंतिम संस्कार के लिए नंबर दिए जा रहे थे। श्मशान के अंदर एक साथ छह से सात एंबुलेंस खड़े होने की व्यवस्था है। एक तरफ चिता में जलते शव तो दूसरी तरफ अंतिम यात्रा वाहन के लिए भी अधिक खर्च करना पड़ रहा है। एक मृतक के परिजन ने कहा कि उन्हें कोरोना संक्रमित व्यक्ति की अगर मृत्यु हो जाती है तो अंतिम संस्कार तक भी हर तरफ खर्च होता है।
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पीपीई किट से भी संक्रमण का खतरा
श्मशान के प्रवेश गेट के पास ही पीपीई किट डस्टबिन में फेंके जा रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि डस्टबिन खुला होने की वजह से संक्रमण का खतरा भी है। शवों के अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले अगर निगेटिव भी हैं तो खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
शवों की लगातार बढ़ रही हैं संख्या
शाम पांच बजे तक श्मशान में अंतिम संस्कार के लिए 51 शव लाए गए थे। एक कर्मी ने बताया कि बृहस्पतिवार को 61 शवों का अंतिम संस्कार किया गया था जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा था। शवों के अंतिम संस्कार के लिए चार-पांच लोगों के अलावा पंडित और कर्मी भी होते हैं। संक्रमण से बचाव के लिए अंदर सभी एहतियाती इंतजाम तो हैं, लेकिन कई बार अनदेखी भी हो रही है।
शवों के संस्कार के लिए तैयार किए जा रहे हैं नए प्लेटफॉर्म
कोरोना से होने वाली मौतें इतनी बढ़ गई है कि श्मशान में नई चिताएं तैयार की जा रही है। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की ओर से 12 चिताएं जलाने के लिए प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है। इससे शवों की संख्या अधिक होने पर भी परिजनों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक चिता(प्लेटफॉर्म) को तैयार करने में 500 ईंटें लगाई जा रही हैं और रविवार तक शवों का यहां अंतिम संस्कार किया जाने लगेगा। श्मशान के ठीक बाहर सीएनजी से शवों के अंतिम संस्कार के लिए भी तैयारी है। शवों की संख्या अधिक होने पर कई बार इस जगह का भी इस्तेमाल किया जाता है।