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राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 6600 पेड़ हटाने व 'स्थापित' करने की मंजूरी

Fri, 20 Aug 2021 04:48 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 20 Aug 2021 04:48 AM IST
सार

  • दिल्ली सरकार ने दी मंजूरी, पांच पैकेज में 4365 पेड़ लगाए व 2314 पेड़ काटे जाएंगे

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Delhi News : Approval for removal and installation of 6600 trees for national highways
demo pic - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली सरकार ने शहरी विस्तार सड़क (यूईआर)-2 के निर्माण के लिए  6,600 से अधिक पेड़ों का प्रत्यारोपण और काटने की अनुमति दी है। यह कार्य पांच पैकेज में पूरा किया जाएगा। सरकार ने पांच पैकेज के तहत 36.45 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया है।

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पर्यावरण विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) परियोजना के लिए 4,365 पेड़ लगाएगा और 2,314 पेड़ काटे जाएंगे। यह परियोजना पूरी होने पर दिल्ली के उत्तर-पश्चिम-दक्षिण पेरिफेरी में तीन राजमार्गों को काटेगी। अधिसूचना के मुताबिक, परियोजना के तहत पांच हिस्सों में एनएच 1 से कराला-कंझावाला रोड,  कराला-कंझावला रोड से नांगलोई-नजफगढ़ रोड, नांगलोई-नजफगढ़ रोड से द्वारका सेक्टर-24, स्पर से सोनीपत बाईपास और स्पर से बहादुरगढ़ बाईपास को शामिल रहेंगे। 
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वन विभाग ने  एनएचएआई को पशिचमी जिला के उप वन संरक्षक  को प्रतिपूरक वृक्षारोपण करने और सात साल तक देखभाल के लिए सुरक्षा राशि के रूप में 38.07 करोड़ रुपये अग्रिम जमा करने के लिए कहा है। साथ ही एनएचएआई को अरावली जैव विविधता पार्क, तुगलकाबाद जैव विविधता पार्क, पश्चिमी दिल्ली जैव विविधता पार्क, उत्तरी रिज जैव विविधता पार्क और यमुना बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नीम, अमलतास, पीपल, पिलखान, गूलर, बरगद, शीशम, अर्जुन और अन्य देशी प्रजातियों के 66,790 पौधे लगाने का निर्देश दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि एनएचएआई द्वारा परियोजना स्थल के अंदर अपने फंड से  4,365 पेड़ों का प्रत्यारोपण किया जाएगा।
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पिछले वर्ष  दिसंबर में दिल्ली सरकार ने वृक्षारोपण नीति को अधिसूचित किया था। इसके तहत संबंधित एजेंसियों द्वारा विकास कार्यों से प्रभावित पेड़ों का कम से कम 80 फीसदी प्रत्यारोपण करना आवश्यक किया गया है। इसे लेकर विशेषज्ञों ने आलोचना भी की थी। उनका तर्क था कि प्रत्यारोपित किए गए पेड़ों की जीवित रहने की दर बहुत खराब होती है। उनका कहना था कि अधिकांश देशी और पुराने पेड़ स्थानान्तरण से अधिक समय तक नहीं बच सकते हैं।

नीति के मुताबिक, प्रतिरोपित या काटे गए प्रत्येक पेड़ के लिए दस पौधे लगाए जाने होते हैं। वन एवं वन्यजीव विभाग को भी अपनी वेबसाइट पर पेड़ों की कटाई के लिए स्वीकृत आवेदनों का रिकॉर्ड रखने होते हैं। वहीं, विदेशी वृक्ष प्रजातियों जैसे ल्यूकेना ल्यूकोसेफला, नीलगिरी ग्लोबुलस और प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (विलायती किकर) को प्रत्यारोपण के लिए नहीं माना जाता है। पेड़ों को प्रत्यारोपण करने के लिए आवेदकों को पैनल में शामिल एजेंसियों में से एक का चयन करना होता है। वहीं, एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होता है  कि प्रत्यारोपित किए गए सभी पेड़ जियो-टैग से लैस हो।

नीति के मुताबिक, पेड़ प्रत्यारोपण के एक वर्ष के अंत तक पेड़ों के जीवित रहने का रेट 80 फीसदी है। तकनीकी एजेंसी का भुगतान पेड़ की जीवित रहने की दर से जोड़ा जाएगा, यदि यह दर से नीचे रहती है तो इसके लिए दंड का प्रावधान भी किया गया है। वहीं, प्रत्येक उस प्रत्यारोपित पेड़ जो जीवित नहीं रहता है, उसके लिए 15 फीट ऊंचे और कम से कम 6 इंच व्यास वाले स्वदेशी प्रजातियों के पांच पेड़ एजेंसियों को लगाने होंगे।


जिन परियोजनाओं में 100 या इससे अधिक वृक्षों का प्रत्यारोपण किया गया है। वहां वर्ष के अंत में वृक्षों की जीवित रहने की दर स्थापित करने के लिए एक ऑडिट भी किया जाएगा। साथ ही संबंधित वृक्ष अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

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