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सरकार से नाराज किसानों ने पूछा- और कितने बलिदान चाहिए, श्रद्धांजलि न देने पर खिन्न
Sat, 13 Feb 2021 06:32 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 13 Feb 2021 06:32 AM IST
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गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान...
- फोटो : amar ujala
पिछले 77 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान संगठनों ने कहा कि रोटी को तिजोरी की वस्तु नहीं बनने देंगे और न ही भूख का कारोबार होने देंगे। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार की किसान विरोधी और कॉरपोरेट के हक में है। इस बात से भी सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाती है कि पहले बड़े बड़े गोदाम बनाए गए, फिर कानून लाए गए।
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संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सरकार ने संसद में जवाब दिया कि किसान आंदोलन के दौरान मृतकों को सहायता देने पर विचार नहीं किया जा रहा है। बृहस्पतिवार को संसद में जब किसानों को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, भाजपा और सहयोगी दलों के सासंदों ने असंवेदनशीलता दिखाई।
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मोर्चा ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि अब तक 228 किसानों की मौत हो चुकी है। उन्होंने सवाल पूछा कि सरकार को और कितने किसानों का बलिदान चाहिए। 13 फरवरी को कर्नाटक राज्य रैता संघ के संस्थापक और अग्रणी किसान नेता प्रो नंजुंदस्वामी की जयंती पर संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रगतिशील और न्यायसंगत समाज की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने की बात कही।
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नवदीप कौर की रिहाई के लिए हस्ताक्षर अभियान
सिंघु बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन के दौरान यूथ फ़ॉर स्वराज की ओर से मजदूर नेता नवदीप कौर की तुरंत रिहाई की मांग की गई। सदस्यों ने इस मांग के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान चलाया। उन्होंने कौर के खिलाफ हुए शोषण और हिंसा की निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों को सजा देने की मांग भी की। इस मौके पर भारी संख्या में लोगों ने नवदीप कौर की रिहाई के समर्थन में अभियान में शामिल हुए।
यूथ फ़ॉर स्वराज के कार्यकर्ता लवप्रीत सिंह, अमनदीप कौर ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए नवदीप कौर की गिरफ्तारी, जेल में उनके साथ हुई हिंसा और शोषण को शर्मनाक बताते हुए घटना की निंदा की। कार्यकर्ताओं ने हरियाणा सरकार से नवदीप कौर को तुरंत रिहा करने सहित मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।