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प्रेरणा और प्रकृतिः सड़क पर बोतल फेंकने वाले लोगों को उपहार में दे रहे हैं पौधा
Fri, 22 Jan 2021 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा
शुजात आलम, नई दिल्ली
शुजात आलम, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 22 Jan 2021 05:16 AM IST
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पौधा देते सिपाही आशीष...
- फोटो : amar ujala
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पेड़-पौधे बच्चे हैं तो प्राकृति उनकी मां...। अपने दादा से सुनी यह बात दिल्ली पुलिस के सिपाही आशीष कुमार दहिया को इतनी अच्छी लगी कि उन्होंने प्राकृति को बचाने का प्रण ही ले लिया। दिल्ली पुलिस में आशीष भर्ती हुए तो उनकी ड्यूटी इंडिया गेट पर लगी। यहां लोग पानी व कोल्डड्रिंक की प्लास्टिक की बोतलों को यूं ही सड़क पर फेंक देते थे। आशीष उन बोतलों को उठाते और उनमें मिट्टी डाल पौधा लगाकर यहां आने वाले लोगों को तोहफा दे देते।
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उनके इस कदम से न सिर्फ प्लास्टिक वेस्ट से निपटने में मदद मिली बल्कि लोगों में भी प्राकृति को बचाने के लिए जज्बा बढ़ने लगा। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को आशीष की पहल का पता लगा तो उन्होंने उनकी खूब तारीफ की। पूर्व पुलिस आयुक्त आमूल्य पटनायक ने तो मिलकर आशीष को शबाशी दी। आशीष ने भी पूर्व आयुक्त को पौधा भेंट कर दिया। अपनी इस मुहीम में पिछले नौ सालों के दौरान आशीष कुमार दो हजार से ज्यादा पौधे लगाकर लोगों का गिफ्ट कर चुके हैं।
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मूलरूप से गांव सिसाना, सोनीपत, हरियाणा के रहने वाले आशीष कुमार (38) वर्ष 2012 में दिल्ली पुलिस में चालक सिपाही भर्ती हुए थे। फिलहाल वह नजफगढ़ इलाके में रह रहे हैं। शुरूआत में आशीष की तैनाती पीसीआर वैन पर रही। इसके बाद वर्ष 2018 में एनएसजी से कमांडो की ट्रेनिंग लेने के बाद आशीष पराक्रम वैन पर तैनात हो गए। आशीष ने बताया कि शुरूआत में वह इंडियागेट पर रहे। यहां लोग घूमने आते और बोतले सड़क पर फेंक देते।
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आशीष ने उन बोतलों को उठाया और बीच से काट दिया। बाद में वहां इंडिया गेट से ही मिट्टी बोतल में डालते, उसमें मौसमी पौधे लगाकर बोतल फेंकने वालों को ही गिफ्ट कर देते। पौधा देने के साथ-साथ वह लोगों को चार-पांच पौथे लगाने के लिए जरूर प्रेरित करते। शुरूआत में उनके साथियों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन आशीष इससे बिल्कुल भी आहत नहीं हुए और उन्होंने अपने साथियों को भी पेड़-पौधों की महत्वता बताई।
बाद में मजाक उड़ाने वाले साथी ही उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे। आशीष की इस मुहीम को समर्थन करने के लिए कई निजी संस्थाओं ने उनको सम्मानित भी किया। वरिष्ठ अधिकारी भी उनकी इस अनूठी पहल से बेहद खुश हैं। फिलहाल अभी आशीष नेताजी सुभाष पैलेस इलाके में पराक्रम वैन पर तैनात हैं।
अपने दादा से प्रभावित होकर शुरू की मुहिम...
आशीष बताते हैं कि सन 1995 में नहर की पटरी टूटने से उनके गांव में बाढ़ आ गई। पूरे गांव में पानी भर गया। आशीष उस समय महज 12 वर्ष के थे। दादा स्व-चौधरी बस्तीराम दहिया से बाढ़ का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि नहर के किनारे पेड़ नहीं लगे थे, इसकी वजह से पटरी टूटी और बाढ़ आ गई। दादा ने आशीष को कहा कि यदि पेड़ होते थे तो बाढ़ न आती। दादा की यह बात आशीष के मन को छू गई। वह तभी से वह गांव, स्कूल और बाद में कॉलेज में भी पेड़ लगाने लगे। दिल्ली पुलिस में आने के बाद तो इस मुहीम को उन्होंने जीवन का हिस्सा ही बना लिया।
शादी या जन्मदिन पर पौधा देकर मुबारकबाद देते आशीष...
आशीष के पिता सेना से रिटायर हैं। उनका छोटा भाई विरेंद्र भी दिल्ली पुलिस में सिपाही है। पत्नी पारुल दहिया गृहिणी होने के साथ योगाचार्य भी हैं। आशीष ने बताया कि उनका पूरा परिवार प्राकृति को बचाने की इस मुहीम में उनके साथ हैं। वह या उनका परिवार किसी शादी या जन्मदिन समारोह में जाता है तो समाज को संदेश देने के लिए वह पौधा ही लोगों को गिफ्ट करते हैं। उनका लगता है कि इससे कुछ तो लोग सबक लेकर उनकी मुहीम से जरूर जुड़ेंगे।