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कोरोना योद्धा : जिंदगी बचाने ही नहीं, मौत के बाद भी मदद में जुटा दंपती
Sun, 16 May 2021 05:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 16 May 2021 05:18 AM IST
सार
- दिल्ली के अलावा गाजियाबाद और नोएडा से भी लोग करते हैं पुकार
- वहां भी चले जाते हैं जहां परिजन भी जाने से घबराते हैं
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हिमांशु और ट्विंकल कालिया...
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कोरोना काल में मानवता की पहचान हिमांशु और ट्विंकल कालिया अपना दिन जिंदगी के लिए संघर्ष करते मरीजों की मदद करने में बिताते हैं तो वहीं उनकी सम्मानजनक अंत्येष्टि भी करवा देते हैं जो जिंदगी की जंग हार जाते हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर ने राजधानी समेत देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। इस बीच हजारों लोगोें को ऑक्सीजन, अस्पताल में बेड और श्मशान में जगह के लिए संघर्ष करते देखा है। ऐसे माहौल में एंबुलेंस कपल हिमांशु और ट्विंकल बीमारों को अस्पताल पहुंचा रहे हैं, दवा लाकर दे रहे हैं, अंत्येष्टि की व्यवस्था करवा रहे हैं तो कभी जरूरत पड़ने खुद शवों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
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पीपीई किट पहने, फेस शील्ड और मास्क लगाए एंबुलेंस वहां जाता है जहां मरीजों या मृतकों के परिजन भी जाने से घबराते हैं। इनका पूरा दिन बीमारों को अस्पताल पहुंचवाने या फिर मृतकों को श्मशान पहुंचाने के लिए अपनी 12 एंबुलेंस के बेडे़ को किसी भी आपात स्थिति से निपटने के हमेशा तैयार रखने में बीतता है।
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हिमांशु ने बताया कि उनके पास इसका कोई रिकार्ड नहीं है लेकिन वह कोरोना की दूसरी लहर में रोजाना करीब 20-25 लोगों को अस्पताल पहुंचने में मदद करते हैं। वहीं अब तक वह कोरोना से मरने वाले 80 लोगों की मदद कर चुके हैं तो वहीं करीब एक हजार से ज्यादा लोगों का अंतिम संस्कार करवाने में मदद कर चुके हैं। ये सब लोगों की मदद के लिए निशुल्क करते हैं।
ट्विकल ने बताया कि कुछ दिन पहले उन्हें मयूर विहार से एक कॉल मिली। वहां पर अस्पताल जाते हुए ऑटो में ही एक कोरोना मरीज की मौत हो गई थी। वह उत्तरी दिल्ली के प्रताप नगर स्थित अपने घर से अपने पति के साथ तुरंत वहां पहुंची। डॉक्टर से शव की पड़ताल करवाने के लिए उसके अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।
वह कैंसर से पीड़ित रह चुकी हैं और उनकी 13 व सात साल की दो बेटियां जपजी और रिद्धी हैं लेकिन उनकी निजी जिम्मेदारियां लोगों की कोरोना काल में मदद करने की राह में आड़े नहीं आतीं।
ऐसे समय में जब एंबुलेंस की किल्लत और चालकों व मालिकों द्वारा तीमारदारों से अधिक वसूली की खबरें आ रही हैं। ऐसे समय में ये दंपती लोगों की निशुल्क सेवा कर रही है। हिमांशु का नंबर दिल्ली में कई स्थानों पर लिखा हुआ है।
एनसीआर से भी फोन
हिमांशु ने बताया कि अब उनके पास दिल्ली ही नहीं बल्कि गाजियाबाद और नोएडा से भी कॉल आने लगी हैं। इसके साथ कई अस्पताल भी कॉल करते हैं। वह बेहद तेजी से ड्राइव कर एंबुलेंस लेकर जरूरतमंद तक पहुंच जाते हैं। हिंमांशु की फास्ट ड्राइविंग के कारण आपात स्थिति में पुलिस और दूसरे लोग बुलाते हैं तो ताकि जख्मी या बीमार को बचाया जा सके। कभी एंबुलेंस को शव वाहन के तौर पर भी इस्तेमामल करना पड़ता है।