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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi news:  100-year-old Sauran Singh joined peasant movement

100 साल के सौरान सिंह भी कूदे किसान आंदोलन में, रहे हैं आजादी के नायक

Fri, 12 Feb 2021 05:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 12 Feb 2021 05:10 AM IST
सार

  • आजाद हिंद फौज के सिपाही 100 वर्षीय सौरान सिंह पहुंचे गाजीपुर बॉर्डर
  • बोले, हक की इस लड़ाई में आखिरी सांस तक डटे रहेंगे

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Delhi news:  100-year-old Sauran Singh joined peasant movement
सौरान सिंह... - फोटो : amar ujala

विस्तार

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के सिपाही और आजादी के ‘नायक’ रहे 100 वर्षीय सौरान सिंह भी किसान आंदोलन में कूद गए हैं। बृहस्पतिवार को वह अन्य किसानों के साथ गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने कहा कि हक की इस लड़ाई में वह आखिरी सांस तक डटे रहेंगे। देश की आजादी के लिए जिस तरह उन्होंने संघर्ष किया था, उसी तरह किसान आंदोलन में भी वह अन्नदाताओं के हित के लिए लड़ेंगे।

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उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिला अंतर्गत खुर्जा के रहने वाले सौरान सिंह बताते हैं कि वह सुबह गांव से अन्य किसानों के साथ ट्रैक्टर से गाजीपुर पहुंचे। वह अपने गांव के लोगों से किसान आंदोलन के विषय में सुन रहे थे। कई बार उन्होंने गाजीपुर बॉर्डर पर जाने के लिए भी कहा, लेकिन कड़ाके की ठंड के कारण लोग उन्हें यहां लाने से कतरा रहे थे। अब मौसम ठीक होने के बाद वह यहां आ गए हैं।
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1943 में नेताजी के साथ जुड़े
उन्होंने बताया कि उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा देश सेवा के लिए गुजरा है। वह नेताजी सुभाष चंद्र की आजाद हिंद फौज में सिपाही रहे हैं। 1943 में नेताजी ने संगठन के सर्वोच्च सेनापति की हैसियत से स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार बनाई थी। तब से वह उनके साथ जुड़ गए थे। आजाद हिंद फौज में रहकर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई भी लड़ी। साल 1945  के बाद से ही वह अपने गांव में खेती करने में लग गए। किसान मसीहा स्व. चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत कि 1988 में दिल्ली के बोट क्लब पर महारैली में भी वह शामिल हुए थे। उसके बाद कई साल तक वह किसान यूनियन से जुड़े रहे।
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कानून वापसी तक नहीं लौटेंगे
सौरान सिंह कहा कि इस समय वह अपने पर अपनी छठी पीढ़ी देख रहे हैं। उनका पूरा परिवार खेतीबाड़ी से जुड़ा है। गांव के कई लोग केंद्र की ओर से बनाए गए कृषि कानूनों के विषय में चर्चा करते रहते हैं। लोग उन्हें बताते हैं कि सरकार ने जो कानून बनाए हैं उनसे किसानों को नुकसान होगा। उनका कहना है कि जब तक सरकार नए कानून वापस नहीं ले लेती है वह वापस नहीं जाएंगे।

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