फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi-NCR's AQI best in eight years

Delhi : पारा चढ़ा और हवा चली तेज... प्रदूषण का घुटा दम, दिल्ली-एनसीआर का AQI आठ साल में सबसे अच्छा

Sat, 17 Dec 2022 02:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 17 Dec 2022 02:35 AM IST
सार

Delhi-NCR : इस बीच सतह पर चलने वाली हवा की रफ्तार के साथ तापमान भी ज्यादा दर्ज किया गया। दोनों के मिले-जुले असर से प्रदूषक आबोहवा में देर तक ठहर नहीं सके। नतीजतन पंद्रह दिनों में कभी भी वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में नहीं जा सका और लोगों ने राहत की सांस ली।

विज्ञापन
Delhi-NCR's AQI best in eight years
demo pic... - फोटो : ANI

विस्तार

मौसमी दशा के अनुकूल होने से दिल्ली-एनसीआर की हवा आठ साल में पहली बार दिसंबर के पहले पखवाड़े में बेहतर रही। इस बीच सतह पर चलने वाली हवा की रफ्तार के साथ तापमान भी ज्यादा दर्ज किया गया। दोनों के मिले-जुले असर से प्रदूषक आबोहवा में देर तक ठहर नहीं सके। नतीजतन पंद्रह दिनों में कभी भी वायु गुणवत्ता सूचकांक गंभीर श्रेणी में नहीं जा सका और लोगों ने राहत की सांस ली। सांस के रोगियों का दम नहीं घुटा और हालात काफी सुधरे रहे।

विज्ञापन


विशेषज्ञों के मुताबिक, बीते पंद्रह दिनों में पर्वतीय इलाकों के साथ दिल्ली-एनसीआर में हवा का दबाव अधिक रहा, जबकि निम्न दबाव का केंद्र बंगाल की खाड़ी में था। इससे हवा का असर पूरब की तरफ रहा। इस बीच तापमान भी औसत से ज्यादा रिकार्ड किया गया। इससे तेज हवा प्रदूषकों को दूर तक ले गई और तापमान की अधिकता से यह धरती की सतह से काफी ऊपर तक फैले रहे। इससे दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर ज्यादा नहीं हुआ।
विज्ञापन


हवा की तेज रफ्तार के लिए कई मौसमी कारक जिम्मेदार हैं। चक्रवातीय स्थिति होने से समुद्री इलाकों में निम्न दबाव के कारण ऐसी स्थिति बनी।
- प्रोफेसर डॉ. अनु गोयल, टेरी सेंटर फॉर एनवायरमेंटल स्टडीज

हवा की रफ्तार और न्यूनतम व अधिकतम तापमान में अंतर बढ़ने से हवा की गुणवत्ता में सुधार आया। इससे प्रदूषकों का बिखराव आसानी से होने से हवा साफ हुई।
- दीपांकर शाहा, पूर्व अतिरिक्त निदेशक, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हवा की रफ्तार बढ़ने के साथ प्रदूषकों का बिखराव होने से हवा की गुणवत्ता में सुधार आया। पिछले कुछ दिनों के दौरान मौसमी कारकों की वजह से प्रदूषकों को इकट्ठा होने का मौका नहीं मिला। हवा की रफ्तार 8-14 किलोमीटर प्रतिघंटा रही। पिछले वर्ष के दौरान यह साढ़े पांच किलोमीटर प्रतिघंटा रही। उत्तर पश्चिमी हवा से भी हालात में सुधार आया। पिछले वर्षों के दौरान हवा की कम रफ्तार, तापमान में अंतर कम होने से अधिक प्रदूषण रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

- कुलदीप श्रीवास्तव, प्रमुख, प्रादेशिक मौसम पूर्वानुमान केंद्र, भारतीय मौसम विभाग

अक्तूबर के बाद नहीं हुई और पराली जलाने की घटनाएं भी कम हुई हैं। दूसरे मौसमी कारणों से भी इस साल अक्तूबर-नवंबर में प्रदूषण पिछले आठ वर्षों में कम रहा। हवा की गुणवत्ता में सुधार दर्ज होने के बाद अब रफ्तार पर ही आगे का मौसम निर्भर है। तापमान कम होने से सतही हवा निचले स्तर पर चली। हवा की गति धीमी होने से हर साल अक्सर स्मॉग होता है।
- अनुमिता रॉय चौधरी, कार्यकारी निदेशक, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवारमेंट

एन कैप की दिशा में राज्यों की पहल का दिखने लगा है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल ही में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु नीति (एन-कैप)के तहत 132 शहरों को शामिल करने से भी प्रदूषण स्तर कम हुआ है। इसके तहत पराली जलाने की घटनाओं में कमी, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की सख्ती, कचरे का डोर टू डोर कलेक्शन और मेटेरियल रिकवरी और कूड़ा जलाने की घटनाएं भी कम हो रही हैं।

दिल्ली-एनसीआर में कूड़ा कहीं भी फेंकने की जगह लोगों के घरों तक पहुंचने वाली गाड़ियां ही कूड़ा ले जाती हैं। दिल्ली में करीब 65 फीसदी प्रदूषण दूसरे राज्यों से होता है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों से भी हालात सुधरे हैं। एन कैप के पूरी तरह लागू होने से प्रदूषण स्तर में और सुधार की उम्मीद है। इसके लिए सरकारें स्थानीय एजेंसियों को प्रोत्साहित कर रही हैं।


बराबर कम हुआ प्रदूषण
डॉ. अनु गोयल के मुताबिक, व्हीकल रिटायरमेंट पॉलिसी के लागू होने से पुराने वाहनों की संख्या कम होने से भी हवा की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है। सामान्य तौर पर एक पुराने वाहन से नए वाहनों की तुलना में 20 गुना तक अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है। 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को दिल्ली में चलने की इजाजत नहीं है। इस साल दिल्ली में नवंबर तक करीब 10 हजार पुराने वाहनों को स्क्रैप कर दिया जाता है तो इससे करीब दो लाख नए वाहनों के बराबर प्रदूषण में कमी की संभावना है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed