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Delhi : जरा देखकर चलो... रात में हो रहे सबसे ज्यादा हादसे, दिल्ली परिवहन विभाग की रिपोर्ट से खुलासा
Wed, 08 Feb 2023 03:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 08 Feb 2023 03:40 AM IST
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राजधानी की सड़कों पर पैदल और दोपहिया वाहनों का सफर सबसे ज्यादा जोखिम भरा है। वर्ष 2021 में हुए सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में 43 फीसदी राहगीर और 42 फीसदी दोपहिया वाहन चालक हैं। हालांकि, बीते तीन साल में सड़क हादसों में राहगीरों की मौत के आंकड़े में कमी आई है, लेकिन फिर भी सबसे ज्यादा मौतें पैदल चलने वालों की ही हुई हैं।
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दूसरे नंबर पर दोपहिया वाहन चालक हैं। सबसे ज्यादा हादसे शुक्रवार रात आठ से दो बजे के बीच हुए हैं। हादसों के लिहाज से आउटर रिंग रोड, एक्सप्रेस वे और राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के वक्त का सफर सबसे अधिक जोखिम भरा है। ये खुलासा दिल्ली परिवहन विभाग की रिपोर्ट से हुआ है।
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दरअसल, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए परिवहन आयुक्त की पहल पर ट्रैफिक पुलिस, ब्लूमबर्ग इनिशिएटिव और आईआईटी, दिल्ली की ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंज्यूरी प्रिवेंशन सेंटर (ट्रिप्स) ने वर्ष 2019-2021 तक के दिल्ली की सड़कों पर हुए हादसों पर अध्ययन किया है। वर्ष 2021 में हुई सर्वाधिक मौतें दोपहिया वाहन सवारों की हुई हैं। इनमें भी पीछे बैठने वालों की संख्या ज्यादा है। सड़क हादसों के विश्लेषण पर आधारित आंकड़ों की प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) और एक्सप्रेसवे पर प्रति किलोमीटर सबसे अधिक मौतें हुई हैं। वर्ष 2021 में दिल्ली में 1,242 लोगों की मौतें हुईं, यानी रोजाना सड़क हादसों में तीन लोगों ने जान गवाई। वहीं, वर्ष 2020-21 के दौरान सर्वेक्षण के आधार पर 53 फीसदी परिवारों के पास दोपहिया वाहन हैं। करीब 19 फीसदी के पास कार है, जबकि 27 फीसदी परिवारों के पास साइकिल है। वर्ष 2011 में दिल्ली में दोपहिया वाहनों की संख्या 39 फीसदी थी।
शुक्रवार को हुई सर्वाधिक मौतें
विश्लेषण में सामने आया है कि शुक्रवार रात 8 बजे से 2 दो बजे तक सर्वाधिक 240 मौतें हुई हैं। इसके लिए तेज रफ्तार और नशे को मुख्य वजह माना गया है। हादसों के अध्ययन में सड़कों पर सुरक्षा के लिहाज से बुनियादी सुविधाओं की कमी और पैदल चलने वाले भी हादसे की मुख्य वजह के तौर पर उभरकर सामने आए हैं। वहीं, मंगलवार रात आठ से दो बजे के दौरान तीन वर्ष में 222 लोगों की जान चली गई।